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Hindi News ›   Chandigarh ›   Exclusive Interview of Haryana Home Minister Anil Vij

Haryana: गृहमंत्री अनिल विज की दो टूक... मेरा खुद का सूचनातंत्र बहुत मजबूत, सीआईडी नहीं तो क्या हुआ

Mon, 13 Feb 2023 12:26 PM IST
निवेदिता वर्मा प्रवीण पाण्डेय, अमर उजाला, चंडीगढ़
प्रवीण पाण्डेय, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 13 Feb 2023 12:26 PM IST
सार

गृहमंत्री अनिल विज ने कहा कि हरियाणा पुलिस में जिम्मेदारी का भाव हमारी सरकार में आया है। कई बड़े बदलाव किए हैं, डायल 112 शुरू किया है। कई मामलों में एसआईटी का गठन किया है। प्रदेश भर की जनता की सुनवाई मैं खुद करता हूं।

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Exclusive Interview of Haryana Home Minister Anil Vij
अनिल विज - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

हरियाणा के गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज इन दिनों प्रदेश में नशा माफिया की जड़ें उखाड़ने में लगे हैं। नशा तस्करों की संपत्तियां ध्वस्त की जा रही हैं। भले ही सीआईडी उनके पास न हो, लेकिन उन्होंने पुलिस विभाग में ही अपना सूचना तंत्र विकसित कर लिया है, जिसके माध्यम से सभी सूचनाएं उनके पास पहुंचती हैं। अमर उजाला के राज्य ब्यूरो प्रमुख प्रवीण पाण्डेय ने उनके साथ राजनीतिक और विभागीय मसलों पर विस्तार से बातचीत की। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश...
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स्वास्थ्य विभाग में आपको काफी समय हो गया है, क्या नया करने की चाहत है?
मैं चाहता हूं कि हरियाणा के प्रत्येक व्यक्ति को इलाज की इतनी सहूलियत दे दूं कि उपचार के अभाव में किसी को चक्कर न काटने पड़ें। जिला अस्पतालों में ही मरीज को उचित इलाज मिलेगा तो वह पीजीआई और एम्स की तरफ कम भागेगा। कोरोना काल से हमने कई सबक लिए हैं। भविष्य के लिए हरियाणा का स्वास्थ्य ढांचा ऐसा कर दूंगा कि अगले 50 साल तक दिक्कत न हो।
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गृह विभाग में भी आपको काफी समय हो गया है, यहां क्या बदलाव करना चाहते हैं?
हरियाणा पुलिस में जिम्मेदारी का भाव हमारी सरकार में आया है। कई बड़े बदलाव किए हैं, डायल 112 शुरू किया है। कई मामलों में एसआईटी का गठन किया है। प्रदेश भर की जनता की सुनवाई मैं खुद करता हूं। पुलिस अधिकारियों को पता है कि गृह विभाग में काम किए बगैर काम नहीं चल सकता। यही बदलाव है जो पूर्व की सरकारों में नहीं था।
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सीआईडी आपके पास नहीं है, जबकि होनी गृह मंत्री के पास चाहिए?
मेरा अपना सूचनातंत्र इतना प्रभावशाली है कि मुझे सीआईडी होने न होने से कोई फर्क नहीं पड़ता। मेरे पास पूरे प्रदेश से सूचनाएं आती हैं। पुलिस महकमे में मेरा सूचनातंत्र अलग है। कब-कहां क्या घट रहा है, मेरे पास सारी जानकारी रहती है। यह जानकारी न रखूं तो महकमा चलाना इतना आसान नहीं है।

हरियाणा पुलिस में पदोन्नति न होने से अधिकारी परेशान हैं?
पदोन्नति को लेकर जो असमानता थी वह हमने दूर कर दी है। कमिश्नरी में यह दिक्कत सबसे ज्यादा हो रही थी। इसीलिए साढ़े चार हजार नए पद सृजित किए गए हैं। हमारे इस प्रयास से अंबाला, करनाल, हिसार और रोहतक रेंज के पुलिस कर्मचारियों और अधिकारियों फरीदाबाद और गुरुग्राम की तरह पदोन्नति मिल सकेगी।

आईपीएस अधिकारियों की पदोन्नति नहीं हो रही। दूसरे राज्यों में उनके बैच के अधिकारी पदोन्नत हो चुके हैं?
इस संदर्भ में मेरी बात मुख्यमंत्री जी से हो चुकी है। जल्द ही पदोन्नति की यह व्यवस्था भी शुरू हो जाएगी। कुछ मामले ऐसे हैं जिनमें तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं। शीघ्र ही वह तकनीकी दिक्कतें भी दूर हो जाएंगी और सामान्य प्रक्रिया के तहत पदोन्नति शुरू हो जाएगी।

आपकी मुख्यमंत्री मनोहर लाल जी से कुछ टसल रहती है क्या?
नहीं उनसे हमारा कोई विवाद नहीं है। वे प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं और हमारी पार्टी के नेता हैं। हां जहां मुझे कुछ गलत लगता है वहां मैं अपना विरोध प्रगट करता हूं। अब इस बात को लोग विवाद का रूप दे देते हैं तो इसमें मेरा कोई दोष नहीं। मैंने हमेशा कहा है कि सीएम इज सुप्रीम।

जब कई विभागों का मर्जर हुआ तो उसमें पुलिस में सीआईडी विजिलेंस या जेल का मर्जर हो सकता था?
मेरा चीजों को देखने का नजरिया अलग है। हो तो बहुत कुछ सकता है, लेकिन कई बार नहीं होता। मैंने जीवन में हमेशा काम को प्राथमिकता दी है और उसी के दम पर आज यहां तक पहुंचा हूं। मैंने कभी नहीं मांगा कि मुझे फलां विभाग चाहिए। जो विभाग हैं उनमें भी मैं अपना पूरा समय देता हूं। घर से फाइलें निकालता हूं। सचिवालय समय पर जाता हूं और जनता को मिलता हूं।


हरियाणा में नशे पर नियंत्रण नहीं लग पा रहा, क्या कारण है?
नशे पर नियंत्रण के लिए हमने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो बनाया है। लगातार बैठकें होती हैं। लोगों को जागरूक भी किया जाता है। पंजाब और उत्तर प्रदेश के साथ लगते जिलों में सख्ती भी की है। शीघ्र ही इसके परिणाम देखने को मिलेंगे। पूर्व सरकारों ने कभी इस ओर ध्यान ही नहीं दिया। हमारी सरकार में पहली बार नशा विरोधी मुहिम चली है। नशीले पदार्थों की तस्करी से बनी संपत्तियां ध्वस्त हुई हैं।
 
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