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माताओं का तनाव होगा दूर, बच्चों के लिए पाउडर फार्म में मिलेगा मां का दूध

Sun, 08 May 2022 01:57 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sun, 08 May 2022 01:57 AM IST
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Every child will get mother's milk, infant mortality rate will be controlled
चंडीगढ़। ट्राइसिटी का कोई भी बच्चा अब मां के दूध से महरूम नहीं रहेगा। मदर्स डे से एक दिन पहले शनिवार को ट्राइसिटी की कामकाजी महिलाओं को बेदी हॉस्पिटल ने ह्यूमन मिल्क बैंक का उपहार दिया। इसका शुभारंभ सेक्टर-35 स्थित आईएमए भवन में हुआ। मिल्क बैंक के संचालक व आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. आरएस बेदी ने बताया कि इसकी मदद से शिशु मृत्युदर पर अंकुश लगाया जा सकता है।
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बेदी ने बताया कि मां के दूध को लियोफिलाइजेशन प्रक्रिया के जरिए पाउडर फार्म में भी उपलब्ध कराया जाएगा। पाउडर वाला दूध 12 महीने तक सुरक्षित रखा जा सकता है। फ्रीज ड्राई तकनीक का प्रयोग कर मोहाली स्थित प्लांट में इसे स्टोर किया जाएगा। इंडियन सोसाइटी ऑफ असिस्टेंट रिप्रोडक्टिव की चेयरमैन डॉ. गुरप्रीत सिंह ने बताया कि ब्राजील ने मिल्क बैंक स्थापित कर अपने देश में शिशु मृत्यु दर में 73 प्रतिशत की कमी दर्ज कराई है। भारत जैसे देश में भी इसकी बेहद जरूरत है। इस सुविधा के बल पर कामकाजी महिलाओं का तनाव काफी हद तक दूर होगा, क्योंकि वो अपनी अनुपस्थिति में भी अपने ही दूध को अपने बच्चे के लिए उपलब्ध करा पाएंगी। डॉ. बेदी ने बताया कि मिल्क बैंक से प्री-मेच्योर बच्चे के लिए नि:शुल्क दूध उपब्लध कराया जाएगा। यह सुविधा अन्य निजी अस्पतालों में भर्ती प्री-मेच्योर बच्चों के भी नि:शुल्क दी जाएगी। इसके अलावा सामान्य तौर पर दूध प्रिजर्व करने के लिए तय शुल्क तीन रुपये प्रति एमएल लिया जाएगा। मौके पर अस्पताल के निदेशक डॉ. विक्रम बेदी, आईएमए के अध्यक्ष डॉ. रवणीक शर्मा, रोटरी के अध्यक्ष आशीष मिड्डा और डॉ. महिंदर नागर मौजूद थे।
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इनसेट-
ऐसे काम करता है ह्यूमन मिल्क बैंक
यह एक नॉन प्रॉफिट बैंक है। यहां नवजात शिशुओं के लिए मां का सुरक्षित दूध स्टोर किया जाता है। इसकी मदद से उन नवजात शिशुओं को मां का दूध उपलब्ध कराया जाता है, जिनकी मां किसी कारणवश स्तनपान कराने में असमर्थ होती हैं। इस केंद्र में दो तरह की महिलाएं दूध दान कर सकती हैं। पहली स्वेच्छा से और दूसरी वे माताएं जो अपने बच्चों को दूध नहीं पिला सकतीं या जिनके बच्चे दूध नहीं पीते।
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इनसेट-
दान से पहले होंगी जरूरी जांच
दूध दान करने आई मां की पहले एचआईवी/एचबीएसएजी/डब्लूबीआरएल जांच की जाती है। जांच रिपोर्ट सही आने के बाद महिला से लिखित अनुमति ली जाती है। इसके बाद दूध का दान कराया जाता है।

इनसेट-
ऐसे काम करता है मिल्क बैंक
मदर मिल्क बैंक में इलेक्ट्रिक ब्रेस्ट पंप मशीन होती है। इसके माध्यम से डोनर से दूध लिया जाता है। इस दूध का माइक्रोबायलॉजिकल टेस्ट होता है। रिपोर्ट में दूध की गुणवत्ता सही होने के बाद उसे कांच की बोतलों में 30-30 मिलीलीटर की यूनिट बनाकर -20 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान पर सुरक्षित रख दिया जाता है।
इनसेट-
मां का दूध अमृत के समान
- जिन बच्चों को मां का दूध मिलता है, उनके जीवित रहने की संभावना 14 प्रतिशत बढ़ जाती है
- नवजात को निमोनिया, डायरिया जैसी बीमारियों से बचाता है
- छह महीने तक मां का दूध बच्चे के पोषण की सभी जरूरतें को पूरा करता है
- बच्चे को दूध पिलाने से मां भी ब्रेस्ट कैंसर जैसी बीमारी से बची रहती है
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