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Chandigarh News: अदालत-थाने जाने से मुक्ति... केस की सारी जानकारी एप पर, गवाही भी होगी
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चंडीगढ़। एक जुलाई को देशभर में तीन नए आपराधिक कानून लागू हो चुके हैं। नए कानून की धाराओं में अब तक थानों में दर्ज एफआईआर में जांच कहां तक पहुंची है, इसका पता लगाने के लिए शिकायतकर्ताओं को थाने-चौकियों में चक्कर काटने पड़ रहे थे लेकिन अब इससे छुटकारा मिल जाएगा। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रविवार को चंडीगढ़ में चार नए एप ई-साक्ष्य, ई-समन, न्याय सेतु, न्याय श्रुति लांच किए। इन एप पर एक क्लिक से ही एफआईआर दर्ज करवाने वाले को सारी जानकारी मिल जाएगी और यह भी पता लग जाएगा कि जांच किस स्तर पर विचाराधीन है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रविवार को चंडीगढ़ में नए आपराधिक कानूनों के कार्यान्वयन की समीक्षा भी की। पुलिस जवानों ने डेमो कर दिखाया कि किस तरह नए कानूनों के तहत ई-साक्ष्य कैसे एकत्र किए जाएंगे। आइए जानते हैं इन सभी एप से क्या फायदा होगा।
ई-साक्ष्य : नए कानून के तहत भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) में किसी भी अपराध से संबंधित साक्ष्य को डिजिटल रूप में संकलित एवं सुरक्षित करने का प्रावधान किया गया है। इस एप से डिजिटल साक्ष्यों को संकलित कर उन्हें क्लाउड पर स्टोर किया जा सकेगा। इस एप को पुलिस जांच अधिकारी अपने मोबाइल में इंस्टॉल कर घटना से संबंधित साक्ष्यों को डिजिटल फार्म में रिकॉर्ड कर सकेंगे। इस एप से वीडियोग्राफी भी की जा सकेगी और एक बार वीडियो अपलोड होने पर कोई इससे छेड़छाड़ नहीं कर पाएगा, जिससे अदालत तक वीडियो सुरक्षित रहेगा।
ई-समन : अब पुलिस या अदालत से आरोपी या गवाह को सीधे इस एप के जरिए मोबाइल पर ही समन भेजा जा सकेगा। किसी कर्मचारी को मौके पर जाने की जरूरत नहीं होगी, संबंधित व्यक्ति इस एप से अपने मोबाइल पर ही समन को रिसीव करेगा। इसकी मान्यता अदालत में भी होगी। इससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि खर्च भी बचेगा।
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न्याय सेतु : न्याय सेतु एप में डैशबोर्ड बनाया गया है, जिसमें एफआईआर दर्ज करवाने वाले व्यक्ति को पुलिस, जेल, अदालत, अस्पताल व सीएफएसएल से संबंधित जानकारी सीधे मिल सकेगी। व्यक्ति एप के जरिए यह भी देख सकेगा कि उसकी फाइल या सीएफएसएल में भेजे गए सैंपल की रिपोर्ट किस स्तर पर लंबित है।
न्याय श्रुति : न्याय श्रुति एप के जरिए लोग देश के किसी भी कोने में बैठकर अदालत के समक्ष पेश होकर अपनी गवाही दर्ज करवा सकेंगे। इस एप के जरिए गवाह बिना किसी डर के अपनी गवाही दर्ज करा सकेंगे और उन्हें कोर्ट जाने की भी जरूरत नहीं होगी।
चंडीगढ़ ने कई स्तरों पर मारी बाजी : तीन कानूनों के तहत देशभर में चंडीगढ़ इकलौता ऐसा शहर है जिसमें सीसीटीएनएस से लेकर एसएचओ की ट्रेनिंग और एफएसएल के इंटीग्रेशन तक काफी तेजी से काम किया गया है। सिर्फ चंडीगढ़ में ही करीब 22 आईटी विशेषज्ञ और 125 डाटा एनालिस्ट रखे गए हैं। साथ ही 107 नए कंप्यूटर, सभी थानों में स्पीकर और दो वेब कैमरा लगाए गए हैं। थाने में एएसआई या इससे ऊंचे स्तर वाले जांच अधिकारियों को 170 टेबलेट, 25 मोबाइल फोन दिए गए हैं। इसके अलावा चंडीगढ़ पुलिस में 144 नए आई एक्सपर्ट कांस्टेबल भर्ती किए गए हैं, जिन्हें केवल नियुक्ति मिलनी बाकी है। नए कानूनों के शत प्रतिशत क्रियान्वयन में देश में अगर कोई पहला एडमिनिस्ट्रेटिव यूनिट होगा तो वह चंडीगढ़ में होगा।
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ई-साक्ष्य : नए कानून के तहत भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) में किसी भी अपराध से संबंधित साक्ष्य को डिजिटल रूप में संकलित एवं सुरक्षित करने का प्रावधान किया गया है। इस एप से डिजिटल साक्ष्यों को संकलित कर उन्हें क्लाउड पर स्टोर किया जा सकेगा। इस एप को पुलिस जांच अधिकारी अपने मोबाइल में इंस्टॉल कर घटना से संबंधित साक्ष्यों को डिजिटल फार्म में रिकॉर्ड कर सकेंगे। इस एप से वीडियोग्राफी भी की जा सकेगी और एक बार वीडियो अपलोड होने पर कोई इससे छेड़छाड़ नहीं कर पाएगा, जिससे अदालत तक वीडियो सुरक्षित रहेगा।
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ई-समन : अब पुलिस या अदालत से आरोपी या गवाह को सीधे इस एप के जरिए मोबाइल पर ही समन भेजा जा सकेगा। किसी कर्मचारी को मौके पर जाने की जरूरत नहीं होगी, संबंधित व्यक्ति इस एप से अपने मोबाइल पर ही समन को रिसीव करेगा। इसकी मान्यता अदालत में भी होगी। इससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि खर्च भी बचेगा।
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न्याय सेतु : न्याय सेतु एप में डैशबोर्ड बनाया गया है, जिसमें एफआईआर दर्ज करवाने वाले व्यक्ति को पुलिस, जेल, अदालत, अस्पताल व सीएफएसएल से संबंधित जानकारी सीधे मिल सकेगी। व्यक्ति एप के जरिए यह भी देख सकेगा कि उसकी फाइल या सीएफएसएल में भेजे गए सैंपल की रिपोर्ट किस स्तर पर लंबित है।
न्याय श्रुति : न्याय श्रुति एप के जरिए लोग देश के किसी भी कोने में बैठकर अदालत के समक्ष पेश होकर अपनी गवाही दर्ज करवा सकेंगे। इस एप के जरिए गवाह बिना किसी डर के अपनी गवाही दर्ज करा सकेंगे और उन्हें कोर्ट जाने की भी जरूरत नहीं होगी।
चंडीगढ़ ने कई स्तरों पर मारी बाजी : तीन कानूनों के तहत देशभर में चंडीगढ़ इकलौता ऐसा शहर है जिसमें सीसीटीएनएस से लेकर एसएचओ की ट्रेनिंग और एफएसएल के इंटीग्रेशन तक काफी तेजी से काम किया गया है। सिर्फ चंडीगढ़ में ही करीब 22 आईटी विशेषज्ञ और 125 डाटा एनालिस्ट रखे गए हैं। साथ ही 107 नए कंप्यूटर, सभी थानों में स्पीकर और दो वेब कैमरा लगाए गए हैं। थाने में एएसआई या इससे ऊंचे स्तर वाले जांच अधिकारियों को 170 टेबलेट, 25 मोबाइल फोन दिए गए हैं। इसके अलावा चंडीगढ़ पुलिस में 144 नए आई एक्सपर्ट कांस्टेबल भर्ती किए गए हैं, जिन्हें केवल नियुक्ति मिलनी बाकी है। नए कानूनों के शत प्रतिशत क्रियान्वयन में देश में अगर कोई पहला एडमिनिस्ट्रेटिव यूनिट होगा तो वह चंडीगढ़ में होगा।