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Chandigarh News: 19 साल बाद भी हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग को कानूनी दर्जा प्राप्त नहीं

Thu, 16 May 2024 10:06 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 16 May 2024 10:06 PM IST
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Even after 19 years, Haryana Staff Selection Commission does not get legal status.
चंडीगढ़। हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग को 19 साल बाद भी कानूनी दर्जा नहीं मिल पाया है। दिसंबर, 2004 में हरियाणा की तत्कालीन चौटाला सरकार ने विधानसभा के मार्फ़त हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग अधिनियम, 2004 बनवाकर एचएसएससी को वैधानिक मान्यता दी थी, लेकिन तीन माह बाद ही मार्च, 2005 में जब भूपेंद्र हुड्डा प्रदेश के मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने नई विधानसभा के पहले ही सत्र में हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (निरसन ) विधेयक, 2005 सदन से पारित करवाकर आयोग को मिला कानूनी दर्जा समाप्त करवा दिया था।
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पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने अपने साढ़े नौ सालों के लम्बे कार्यकाल में भी हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के लिए विधानसभा के मार्फ़त कानून नहीं बनवाया। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि मौजूदा लागू व्यवस्था अनुसार एचएसएससी में चेयरमैन को मिलाकर कुल सात सदस्य हो सकते हैं। इनका चयन तीन सदस्यीय समिति की ओर से किया जाता है, जिसमें मुख्यमंत्री की ओर से नामित एक कैबिनेट मंत्री, मुख्य सचिव और विधि परामर्शी के सचिव तीनों सदस्य होते हैं। चूंकि दो महीने पूर्व 12 मार्च को प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ तब मनोहर लाल के स्थान पर नायब सैनी नए मुख्यमंत्री बने और उनके तीन दिन बाद 15 मार्च को तत्कालीन मुख्य सचिव संजीव कौशल के स्थान पर टीवीएसएन प्रसाद को मुख्य सचिव बनाया गया और उसके अगले ही दिन 16 मार्च से आचार संहिता लागू हो गई। ऐसे में गौर करने योग्य है कि क्या एचएसएससी के नए चेयरमैन हिम्मत सिंह के चयन में पूर्व मनोहर सरकार के कैबिनेट मंत्री और पूर्व मुख्य सचिव संजीव कौशल शामिल थे या उनके बाद उस पद पर आसीन पदाधिकारी। साथ ही क्या तीन सदस्यीय कमेटी ने केवल एचएसएससी चेयरमैन का चयन किया या आयोग में अधिकतम छह अन्य सदस्यों का भी।
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