{"_id":"5bc1c9dbbdec22695035f8f7","slug":"estate-office-chandigarh-proposal-for-need-base-changes","type":"story","status":"publish","title_hn":"चंडीगढ़ः नीड बेस चेंज को लेकर जल्द ही एक अहम फैसला आने वाला है, सौंपी गई सर्वे रिपोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चंडीगढ़ः नीड बेस चेंज को लेकर जल्द ही एक अहम फैसला आने वाला है, सौंपी गई सर्वे रिपोर्ट
अनुभव अवस्थी, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 13 Oct 2018 04:03 PM IST
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लगभग 40 साल बाद इंडस्ट्री में नीड बेस चेंज को लेकर जल्द ही एक अहम फैसला आने वाला है। शुक्रवार को एस्टेट आफिस ने यूटी प्रशासन के फाइनेंस सेक्रेटरी अजोय कुमार सिन्हा को सर्वे रिपोर्ट सौंप दी है। एस्टेट आफिस की ओर से करीब 80 फीसदी बदलाव अप्रूव कर दिए गए हैं, लेकिन अलॉटियों के बदलाव के लिए संबंधित विभागों से अप्रूवल लेना पड़ेगा। इसके बाद ही इन्हें अप्रूवल मिल सकेगी। संभावना है कि दो सप्ताह में इंडस्ट्री के नीड बेस चेंज पर मुहर लग जाएगी। यूटी प्रशासन ने एस्टेट आफिस को सर्वे करने का आदेश दिया था।
एस्टेट आफिस ने दोनों इंडस्ट्रियल एरिया में बने प्लाटों और इस पर हुई कंस्ट्रक्शन का जायजा लिया है। यहां जरूरत के मुताबिक किए गए बदलाव का पूरा खाका तैयार किया गया है। फाइनेंस सेक्रेटरी को पूरी डिटेल के साथ रिपोर्ट सौंपी गई है। इसके साथ ही उन्हें तमाम तरह के केसों की जानकारी भी दी गई है। इस संदर्भ में फाइनेंस सेक्रेटरी अजोय कुमार सिन्हा ने बताया कि एस्टेट आफिस की रिपोर्ट तो इंडस्ट्री में नीड बेस चेंज को लेकर मिल चुकी है, लेकिन इसके कई अन्य पहलुओं पर गौर किया जा रहा है।
इन विभागों की अप्रूवल लेनी है जरूरी
यूटी प्रशासन की एक घंटे चली मीटिंग के बाद फाइनेंस सेक्रेटरी ने फायर विभाग, इंजीनियरिंग विभाग और आर्किटेक्चर विभाग को आदेश दिया कि वह भी जल्द एस्टेट आफिस की इस रिपोर्ट को देख लें और अपने हिसाब से फाइनल रिपोर्ट दें ताकि इसे अप्रूवल के लिए प्रशासक वीपी सिंह बदनौर के पास भेजा जा सके।
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प्रशासक ने बनाई थी कमेटी
बताते चलें कि प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने दो मामलों में फाइनेंस सेक्रेटरी अजोय कुमार सिन्हा की अगुवाई में कमेटियां बनाई थीं। इसमें एक व्यापारियों के मुद्दे को लेकर, जबकि दूसरी उद्योगपतियों की समस्याओं को लेकर। इंडस्ट्री से जुड़े लोग मांग कर रहे हैं कि जब से इंडस्ट्रियल एरिया बनाया गया है, उसके बाद से यहां बनी बिल्डिंगों में समय के अनुरूप बहुत बदलाव करने की जरूरत है। वह बरसों से मांग कर रहे हैं लेकिन प्रशासन ने अभी तक सहमति नहीं दी है।
प्रशासक के सामने रखी गई थीं मांगें
प्रशासक के सामने रखी मुख्य मांगों में इंडस्ट्री एसोसिएशन ने एमएसएमईडी एक्ट के तहत एडिशनल एक्टीविटीज की अनुमति देना रखा था। 2015 की इंडस्ट्रियल पालिसी में महज 2 या 3 गतिविधियों की ही अनुमति थी। इसे बढ़ाने की मांग की गई। इसे लागू करने के लिए सही नियम तय करने को कहा गया। लीज होल्ड के प्लाटों को फ्री होल्ड करने के लिए भी सूटेबल पालिसी तैयार करने की सिफारिश की गई थी।
यह है मामला
1970 में प्रशासन ने दो इंडस्ट्रियल एरिया बनाए थे, जो कुल 147 एकड़ पर बसे हैं। इसमें कुल 1884 इंडस्ट्रियल प्लॉट थे। इसमें एक कनाल व इसके ऊपर के 700 प्लॉट, 10 मरले के 443 प्लॉट, 15 मरले के 180 प्लॉट, 5 मरले के 381 प्लॉट थे। समय के अनुरूप इंडस्ट्रियल प्लॉट के मालिकों ने बिल्डिंग बॉयलॉज का वायलेशन कर जरूरत के मुताबिक बिल्डिंग स्ट्रक्चर में तबदीलियां कर लीं। जिन पर यूटी प्रशासन की ओर से उन्हें मिस्यूज नोटिस भी दिया गया। प्रशासक के निर्देश पर हाल ही में इन्हें राहत देने की प्रक्रिया शुरू हुई थी।
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एस्टेट आफिस ने दोनों इंडस्ट्रियल एरिया में बने प्लाटों और इस पर हुई कंस्ट्रक्शन का जायजा लिया है। यहां जरूरत के मुताबिक किए गए बदलाव का पूरा खाका तैयार किया गया है। फाइनेंस सेक्रेटरी को पूरी डिटेल के साथ रिपोर्ट सौंपी गई है। इसके साथ ही उन्हें तमाम तरह के केसों की जानकारी भी दी गई है। इस संदर्भ में फाइनेंस सेक्रेटरी अजोय कुमार सिन्हा ने बताया कि एस्टेट आफिस की रिपोर्ट तो इंडस्ट्री में नीड बेस चेंज को लेकर मिल चुकी है, लेकिन इसके कई अन्य पहलुओं पर गौर किया जा रहा है।
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इन विभागों की अप्रूवल लेनी है जरूरी
यूटी प्रशासन की एक घंटे चली मीटिंग के बाद फाइनेंस सेक्रेटरी ने फायर विभाग, इंजीनियरिंग विभाग और आर्किटेक्चर विभाग को आदेश दिया कि वह भी जल्द एस्टेट आफिस की इस रिपोर्ट को देख लें और अपने हिसाब से फाइनल रिपोर्ट दें ताकि इसे अप्रूवल के लिए प्रशासक वीपी सिंह बदनौर के पास भेजा जा सके।
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प्रशासक ने बनाई थी कमेटी
बताते चलें कि प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने दो मामलों में फाइनेंस सेक्रेटरी अजोय कुमार सिन्हा की अगुवाई में कमेटियां बनाई थीं। इसमें एक व्यापारियों के मुद्दे को लेकर, जबकि दूसरी उद्योगपतियों की समस्याओं को लेकर। इंडस्ट्री से जुड़े लोग मांग कर रहे हैं कि जब से इंडस्ट्रियल एरिया बनाया गया है, उसके बाद से यहां बनी बिल्डिंगों में समय के अनुरूप बहुत बदलाव करने की जरूरत है। वह बरसों से मांग कर रहे हैं लेकिन प्रशासन ने अभी तक सहमति नहीं दी है।
प्रशासक के सामने रखी गई थीं मांगें
प्रशासक के सामने रखी मुख्य मांगों में इंडस्ट्री एसोसिएशन ने एमएसएमईडी एक्ट के तहत एडिशनल एक्टीविटीज की अनुमति देना रखा था। 2015 की इंडस्ट्रियल पालिसी में महज 2 या 3 गतिविधियों की ही अनुमति थी। इसे बढ़ाने की मांग की गई। इसे लागू करने के लिए सही नियम तय करने को कहा गया। लीज होल्ड के प्लाटों को फ्री होल्ड करने के लिए भी सूटेबल पालिसी तैयार करने की सिफारिश की गई थी।
यह है मामला
1970 में प्रशासन ने दो इंडस्ट्रियल एरिया बनाए थे, जो कुल 147 एकड़ पर बसे हैं। इसमें कुल 1884 इंडस्ट्रियल प्लॉट थे। इसमें एक कनाल व इसके ऊपर के 700 प्लॉट, 10 मरले के 443 प्लॉट, 15 मरले के 180 प्लॉट, 5 मरले के 381 प्लॉट थे। समय के अनुरूप इंडस्ट्रियल प्लॉट के मालिकों ने बिल्डिंग बॉयलॉज का वायलेशन कर जरूरत के मुताबिक बिल्डिंग स्ट्रक्चर में तबदीलियां कर लीं। जिन पर यूटी प्रशासन की ओर से उन्हें मिस्यूज नोटिस भी दिया गया। प्रशासक के निर्देश पर हाल ही में इन्हें राहत देने की प्रक्रिया शुरू हुई थी।