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कर्मचारियों ने हुड्डा की पॉलिसी पर उठाए सवाल
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 16 Jun 2014 02:35 PM IST
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सर्व कर्मचारी संघ ने हुड्डा सरकार की रेगुलराइजेशन पॉलिसी पर सवाल खड़ा किया है। संघ के नेताओं ने कहा कि पॉलिसी की कटऑफ डेट 31 दिसंबर, 2018 के बजाय रविवार की होनी चाहिए।
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समय अवधि 10 से कम करके दो वर्ष की जानी चाहिए। यह मामला भविष्य पर नहीं छोड़ा जाना चाहिए, क्योंकि यह निर्णय लागू होगा या नहीं कुछ पक्का नहीं कहा जा सकता।
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संघ के प्रधान धर्मबीर फौगाट और महासचिव सुभाष लांबा ने बताया कि जब तक स्वीकृत पदों के विरुद्ध नियुक्ति की शर्त रेगुलराइजेशन की नीति में लगाई जाती रहेंगी, तब तक कर्मचारी पक्के नहीं होंगे। उन्होंने सवाल खड़ा किया कि विभाग यह बताए कि जो कर्मचारी स्वीकृत पदों के विरुद्ध नहीं लगाए गए, उन्हें वेतन किस प्रकार से दिया जा रहा है।
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संघ नेताओं ने कहा कि कई हजार कर्मचारी अलग-अलग विभागों में कार्य के विरुद्ध लगाए हुए हैं और पद स्वीकृत करना, सरकार व विभाग का काम था, जिसने नहीं किया। इसलिए इसकी सजा कर्मचारियों को नहीं दी जानी चाहिए।
उन्होंने सरकार से मांग की कि जो कर्मचारी स्वीकृत पदों के विरुद्ध नियुक्त नहीं हुए हैं, उनके पद स्वीकृत कर नियमित करना चाहिए।
संघ नेताओं ने कहा कि संशोधित नीति में सर्विस प्रोवाइडरों (ठेकेदारों) के मार्फत लगे कर्मचारियों, स्वास्थ्य विभाग में एनआरएचएम व अन्य प्रोजेक्टों में कार्यरत कर्मचारियों व अन्य विभागों में केंद्रीय परियोजनाओं में कार्यरत कर्मचारियों को इस संशोधित नीति में भी शामिल नहीं किया गया है। सरकार को भविष्य पर यानि 31 दिसंबर, 2018 तक मामला नहीं छोड़ना चाहिए।
लांबा ने कहा कि 28 मई, 2014 को केबिनेट ने 1997, 1999, 2003 में बनी रेगुलराइजेशन की नीति में पात्र जो कर्मचारी प्रशासनिक डिले के कारण रेगुलर होने से वंचित रह गए थे।
उन्हें रेगुलर करने व पंजाब सरकार की 2011 की नीति को हूबहू लागू करने का निर्णय लिया था। आज कौन सी रेगुलराइजेशन की नीति में संशोधन किया है, यह भी स्पष्ट नहीं है।