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हरियाणा में 3.5 रुपये तक सस्ती हो सकती है बिजली, सरकार खरीदेगी और 20 लाख स्मार्ट मीटर
Fri, 14 Feb 2020 10:25 AM IST
खुशबू गोयल
मोहित धुपड़, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 14 Feb 2020 10:25 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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हरियाणा में सरकार एग्रो इंडस्ट्रीज के लिए बिजली दरें कम कर सकती है। इसके लिए मुख्यमंत्री भी संकेत दे चुके हैं। जबकि ये मामला अब हरियाणा बिजली विनियामक आयोग के समक्ष भी पहुंच गया है। जिसमें एग्रो इंडस्ट्री के लिए अलग से रियायती बिजली टैरिफ जारी करने की मांग रखी गई है। आयोग ने बिजली वितरण कंपनियों को इस संदर्भ में अपना प्रस्ताव देने के निर्देश दिए हैं। उम्मीद है जल्द ही इस पर निर्णय लिया जाएगा। सरकार प्रदेश में कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देना चाहती है।
इसके लिए इन उद्योगों को अन्य औद्योगिक कैटेगरी से अलग कुछ रियायतें दी जा रही है। इन्हीं रियायतों में अब इस एग्रो इंडस्ट्री को सस्ती बिजली देने की तैयारी है। पिछले दिनों हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने भी प्रदेश के कृषि आधारित उद्योगों के लिए बिजली दरें घटाने के संकेत दिए थे। इस पर यदि फैसला हो जाता है, तो एग्रो इंडस्ट्री के लिए साढ़े तीन रुपये तक बिजली सस्ती हो सकती है। अभी इस इंडस्ट्री को लगभग आठ रुपये प्रति यूनिट बिजली पड़ती है।
हरियाणा बिजली विनियामक आयोग (एचईआरसी) के चेयरमैन डीएस ढेसी की अध्यक्षता वाली हरियाणा बिजली वितरण निगम (यूएचबीवीएन) और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) की वित्ती वर्ष 2020-21 वार्षिक राजस्व जरूरत (एआरआर) संबंधी बैठक में इस मुद्दे को उठाया गया। इस दौरान चेयरमैन ढेसी ने बिजली वितरण कंपनियों के अधिकारियों से पूछा कि एग्रो इंडस्ट्रीज के लिए कोई अलग से टैरिफ हो इसको लेकर आपकी याचिका में कोई जिक्र है। इस पर डिस्कॉम के अधिकारियों ने एचईआरसी को आश्वस्त किया कि इस बारे में जल्द एक आग्रह भेजा जाएगा।
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इसके लिए इन उद्योगों को अन्य औद्योगिक कैटेगरी से अलग कुछ रियायतें दी जा रही है। इन्हीं रियायतों में अब इस एग्रो इंडस्ट्री को सस्ती बिजली देने की तैयारी है। पिछले दिनों हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने भी प्रदेश के कृषि आधारित उद्योगों के लिए बिजली दरें घटाने के संकेत दिए थे। इस पर यदि फैसला हो जाता है, तो एग्रो इंडस्ट्री के लिए साढ़े तीन रुपये तक बिजली सस्ती हो सकती है। अभी इस इंडस्ट्री को लगभग आठ रुपये प्रति यूनिट बिजली पड़ती है।
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हरियाणा बिजली विनियामक आयोग (एचईआरसी) के चेयरमैन डीएस ढेसी की अध्यक्षता वाली हरियाणा बिजली वितरण निगम (यूएचबीवीएन) और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) की वित्ती वर्ष 2020-21 वार्षिक राजस्व जरूरत (एआरआर) संबंधी बैठक में इस मुद्दे को उठाया गया। इस दौरान चेयरमैन ढेसी ने बिजली वितरण कंपनियों के अधिकारियों से पूछा कि एग्रो इंडस्ट्रीज के लिए कोई अलग से टैरिफ हो इसको लेकर आपकी याचिका में कोई जिक्र है। इस पर डिस्कॉम के अधिकारियों ने एचईआरसी को आश्वस्त किया कि इस बारे में जल्द एक आग्रह भेजा जाएगा।
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अन्य राज्यों की तर्ज उठी मांग...
एग्रो इंडस्ट्री की ओर से बिजली का रियायती टैरिफ का मामला सामने आया है। उद्यमियों ने अन्य राज्यों का हवाला देते हुए आयोग के समक्ष अलग टैरिफ बनाने की मांग की है। उद्यमियों का कहना था कि जिस तरह विभिन्न राज्यों में एग्रो इंडस्ट्री के लिए अलग रियायती बिजली टैरिफ है, उसी तरह हरियाणा में अलग टैरिफ होना चाहिए। आयोग ने उनकी बात सुन ली है, अब आयोग इस पर जैसा निर्देश डिस्कॉम को देगा, उसी के मुताबिक आगामी कार्यवाही की जाएगी।
- शत्रुजीत कपूर, बिजली वितरण कंपनियों डिस्कॉम के सीएमडी
हरियाणा में अभी नहीं बढ़ेंगे बिजली के रेट
हरियाणा में बिजली के रेट नहीं बढ़ेंगे और न ही इसे लेकर फिलहाल सरकार का कोई विचार है। एचईआरसी के चेयरमैन डीएस ढेसी, सदस्य प्राविंद्रा सिंह चौहान व नरेश सरदाना के सम्मुख प्रदेश की दोनों बिजली वितरण कंपनियों के आला अधिकारियों ने अपना गत वर्ष का पूरा लेखा जोखा प्रस्तुत करते हुए ये स्पष्ट किया गया कि डिस्कॉम की तरफ से बिजली की दरों में वृद्धि को लेकर कोई प्रस्ताव नहीं है।
डिस्कॉम के सीएमडी शत्रुजीत कपूर ने आयोग को बताया कि बिजली वितरण कंपनियों ने एग्रीगेट ट्रांसमिशन एडं कॉमर्शियल (एटी एडं सी) लॉस को तीन सालों में 12.57 प्रतिशत कम किया है, जो अपने आप में एक रिकार्ड है। नवंबर 2019 तक यूएचबीवीएन का 21.12 प्रतिशत, डीएचबीवीएन का 14.86 प्रतिशत यानि पूरे प्रदेश का 17.45 प्रतिशत लाइन लॉस है।
- शत्रुजीत कपूर, बिजली वितरण कंपनियों डिस्कॉम के सीएमडी
हरियाणा में अभी नहीं बढ़ेंगे बिजली के रेट
हरियाणा में बिजली के रेट नहीं बढ़ेंगे और न ही इसे लेकर फिलहाल सरकार का कोई विचार है। एचईआरसी के चेयरमैन डीएस ढेसी, सदस्य प्राविंद्रा सिंह चौहान व नरेश सरदाना के सम्मुख प्रदेश की दोनों बिजली वितरण कंपनियों के आला अधिकारियों ने अपना गत वर्ष का पूरा लेखा जोखा प्रस्तुत करते हुए ये स्पष्ट किया गया कि डिस्कॉम की तरफ से बिजली की दरों में वृद्धि को लेकर कोई प्रस्ताव नहीं है।
डिस्कॉम के सीएमडी शत्रुजीत कपूर ने आयोग को बताया कि बिजली वितरण कंपनियों ने एग्रीगेट ट्रांसमिशन एडं कॉमर्शियल (एटी एडं सी) लॉस को तीन सालों में 12.57 प्रतिशत कम किया है, जो अपने आप में एक रिकार्ड है। नवंबर 2019 तक यूएचबीवीएन का 21.12 प्रतिशत, डीएचबीवीएन का 14.86 प्रतिशत यानि पूरे प्रदेश का 17.45 प्रतिशत लाइन लॉस है।
20 लाख और स्मार्ट मीटर खरीदे जाएंगे
बैठक में एचईआरसी के चेयरमैन ढेसी ने पूछा कि केंद्रीय बजट में जिक्र है कि अगले तीन वर्षों में पूरे देश में स्मार्ट/प्रीपेड मीटर लगा दिए जाएंगे, इस पर बिजली कंपनियों की क्या योजना है। इस पर सीएमडी कपूर ने कहा कि यूएचबीवीएन और डीएचबीवीएन की 10 लाख स्मार्ट मीटर लगाने की योजना है।
31 मार्च 2021 तक गुरुग्राम और फरीदाबाद में 5 लाख स्मार्ट मीटर लगा दिए जाएंगे। गुरुग्राम में वैसे अभी तक 50 हजार, करनाल और पंचकूला में 35 हजार स्मार्ट मीटर लग चुके हैं। इतना ही नहीं 20 लाख स्मार्ट मीटर खरीदने की प्रक्रिया भी जारी है।
अन्य उद्यमियों ने मांगा टाइम-आफ-डे टैरिफ
इसके अतिरिक्त अन्य उद्यमियों ने भी अपने उद्योगों के लिए आयोग से टाइम-ऑफ-डे टैरिफ लागू करने की मांग की। उद्यमियों की दलील थी कि उनका टैरिफ उनके उद्योगों की कार्य अवधि के अनुसार लागू किया जाए। उद्यमियों का कहना है कि उनके उद्योग सुबह से लेकर रात तक चलते हैं।
इसलिए बिजली कंपनियां उनके उद्योगों के लिए दिन का अलग टैरिफ (कामर्शियल रेट पर) और रात को जब उद्योग बंद होते हैं, तो उसका अलग टैरिफ (घरेलू रेट पर) लागू करना चाहिए। इसके साथ-साथ मशरूम उत्पादक किसानों ने भी मशरूम उत्पादक इकाइयों के लिए अलग टैरिफ की मांग की है।
31 मार्च 2021 तक गुरुग्राम और फरीदाबाद में 5 लाख स्मार्ट मीटर लगा दिए जाएंगे। गुरुग्राम में वैसे अभी तक 50 हजार, करनाल और पंचकूला में 35 हजार स्मार्ट मीटर लग चुके हैं। इतना ही नहीं 20 लाख स्मार्ट मीटर खरीदने की प्रक्रिया भी जारी है।
अन्य उद्यमियों ने मांगा टाइम-आफ-डे टैरिफ
इसके अतिरिक्त अन्य उद्यमियों ने भी अपने उद्योगों के लिए आयोग से टाइम-ऑफ-डे टैरिफ लागू करने की मांग की। उद्यमियों की दलील थी कि उनका टैरिफ उनके उद्योगों की कार्य अवधि के अनुसार लागू किया जाए। उद्यमियों का कहना है कि उनके उद्योग सुबह से लेकर रात तक चलते हैं।
इसलिए बिजली कंपनियां उनके उद्योगों के लिए दिन का अलग टैरिफ (कामर्शियल रेट पर) और रात को जब उद्योग बंद होते हैं, तो उसका अलग टैरिफ (घरेलू रेट पर) लागू करना चाहिए। इसके साथ-साथ मशरूम उत्पादक किसानों ने भी मशरूम उत्पादक इकाइयों के लिए अलग टैरिफ की मांग की है।