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यहां बारिश होते ही गुल हो जाती है बिजली
अमर उजाला, मोरनी
Updated Mon, 20 Jan 2014 08:44 AM IST
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थोड़ी सी बारिश होते ही क्षेत्र में हर बार बिजली लंबे समय के लिए गुल हो जाती है। इससे उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
शुक्रवार रात बारिश शुरू होते ही करीब रात दस बजे बिजली गुल हो गई जो शनिवार दोपहर तक नहीं आई। इस संबंध में विद्युत निगम के अधिकारियों का कहना है कि रायपुररानी से मोरनी तक मुख्य लाइन जंगल से गुजरती है, जिससे बारिश में तार गीले पेड़ों से छू जातें, जिससे लाइट गुल हो जाती है।
गत पखवाड़े में चार बार लोग बारिश की हल्की सी बूंद पड़ते ही अगले दिन तक के लिए ब्लैक आऊट झेल चुके हैं। लोगों का आरोप है कि शाम को पांच बजे के बाद कोई भी कर्मी 33 केवी के सब स्टेशन पर कोई बिजली कर्मी नहीं रहता है। इससे खराबी आने पर फाल्ट की मरम्मत नहीं हो पाती है।
मोरनी के प्रीतम, शमशेर, चरण सिंह, हरजीत ने बताया कि पखवाडे़ भर में चार बार बिजली गुल हो चुकी है। लोगों का कहना है कि मोरनी में जेई का कार्यालय ना होने के करण जनता की कोई सुनवाई नहीं होती है।
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इस संबंध में निगम के उपमंडल अभियंता रायपुररानी रविंद्र ढाकला का कहना है कि रास्ते में कई जगह पेड़ तारों को छूते हैं, जब यह पेड़ बारिश से गीले हो जाते हैं तो शार्ट शर्किट हो जाता है।
इसके बाद यह समस्या पैदा होती है। उन्होंने कहा कि मौसम खुलते ही तारों को छूने वाले पेड़ों की टहनियों को छांटा जाएगा।
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शुक्रवार रात बारिश शुरू होते ही करीब रात दस बजे बिजली गुल हो गई जो शनिवार दोपहर तक नहीं आई। इस संबंध में विद्युत निगम के अधिकारियों का कहना है कि रायपुररानी से मोरनी तक मुख्य लाइन जंगल से गुजरती है, जिससे बारिश में तार गीले पेड़ों से छू जातें, जिससे लाइट गुल हो जाती है।
गत पखवाड़े में चार बार लोग बारिश की हल्की सी बूंद पड़ते ही अगले दिन तक के लिए ब्लैक आऊट झेल चुके हैं। लोगों का आरोप है कि शाम को पांच बजे के बाद कोई भी कर्मी 33 केवी के सब स्टेशन पर कोई बिजली कर्मी नहीं रहता है। इससे खराबी आने पर फाल्ट की मरम्मत नहीं हो पाती है।
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मोरनी के प्रीतम, शमशेर, चरण सिंह, हरजीत ने बताया कि पखवाडे़ भर में चार बार बिजली गुल हो चुकी है। लोगों का कहना है कि मोरनी में जेई का कार्यालय ना होने के करण जनता की कोई सुनवाई नहीं होती है।
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इस संबंध में निगम के उपमंडल अभियंता रायपुररानी रविंद्र ढाकला का कहना है कि रास्ते में कई जगह पेड़ तारों को छूते हैं, जब यह पेड़ बारिश से गीले हो जाते हैं तो शार्ट शर्किट हो जाता है।
इसके बाद यह समस्या पैदा होती है। उन्होंने कहा कि मौसम खुलते ही तारों को छूने वाले पेड़ों की टहनियों को छांटा जाएगा।