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शिक्षा मंत्री बोले-1300 नहीं सिर्फ 7 स्कूल किए बंद, बिजली टावरों को लेकर बनेगी मुआवजे की नीति

Fri, 21 Feb 2020 12:30 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Fri, 21 Feb 2020 12:30 AM IST
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Electricity policy will be made regarding power towers in Punjab
पंजाब विधानसभा सत्र। - फोटो : अमर उजाला

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने सदन को भरोसा दिलाया है कि उनकी सरकार पंजाब स्टेट ट्रांसमिशन कार्पोरेशन लिमिटेड (पीएसटीसीएल) द्वारा टावर लगाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली जमीन के लिए किसानों को मुआवजा देने के लिए नीति लेकर आएगी। हालांकि, मुख्यमंत्री ने बिजली की तारों के नीचे की जमीन के लिए किसानों को मुआवजा देने की संभावना को खारिज कर दिया है क्योंकि राज्यभर में इन तारों के नीचे 105 एकड़ कृषि भूमि है।

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विधानसभा में तलवंडी साबो से आप विधायक प्रो. बलजिंदर कौर और गढ़शंकर से विधायक जय कृष्ण रोड़ी द्वारा लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव में, पीएसटीसीएल द्वारा किसानों की जमीन पर बिजली के 40 गुना 40 फुट आकार से खंभे लगाने का मामला उठाया गया था। उन्होंने प्रस्ताव में कहा कि पीएसटीसीएल की तरफ से बलांवाली थर्मल प्लांट से तलवंडी साबो रिफाइनरी तक किसानों की जमीनों में बिजली के बड़े खंभे बिना पूर्व सूचना के लगाए गए हैं। 
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इससे किसानों की जमीन खराब हो रही है और उन्हें इस जमीन के इस्तेमाल का कोई मुआवजा भी नहीं दिया जा रहा है। प्रस्ताव में कहा गया कि यह खंभे लगाने से किसानों की जमीनों के मूल्य में भी गिरावट आ रही है। उन्होंने प्रति खंभा 15 लाख रुपए मुआवजा देने की मांग की। मुख्यमंत्री ने इस पर जवाब देते हुए कहा कि किसानों को इंडियन टेलीग्राफ एक्ट, 1885 के अनुसार फसलों के नुकसान की भरपाई की जा रही है।

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उन्होने यह भी बताया कि बठिंडा जिले में टावरों के नीचे की जमीन एक्वायर नहीं की गई क्योंकि टावरों और ट्रांसमिशन लाइनों के नीचे आती जमीन पर कृषि कार्यों पर कोई रोक नहीं है। मुख्यमंत्री ने सदन को यह भी बताया कि 23 टावरों की स्टबिंग (नींव) के दौरान किसानों को 6,38,087 रुपए की अदायगी की गई है।

1300 नहीं सिर्फ 7 स्कूल बंद किए: सिंगला
शिक्षा मंत्री विजय इंदर सिंगला ने सरकार द्वारा राज्य में 1300 प्राइमरी स्कूलों को बंद करने की बात से इंकार करते हुए सदन को बताया कि केवल सात स्कूलों को बंद किया गया है जबकि 105 प्राइमरी स्कूलों को अन्य स्कूलों में मर्ज किया गया है। शिक्षा मंत्री गुरुवार को सदन में विधायक मास्टर बलदेव सिंह, प्रिंसिपल बुधराम और कुलवंत सिंह पंडोरी द्वारा लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का जवाब दे रहे थे। 

तीनों विधायकों ने अपने प्रस्ताव के जरिए सदन का ध्यान राज्य में 1300 सरकारी स्कूलों को बंद करने की ओर दिलाया। उनका कहना था कि अगर सरकार ऐसे ही स्कूलों को बंद करती रहेगी तो बच्चों की शिक्षा का क्या होगा? इस पर सिंगला के जवाब पर अनुपूरक सवाल में मास्टर बलदेव सिंह ने स्कूलों को मर्ज किए जाने पर एतराज जताते हुए इस फैसले को गरीबों के लिए अहितकर करार दिया। उन्होंने इस फैसले को बदलने की मांग की। 

उन्होंने स्कूलों में खाली पड़े पदों को भरने मांग की, जिस पर शिक्षा मंत्री ने बताया कि खाली पद भरने के लिए कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है और 31 मार्च तक खाली पदों को भर दिया जाएगा। तीनों आप विधायकों ने एक अन्य ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए सरकारी अस्पतालों में पंजाब सरकार की तरफ से दी जाती मुफ्त दवा की सुविधा बंद करने का मुद्दा भी उठाया।

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