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छात्र संघ चुनावः UGC का फरमान, स्टूडेंट्स प्रयोग कर सकेंगे ये विकल्प
विनीत तोमर/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
Updated Mon, 18 Jul 2016 10:08 AM IST
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वोट करते युवा
- फोटो : amar ujala
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यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन ने देश भर की यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में होने वाले छात्र संघ चुनाव में एक विकल्प को शामिल करने के निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत चुनाव में भी अब नोटा (नन ऑफ द अबव) का ऑप्शन होगा। अभी तक नोटा का विकल्प लोकसभा और विधानसभा चुनाव में ही मिलता था।
ऐसे में छात्र संघ चुनाव में अपने मनपसंद प्रत्याशी न होने पर विद्यार्थी नोटा का इस्तेमाल कर सकेंगे। दरअसल, कई बार चुनाव मैदान में उतरे प्रत्याशियों को लेकर वोटर खुश नहीं होते और वह किसी को भी वोट देना नहीं चाहते। इस मसले पर सितंबर 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने नोटा को लागू करने का फैसला दिया था।
इसके बाद से लोकसभा और विधानसभा चुनाव में मतदाताओं ने नोटा का इस्तेमाल किया था। अभी तक नोटा को शैक्षणिक संस्थानों में होने वाले छात्र संघ चुनाव से दूर रखा गया था, लेकिन अब यूजीसी ने छात्र संघ चुनाव में भी नोटा का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया है। यूजीसी ने कहा है कि छात्रसंघ चुनाव भले ही ईवीएम मशीन से हो या फिर बैलेट पेपर से, नोटा का विकल्प होना चाहिए।
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हरियाणा में 20 साल बाद हो रहे हैं चुनाव
हरियाणा में आखिरी बार छात्र संघ चुनाव वर्ष 1996 में हुआ था। इसके बाद कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए पूर्व सरकार ने इसे बंद कर दिया था। लगभग 20 साल बाद अब मौजूदा सरकार ने छात्रसंघ चुनाव को हरी झंडी दी है। हालांकि चुनाव प्रत्यक्ष होंगे या फिर अप्रत्यक्ष तरीके से इसके लिए सरकार ने कमेटी का गठन कर रखा है।
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ऐसे में छात्र संघ चुनाव में अपने मनपसंद प्रत्याशी न होने पर विद्यार्थी नोटा का इस्तेमाल कर सकेंगे। दरअसल, कई बार चुनाव मैदान में उतरे प्रत्याशियों को लेकर वोटर खुश नहीं होते और वह किसी को भी वोट देना नहीं चाहते। इस मसले पर सितंबर 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने नोटा को लागू करने का फैसला दिया था।
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इसके बाद से लोकसभा और विधानसभा चुनाव में मतदाताओं ने नोटा का इस्तेमाल किया था। अभी तक नोटा को शैक्षणिक संस्थानों में होने वाले छात्र संघ चुनाव से दूर रखा गया था, लेकिन अब यूजीसी ने छात्र संघ चुनाव में भी नोटा का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया है। यूजीसी ने कहा है कि छात्रसंघ चुनाव भले ही ईवीएम मशीन से हो या फिर बैलेट पेपर से, नोटा का विकल्प होना चाहिए।
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हरियाणा में 20 साल बाद हो रहे हैं चुनाव
हरियाणा में आखिरी बार छात्र संघ चुनाव वर्ष 1996 में हुआ था। इसके बाद कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए पूर्व सरकार ने इसे बंद कर दिया था। लगभग 20 साल बाद अब मौजूदा सरकार ने छात्रसंघ चुनाव को हरी झंडी दी है। हालांकि चुनाव प्रत्यक्ष होंगे या फिर अप्रत्यक्ष तरीके से इसके लिए सरकार ने कमेटी का गठन कर रखा है।