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ईद उल अजहा : अमन-चैन की दुआ के लिए उठे हजारों हाथ
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चंडीगढ़। शहर के सभी मस्जिदों और ईदगाहों में शनिवार को ईद उल अजहा की नमाज अदा की गई। सुबह से ही मस्जिदों और ईदगाहों में नमाज पढ़ने के लिए बड़ी संख्या में नमाजी पहुंचना शुरू हो गए। नमाज के बाद लोगों ने देश की तरक्की और भाईचारे के लिए दुआएं मांगी।
इस मौके पर गले मिल एक-दूसरे को बधाई दी। नूरानी मस्जिद सेक्टर-26 के इमाम व खतीब मुफ्ती मोहम्मद अनस कासमी ने नमाज से पहले पर्व के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ईद उल अजहा का पर्व त्याग, बलिदान और अल्लाह के प्रति समर्पण का है। उन्होंने नमाज के बाद ईद के खुतबे में बताया कि इस पर्व का सबसे बड़ा संदेश है कि अल्लाह के प्रति संपूर्ण समर्पण। पैंगबर हजरत इब्राहिम जब प्यारे बेटे पैंगबर हजरत इस्माइल की कुर्बानी देने को तैयार हो गए तो साबित हो गया कि एक सच्चा अल्लाह का बंदा अल्लाह के हुक्म के सामने किसी भी रिश्ते को प्राथमिकता नहीं देता। अनस से कहा कि सभी को समय का सदुपयोग करना चाहए। धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ बच्चों को विज्ञान और तकनीक की दिशा में बढ़ावा देकर समाज निर्माण के लिए काम करें। जामा मस्जिद सेक्टर-20 के इमाम व खतीब मौलाना मोहम्मद अजमल खान ने कहा कि बकरीद न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय नजरिए से भी महत्वपूर्ण है। यह पर्व सभी धर्मों और वर्गों के बीच भाईचारा, सहयोग और शांति का संदेश देता है।
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इस मौके पर गले मिल एक-दूसरे को बधाई दी। नूरानी मस्जिद सेक्टर-26 के इमाम व खतीब मुफ्ती मोहम्मद अनस कासमी ने नमाज से पहले पर्व के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ईद उल अजहा का पर्व त्याग, बलिदान और अल्लाह के प्रति समर्पण का है। उन्होंने नमाज के बाद ईद के खुतबे में बताया कि इस पर्व का सबसे बड़ा संदेश है कि अल्लाह के प्रति संपूर्ण समर्पण। पैंगबर हजरत इब्राहिम जब प्यारे बेटे पैंगबर हजरत इस्माइल की कुर्बानी देने को तैयार हो गए तो साबित हो गया कि एक सच्चा अल्लाह का बंदा अल्लाह के हुक्म के सामने किसी भी रिश्ते को प्राथमिकता नहीं देता। अनस से कहा कि सभी को समय का सदुपयोग करना चाहए। धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ बच्चों को विज्ञान और तकनीक की दिशा में बढ़ावा देकर समाज निर्माण के लिए काम करें। जामा मस्जिद सेक्टर-20 के इमाम व खतीब मौलाना मोहम्मद अजमल खान ने कहा कि बकरीद न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय नजरिए से भी महत्वपूर्ण है। यह पर्व सभी धर्मों और वर्गों के बीच भाईचारा, सहयोग और शांति का संदेश देता है।
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