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Eid-ul-Fitr: चंडीगढ़ में हजारों लोगों ने ईद की नमाज अदा की, एक-दूसरे के गले मिल दी मुबारकबाद
Thu, 11 Apr 2024 10:40 AM IST
निवेदिता वर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 11 Apr 2024 10:40 AM IST
सार
सेक्टर 20 के जामा मस्जिद के इमाम मौलाना मोहम्मद अजमल खान ने लोगों को संबोधित करते हुए अपने खुतबे में कहा कि दिन ए इस्लाम में खुशी मनाने के जो दो महत्वपूर्ण त्योहार रखे गए हैं एक ईद उल फितर और दूसरा ईद उल अजहा है। ये दोनों ईश्वर का प्रिय महीना पवित्र रमजान मुकम्मल होने के बाद खुशी मनाने के लिए ईद उल फितर का दिन लोगों को उपहार वह इनाम के तौर पर दिया जाता है।
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ईद की नमाज अदा करते लोग
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
चंडीगढ़ की सभी मस्जिदों में गुरुवार को ईद उल फितर की नमाज अदा की गई। सभी मस्जिदों में सुबह से नमाज के लिए लोग उमड़े। नमाज के बाद लोग एक दूसरे के गले मिले और ईद मुबारक कहा। इस दौरान पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर रखे थे।
नमाज से पहले मस्जिद के इमाम द्वारा मुबारक माहे रमजान का उद्देश्य और एक उल्फत का महत्व बताया गया। नमाज के बाद देश की सलामती और इंसानियत की भलाई के और विश्व शांति के लिए दुआएं मांगी गई। पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन कुमार बंसल ने भी ईद की मुबारकबाद दी।
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नूरानी मस्जिद सेक्टर 26 के इमाम व खतीब मुफ्ती मोहम्मद अनस कासमी ने लोगों को खिताब करते हुए कहा कि रहमतों, बरकतों और माफी का महीना यानी रमजान खत्म हो चुका है। वह महीना जो आपके त्याग का अध्याय बताता है, वह महीना जो दूसरों की भूख को महसूस करने का प्रशिक्षण देता है, वह महीना जो ईश्वर के निकट लगता है, वह महीना जो कहता है कि जितना त्याग कर सको करो, जितना उदार बन सको बानो। जितना दूसरे की मदद कर सको करो। जो भी जीवन में अच्छा करने योग्य है उसे कर डालो।
उन्होंने कहा कि अल्लाह को दिल से याद करो कि उसने तुम्हें सांस दी हैं। उन सांसों में से एक खूबसूरत जिंदगी डाली। तमाम खूबियों से भरपूर महीने के चले जाने के बाद खुशियों से भरा यह ईद का त्योहार हमें यह संदेश दे रहा है कि अब सारी जिंदगी नेक जीवन गुजार कर समाज इंसानियत विश्व का देश को फायदा पहुंचाना है। हमने अगर ऐसा कर लिया तो यकीन जानो कि हमारी सारी इबादतें अल्लाह के यहां कबूल हो चुकी है।
मोहम्मदी मस्जिद के इमाम मौलाना अरशद कासमी ने बताया कि रमजान एक तरह का प्रशिक्षण है। अपनी कमजोरी पर विजय पाने का जिसे पूरा करने पर ईद जैसा त्यौहार हमारा स्वागत कर रहा है।
सेक्टर 20 के जामा मस्जिद के इमाम मौलाना मोहम्मद अजमल खान ने लोगों को संबोधित करते हुए अपने खुतबे में कहा कि दिन ए इस्लाम में खुशी मनाने के जो दो महत्वपूर्ण त्योहार रखे गए हैं एक ईद उल फितर और दूसरा ईद उल अजहा है। ये दोनों ईश्वर का प्रिय महीना पवित्र रमजान मुकम्मल होने के बाद खुशी मनाने के लिए ईद उल फितर का दिन लोगों को उपहार वह इनाम के तौर पर दिया जाता है।
उन्होंने उल्लेख करते हुए कहा कि जो कुरान जो पूरे रमजान पढ़ा गया उसमें अल्लाह ने अपने बंदों से कहा कि ए लोगों इस पवित्र किताब को जितने भी मानव जीवन को सुधारने, संवारने तथा मानवता को स्थापित करने के लिए जितने सूत्र हैं उनको अपने जीवन का हिस्सा बनाओ।
मोहम्मदी मस्जिद के इमाम मौलाना अरशद कासमी ने बताया कि रमजान एक तरह का प्रशिक्षण है। अपनी कमजोरी पर विजय पाने का जिसे पूरा करने पर ईद जैसा त्यौहार हमारा स्वागत कर रहा है।
ईदगाह मनीमाजरा के हाफिज मतलूब ने ईद की नमाज अदा काराई। उन्होंने अपने खुतबे में कहा कि हम जो नमाज से ईद में सफे लगाकर कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। इसका उद्देश्य सही है कि सारे इंसान बराबर हैं। सब एक ही मां-बाप की औलाद है। अल्लाह के आगे सजदा करके हमें ऐलान करते हैं कि हम सब इंसान अपने पैदा करने वाले मालिक के आगे और उसकी मर्जी के आगे समर्पण हो जाए।
मदरसा इजाहुल उलूम मनीमाजरा के नाजिम और वरिष्ठ इस्लामी विद्वान मौलाना मोहम्मद शकील कासमी ने अपने एक बयान में कहा कि मैं देश में रहने वाले तमाम भाइयों और बहनों को दिल की गहराइयों से ईद उल फितर की मुबारकबाद पेश करता हूं।
इसी मदरसे के मौलाना इमरान मुजददिदि ने कहा कि ईद उल फितर तमाम इंसानों के लिए अमन, खुशी, इंसाफ, बराबरी और भाईचारे का पैगाम लेकर आती है। इसलिए मैं इस पवित्र अवसर पर अपने तमाम देशवासियों से चाहे वह किसी भी मजहब और जाति के हूं सभी से अपील करता हूं कि हम सब मिलकर अपने प्यारे देश में अमन ओ अमान, इंसाफ और भाईचारे की फिजा को आम करें और गंगा जमुना तहजीब को बरकरार रखने में एक दूसरे का सहयोग करें।
नमाज के बाद सभी मस्जिदों में देश की सलामती और इंसानियत की भलाई और विश्व में शांति के लिए दुआएं मांगी गई। मुफ्ती मोहम्मद अनस कासमी ने बताया कि ईद उल फितर अल्लाह का शुक्र दुनिया में एकता और विश्वास का त्यौहार है। यह समाज की मजबूत भावना आध्यात्मिक समर्पण और दूसरों के प्रति सहानुभूति के मानवीय मूल्यों को याद दिलाता है। मुसलमान के इसका महत्व समझ कर और इसके शिक्षाओं को अपना कर आत्मविश्वास के साथ मानवीय संबंधों को मजबूत करना चाहिए। सभी समाजों में न्याय और प्रेम की भावना बढ़ाना चाहिए।
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नमाज से पहले मस्जिद के इमाम द्वारा मुबारक माहे रमजान का उद्देश्य और एक उल्फत का महत्व बताया गया। नमाज के बाद देश की सलामती और इंसानियत की भलाई के और विश्व शांति के लिए दुआएं मांगी गई। पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन कुमार बंसल ने भी ईद की मुबारकबाद दी।
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नूरानी मस्जिद सेक्टर 26 के इमाम व खतीब मुफ्ती मोहम्मद अनस कासमी ने लोगों को खिताब करते हुए कहा कि रहमतों, बरकतों और माफी का महीना यानी रमजान खत्म हो चुका है। वह महीना जो आपके त्याग का अध्याय बताता है, वह महीना जो दूसरों की भूख को महसूस करने का प्रशिक्षण देता है, वह महीना जो ईश्वर के निकट लगता है, वह महीना जो कहता है कि जितना त्याग कर सको करो, जितना उदार बन सको बानो। जितना दूसरे की मदद कर सको करो। जो भी जीवन में अच्छा करने योग्य है उसे कर डालो।
उन्होंने कहा कि अल्लाह को दिल से याद करो कि उसने तुम्हें सांस दी हैं। उन सांसों में से एक खूबसूरत जिंदगी डाली। तमाम खूबियों से भरपूर महीने के चले जाने के बाद खुशियों से भरा यह ईद का त्योहार हमें यह संदेश दे रहा है कि अब सारी जिंदगी नेक जीवन गुजार कर समाज इंसानियत विश्व का देश को फायदा पहुंचाना है। हमने अगर ऐसा कर लिया तो यकीन जानो कि हमारी सारी इबादतें अल्लाह के यहां कबूल हो चुकी है।
मोहम्मदी मस्जिद के इमाम मौलाना अरशद कासमी ने बताया कि रमजान एक तरह का प्रशिक्षण है। अपनी कमजोरी पर विजय पाने का जिसे पूरा करने पर ईद जैसा त्यौहार हमारा स्वागत कर रहा है।
सेक्टर 20 के जामा मस्जिद के इमाम मौलाना मोहम्मद अजमल खान ने लोगों को संबोधित करते हुए अपने खुतबे में कहा कि दिन ए इस्लाम में खुशी मनाने के जो दो महत्वपूर्ण त्योहार रखे गए हैं एक ईद उल फितर और दूसरा ईद उल अजहा है। ये दोनों ईश्वर का प्रिय महीना पवित्र रमजान मुकम्मल होने के बाद खुशी मनाने के लिए ईद उल फितर का दिन लोगों को उपहार वह इनाम के तौर पर दिया जाता है।
उन्होंने उल्लेख करते हुए कहा कि जो कुरान जो पूरे रमजान पढ़ा गया उसमें अल्लाह ने अपने बंदों से कहा कि ए लोगों इस पवित्र किताब को जितने भी मानव जीवन को सुधारने, संवारने तथा मानवता को स्थापित करने के लिए जितने सूत्र हैं उनको अपने जीवन का हिस्सा बनाओ।
मोहम्मदी मस्जिद के इमाम मौलाना अरशद कासमी ने बताया कि रमजान एक तरह का प्रशिक्षण है। अपनी कमजोरी पर विजय पाने का जिसे पूरा करने पर ईद जैसा त्यौहार हमारा स्वागत कर रहा है।
ईदगाह मनीमाजरा के हाफिज मतलूब ने ईद की नमाज अदा काराई। उन्होंने अपने खुतबे में कहा कि हम जो नमाज से ईद में सफे लगाकर कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। इसका उद्देश्य सही है कि सारे इंसान बराबर हैं। सब एक ही मां-बाप की औलाद है। अल्लाह के आगे सजदा करके हमें ऐलान करते हैं कि हम सब इंसान अपने पैदा करने वाले मालिक के आगे और उसकी मर्जी के आगे समर्पण हो जाए।
मदरसा इजाहुल उलूम मनीमाजरा के नाजिम और वरिष्ठ इस्लामी विद्वान मौलाना मोहम्मद शकील कासमी ने अपने एक बयान में कहा कि मैं देश में रहने वाले तमाम भाइयों और बहनों को दिल की गहराइयों से ईद उल फितर की मुबारकबाद पेश करता हूं।
इसी मदरसे के मौलाना इमरान मुजददिदि ने कहा कि ईद उल फितर तमाम इंसानों के लिए अमन, खुशी, इंसाफ, बराबरी और भाईचारे का पैगाम लेकर आती है। इसलिए मैं इस पवित्र अवसर पर अपने तमाम देशवासियों से चाहे वह किसी भी मजहब और जाति के हूं सभी से अपील करता हूं कि हम सब मिलकर अपने प्यारे देश में अमन ओ अमान, इंसाफ और भाईचारे की फिजा को आम करें और गंगा जमुना तहजीब को बरकरार रखने में एक दूसरे का सहयोग करें।
नमाज के बाद सभी मस्जिदों में देश की सलामती और इंसानियत की भलाई और विश्व में शांति के लिए दुआएं मांगी गई। मुफ्ती मोहम्मद अनस कासमी ने बताया कि ईद उल फितर अल्लाह का शुक्र दुनिया में एकता और विश्वास का त्यौहार है। यह समाज की मजबूत भावना आध्यात्मिक समर्पण और दूसरों के प्रति सहानुभूति के मानवीय मूल्यों को याद दिलाता है। मुसलमान के इसका महत्व समझ कर और इसके शिक्षाओं को अपना कर आत्मविश्वास के साथ मानवीय संबंधों को मजबूत करना चाहिए। सभी समाजों में न्याय और प्रेम की भावना बढ़ाना चाहिए।