निर्भया कांड को लेकर SC के फैसले का असर, हत्या के समय नाबालिग रहे युवक को मिली पूरी सजा
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दिल्ली में हुए निर्भया कांड को लेकर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का असर शुक्रवार को रोहतक की जिला अदालत में देखने को मिला। एडीजे रितु वाई के बहल की अदालत ने हत्या के एक मामले में वारदात के समय 18 साल से कम उम्र के युवक को उसके बालिग साथियों किलोई खास निवासी आकाश उर्फ शूटर, सुमित उर्फ हन्नी, प्रदीप व दीपक के साथ आजीवन कारावास व 1 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जबकि मामले में सातवें आरोपी 16 साल के कम उम्र के किशोर को जुवेनाइल कोर्ट ने 3 साल की सजा सुनाई।
जिला अदालत के वरिष्ठ वकील राजसिंह ग्रेवाल ने बताया कि भालौठ गांव निवासी वजीर सिंह ने 18 मार्च 2016 के शिकायत दी कि वह दोपहर अपने चाचा ओमप्रकाश के घर जा रहा था। उसके चाचा के लड़के मंजीत ने सड़क किनारे मोबाइल रिचार्ज की दुकान खोल रखी थी। उसे पता चला कि तीन बाइक पर दो-दो युवक दुकान पर आए, जहां मंजीत के साथ गांव का युवक सचिन भी बैठा था। आते ही युवकों ने फायरिंग शुरू कर दी। गोली लगने से मंजीत व सचिन घायल हो गए। हमलावर मौके से फरार हो गए। तत्काल वे घायल मंजीत व सचिन को पीजीआई ले गए, जहां मंजीत ने दम तोड़ दिया। पुलिस ने वजीर की शिकायत पर हत्या व हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर जांच पड़ताल की।
नकल करने से रोकने पर की हत्या
वजीर ने पुलिस को बयान दर्ज कराए कि घायल सचिन का कहना है कि हरियाणा शिक्षा बोर्ड की परीक्षा चल रही थी, जिसका सेंटर गांव में बनाया गया। गांव की पंचायत ने नकल रोकने के लिए गांव के गण्यमान्य लोगों को स्कूल के आसपास भेजा, ताकि बाहरी हस्तक्षेप को रोका जा सके। बुजुर्गों ने सचिन व उसके साथी राकेश को किलोई गांव से आने वाले बाहरी लोगों को रोकने के लिए कहा। जब किलोई गांव से नकल कराने के लिए बाहरी युवक आए तो सचिन और किलोई के युवकों की कहासुनी हो गई।
आरोप था कि युवकों ने उसे देख लेने की धमकी दी थी। इसके बाद सचिन मंजीत की दुकान पर जाकर बैठ गया। आरोप था कि तीन बाइकों पर छह युवक आए और सचिन व मंजीत को गोली मार दी। हमले में मंजीत की मौत हो गई, जबकि सचिन घायल हो गया। तभी से जिला अदालत में केस चल रहा था। मंगलवार को कोर्ट ने आकाश, सुमित उर्फ हन्नी, प्रदीप, दीपक व वारदात के समय 18 साल से कम उम्र के रहे युवक को दोषी करार दिया था। सभी छह आरोपियों को हत्या के मामले में शुक्रवार को आजीवन कारावास व 1 लाख रुपये की सजा सुनाई गई।
जुवेनाइल कोर्ट से शिफ्ट हो गया था मुख्य अदालत में केस
वकील आरएस ग्रेवाल ने बताया कि वारदात के समय पांच आरोपियों की उम्र 18 साल से ज्यादा थी, जबकि पांचवे की उम्र 17 साल 6 माह और छठे की उम्र 16 साल से कम थी। उसने अदालत में याचिका दायर की। बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया कांड के बाद फैसला दिया था कि वारदात के समय यदि आरोपी की उम्र 16 साल या इससे ज्यादा है तो उस पर बालिग अभियुक्तों की तरह केस चलाया जा सकता है।
वकील की याचिका पर 18 एक आरोपी की सुनवाई जुवेनाइल कोर्ट से उसी अदालत में शिफ्ट हो गई थी, जहां दूसरे बालिग आरोपियों की सुनवाई चल रही थी। ऐसे में शुक्रवार को अदालत ने सभी छह आरोपियों को हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
जुवेनाइल कोर्ट ने सुनाई 16 साल से कम उम्र के किशोर को 3 साल की कैद
वकील ने बताया कि इसी केस में जुवेनाइल कोर्ट के अंदर 16 साल से कम उम्र के आरोपी को लेकर सुनवाई हुई। अदालत ने उसे 3 साल की सजा सुनाई है। साथ ही स्पष्ट किया है कि बाल सुधार केंद्र के अंदर बिताए गए समय को भी सजा में जोड़ा जाए।