नेशनल हेराल्ड: सुनवाई से पहले ईडी की बड़ी कार्रवाई, एजेएल की करोड़ों रुपये की संपत्ति करेगी अटैच
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नेशनल हेराल्ड मामले में पंचकूला की कोर्ट में एजेएल प्लॉट अलॉटमेंट के संबंध में अगली सुनवाई गुरुवार को होगी। लेकिन प्रवर्तन निदेशालय ने बुधवार को ही बड़ी कार्रवाई करते हुए पंचकूला सेक्टर-6 स्थित एजेएल के करोड़ों रुपये के प्लॉट की अटैचमेंट प्रक्रिया को पूरा कर लिया। मामले में ईडी इससे पहले गुड़गांव और पंचकूला में करीब 64 करोड़ रुपये की संपत्ति भी अटैच कर चुकी है।
हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की ओर से एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड, एजेएल को अवैध तरीके से यह संपत्ति आवंटित की गई थी। नेशनल हेराल्ड केस में ईडी ने साल 2018 के दिसंबर महीने में इस प्रॉपर्टी को अटैच किया था। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा अपनी सरकार के समय हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष थे। जबकि आरोपी मोती लाल वोरा चेयरमैन थे।
प्लॉट आवंटन के इस मामले में पंचकूला की विशेष सीबीआई कोर्ट में चार्जशीट की स्क्रूटनी पूरी की जा चुकी है। भूपेंद्र हुड्डा और मोती लाल वोरा के खिलाफ एक दिसंबर को चार्जशीट भी दाखिल की गई थी। वहीं आज पंचकूला कोर्ट में एजेएल प्लॉट अलॉटमेंट मामले में सुनवाई होनी है।
24 साल बाद पुराने रेट पर प्लॉट किया था अलॉट
पंचकूला के सेक्टर-6 में 3,360 वर्गमीटर के प्लॉट नंबर सी-17 को 24 अगस्त 1982 को तत्कालीन मुख्यमंत्री भजनलाल ने अलॉट कराया था। कंपनी को 6 माह में निर्माण शुरू कर काम दो साल में पूरा करना था। लेकिन 10 साल में भी ऐसा नहीं किया गया। इस कारण 30 अक्टूबर 1992 को हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने अलॉटमेंट निरस्त कर प्लॉट को रिज्यूम किया।
फिर 26 जुलाई 1995 को हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने एस्टेट ऑफिसर के आदेश के खिलाफ कंपनी की अपील खारिज कर दी। फिर 14 मार्च 1998 को कंपनी की तरफ से आबिद हुसैन ने चेयरमैन हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण को प्लॉट अलॉटमेंट की बहाली की अपील की। चेयरमैन हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने 14 मई 2005 को अधिकारियों को एजेएल कंपनी के प्लॉट अलॉटमेंट की बहाली की संभावनाएं तलाशने को कहा। जबकि कानून विभाग ने अलॉटमेंट बहाली से इनकार किया था।
इसमें एजेएल कंपनी को भी आवेदन की छूट दी गई। फिर 28 अगस्त 2005 को एजेएल को ही 1982 की मूल दर पर प्लॉट अलॉट की फाइल पर हस्ताक्षर कर दिए। साथ ही कंपनी को 6 माह में निर्माण शुरू कर एक साल में काम पूरा करने को कहा गया था।