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चंडीगढ़ का मुद्दाः नेताजी हर बार करते हैं लाल डोरा बढ़ाने का वादा, अब तक जनता के हाथ आया सिर्फ 'इंतजार'
Fri, 19 Apr 2024 04:22 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Fri, 19 Apr 2024 04:22 PM IST
सार
चंडीगढ़ के राजनीतिक गलियारों में भले 2014 से ही लाल डोरा बढ़ रहा हो, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कभी लाल डोरा बढ़ाने को लेकर फाइल नहीं चली। जनवरी 2021 में तत्कालीन प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने प्रशासन के अधिकारियों के साथ एक बैठक की थी। चर्चा हुई कि लाल डोरा क्षेत्र के बाहर बहुत सारे निर्माण और विकास कार्य हुए हैं। इन्हें नियमित करने के लिए एक योजना तैयार करनी चाहिए।
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चंडीगढ़
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
चंडीगढ़ में हर बार चुनाव के दौरान शहर में लाल डोरे का जिन्न बाहर आ जाता है। सभी पार्टियों के नेता लाल डोरे को बढ़ाने का वादा करके वोट बटोरते हैं लेकिन जनता के हाथ अब तक इंतजार के अलावा कुछ नहीं आया है।
भाजपा ने वर्ष 2019 के चुनाव के संकल्प पत्र में वादा किया कि लाल डोरा को बढ़ाया जाएगा। इस बार फिर भाजपा और कांग्रेस के नेता लाल डोरा को बढ़ाने का वादा करने लगे हैं।
भाजपा के प्रत्याशी संजय टंडन ने तीन दिन पहले गांव किशनगढ़ में आयोजित एक कार्यक्रम में वादा किया था कि वे लाल डोरे को बढ़ाकर मकानों को नियमित कराने का काम करेंगे। इसके बाद फिर लाल डोरे की चर्चा छिड़ गई है। सिर्फ भाजपा ही नहीं, कांग्रेस के नेता भी इसको लेकर दावे करते रहे हैं।
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बंगलूरू स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन सेटलमेंट (आईआईएचएस) के साथ समझौता किया गया, लेकिन कुछ महीनों बाद यह भी स्पष्ट हो गया कि ये एजेंसी मास्टर प्लान-2031 के तहत लाल डोरे के अंदर के इलाके को ही विकसित करने की योजना पर काम कर रही थी। इसे लैंड पूलिंग योजना भी कही गई और दड़वा गांव के लाल डोरे के अंदर के इलाकों को पायलट प्रोजेक्ट के तहत चुना गया लेकिन अब वह योजना भी कागजों में ही रह गई है। बता दें कि 18 अगस्त 2023 को भाजपा की तरफ से एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई, जिसमें लिखा था कि ‘लाल डोर के बाहर बनी सभी इमारतें होगी नियमित’। हालांकि, उसके बाद भी अब तक धरातल पर कुछ नहीं बदला है।
लाल डोरा बढ़ाना दूर, पानी का कनेक्शन तक नहीं दिला पाए
लाल डोरा को बढ़ाना या समाप्त करना तो दूर अब तक लाल डोरे के बाहर रहने वाले लोगों को पानी का कनेक्शन तक नहीं मिल पाया है। लाल डोरे के बाहर के मकानों को बिजली के कनेक्शन मिले हुए हैं, लेकिन पानी का कनेक्शन नहीं है। फैदां समेत विभिन्न कॉलोनियों में लोग पानी के टैंकरों पर ही निर्भर हैं। वर्ष 2021 में नगर निगम की सदन की बैठक में लाल डोरे के बाहर के घरों को पानी का कनेक्शन देने का प्रस्ताव भी पास हो गया था लेकिन प्रशासन ने मंजूरी नहीं दी। आखिरी प्रशासकीय सलाहकार परिषद की बैठक में भी मुद्दा उठा। फैसला भी हो गया लेकिन अब तक जनता के हाथ खाली है।
क्या है लाल डोरा
लाल डोरा सिस्टम को अंग्रेजों ने सन 1908 में बनाया था। उस समय रेवेन्यू रिकॉर्ड रखने के लिए खेतीबाड़ी की जमीन के साथ गांव की आबादी को अलग-अलग दिखाने के मकसद से नक्शे पर आबादी के बाहर लाल लाइन खींच दी जाती थी। लाल लाइन की वजह से इसके तहत आने वाली जमीन या क्षेत्र लाल डोरा कहलाने लगा। यह व्यवस्था खासकर दिल्ली और इसके आसपास के इलाकों में लागू थी। बता दें कि प्रशासन के एक सर्वे के अनुसार शहर के गांवों में लाल डोरे के बाहर करीब 254 एकड़ एरिया में लोगों ने अवैध निर्माण कर रखा है, जिसमें तीन हजार से ज्यादा घर शामिल हैं।
प्राथमिकता के आधार पर हल करने की करेंगे कोशिश
शहर में पिछले कई वर्षों से लाल डोरा को बढ़ाने की मांग उठ रही है। यह राष्ट्रीय मुद्दा भी है इसलिए भाजपा की स्थानीय इकाई के साथ केंद्रीय टीम भी इसको लेकर गंभीर है। भाजपा ने कई स्तर पर इस मुद्दे को उठाया है और हल कराने का प्रयास किया है। इस बार भी इसे प्राथमिकता के आधार पर हल करने की कोशिश करेंगे। - जेपी मल्होत्रा, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा
10 साल से जनता को झांसे में रखा
लाल डोरा का मुद्दा शहरवासियों की एक बड़ी मांग है। भाजपा ने पिछले 10 साल में लाल डोरे पर सिर्फ झूठ बोला है और जनता को झूठे आश्वासन दिए हैं। 10 साल में उन्होंने लाल डोरे पर कुछ काम नहीं किया और अब फिर वादा कर रहे हैं कि वे इसे बढ़ाएंगे। जनता अब इनके झांसे में नहीं आएगी। कांग्रेस की पूरी तैयारी है। इस मुद्दे को हल करने के लिए हम हर मुमकिन कोशिश करेंगे। - एचएस लक्की, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस
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भाजपा ने वर्ष 2019 के चुनाव के संकल्प पत्र में वादा किया कि लाल डोरा को बढ़ाया जाएगा। इस बार फिर भाजपा और कांग्रेस के नेता लाल डोरा को बढ़ाने का वादा करने लगे हैं।
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भाजपा के प्रत्याशी संजय टंडन ने तीन दिन पहले गांव किशनगढ़ में आयोजित एक कार्यक्रम में वादा किया था कि वे लाल डोरे को बढ़ाकर मकानों को नियमित कराने का काम करेंगे। इसके बाद फिर लाल डोरे की चर्चा छिड़ गई है। सिर्फ भाजपा ही नहीं, कांग्रेस के नेता भी इसको लेकर दावे करते रहे हैं।
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बंगलूरू स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन सेटलमेंट (आईआईएचएस) के साथ समझौता किया गया, लेकिन कुछ महीनों बाद यह भी स्पष्ट हो गया कि ये एजेंसी मास्टर प्लान-2031 के तहत लाल डोरे के अंदर के इलाके को ही विकसित करने की योजना पर काम कर रही थी। इसे लैंड पूलिंग योजना भी कही गई और दड़वा गांव के लाल डोरे के अंदर के इलाकों को पायलट प्रोजेक्ट के तहत चुना गया लेकिन अब वह योजना भी कागजों में ही रह गई है। बता दें कि 18 अगस्त 2023 को भाजपा की तरफ से एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई, जिसमें लिखा था कि ‘लाल डोर के बाहर बनी सभी इमारतें होगी नियमित’। हालांकि, उसके बाद भी अब तक धरातल पर कुछ नहीं बदला है।
लाल डोरा बढ़ाना दूर, पानी का कनेक्शन तक नहीं दिला पाए
लाल डोरा को बढ़ाना या समाप्त करना तो दूर अब तक लाल डोरे के बाहर रहने वाले लोगों को पानी का कनेक्शन तक नहीं मिल पाया है। लाल डोरे के बाहर के मकानों को बिजली के कनेक्शन मिले हुए हैं, लेकिन पानी का कनेक्शन नहीं है। फैदां समेत विभिन्न कॉलोनियों में लोग पानी के टैंकरों पर ही निर्भर हैं। वर्ष 2021 में नगर निगम की सदन की बैठक में लाल डोरे के बाहर के घरों को पानी का कनेक्शन देने का प्रस्ताव भी पास हो गया था लेकिन प्रशासन ने मंजूरी नहीं दी। आखिरी प्रशासकीय सलाहकार परिषद की बैठक में भी मुद्दा उठा। फैसला भी हो गया लेकिन अब तक जनता के हाथ खाली है।
क्या है लाल डोरा
लाल डोरा सिस्टम को अंग्रेजों ने सन 1908 में बनाया था। उस समय रेवेन्यू रिकॉर्ड रखने के लिए खेतीबाड़ी की जमीन के साथ गांव की आबादी को अलग-अलग दिखाने के मकसद से नक्शे पर आबादी के बाहर लाल लाइन खींच दी जाती थी। लाल लाइन की वजह से इसके तहत आने वाली जमीन या क्षेत्र लाल डोरा कहलाने लगा। यह व्यवस्था खासकर दिल्ली और इसके आसपास के इलाकों में लागू थी। बता दें कि प्रशासन के एक सर्वे के अनुसार शहर के गांवों में लाल डोरे के बाहर करीब 254 एकड़ एरिया में लोगों ने अवैध निर्माण कर रखा है, जिसमें तीन हजार से ज्यादा घर शामिल हैं।
प्राथमिकता के आधार पर हल करने की करेंगे कोशिश
शहर में पिछले कई वर्षों से लाल डोरा को बढ़ाने की मांग उठ रही है। यह राष्ट्रीय मुद्दा भी है इसलिए भाजपा की स्थानीय इकाई के साथ केंद्रीय टीम भी इसको लेकर गंभीर है। भाजपा ने कई स्तर पर इस मुद्दे को उठाया है और हल कराने का प्रयास किया है। इस बार भी इसे प्राथमिकता के आधार पर हल करने की कोशिश करेंगे। - जेपी मल्होत्रा, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा
10 साल से जनता को झांसे में रखा
लाल डोरा का मुद्दा शहरवासियों की एक बड़ी मांग है। भाजपा ने पिछले 10 साल में लाल डोरे पर सिर्फ झूठ बोला है और जनता को झूठे आश्वासन दिए हैं। 10 साल में उन्होंने लाल डोरे पर कुछ काम नहीं किया और अब फिर वादा कर रहे हैं कि वे इसे बढ़ाएंगे। जनता अब इनके झांसे में नहीं आएगी। कांग्रेस की पूरी तैयारी है। इस मुद्दे को हल करने के लिए हम हर मुमकिन कोशिश करेंगे। - एचएस लक्की, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस