सबसे पहले ड्रग्स के गोदाम ढहाइए: शशिकांत
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पंजाब के पूर्व डीजीपी (जेल) शशिकांत के अनुसार ड्रग तस्करी के लिए गोदाम के रूप में इस्तेमाल होने वाले सेफ हाउस और पक्के अड्डों का कोई स्थायी तोड़ पुलिस सहित सुरक्षा एजेंसियां नहीं निकाल पाई हैं।
परिणामस्वरूप यह कारोबार प्रदेश के जवानों को लगातार तबाह करता चला गया। आज भी पंजाब और इसके बाहर नशे की मंडियां जस की तस चल रही हैं। जब तक इन्हें तहस-नहस नहीं किया जाता, हालात सामान्य होने मुश्किल हैं। ‘अमर उजाला’ से विशेष बातचीत में पूर्व डीजीपी ने ड्रग्स तस्करी के विभिन्न पहलुओं पर खुलकर बातचीत की।
इसमें से नेताओं-अधिकारियों के नेक्सस और आईएसआई के मंसूबों के बारे में उनके विचारों को पहली दो किश्तों में प्रकाशित किया जा चुका है। बातचीत का तीसरा और अंतिम भाग :-
ड्रग्स की समस्या को जड़ से मिटाने का तरीका
प्र. आपकी राय में ड्रग्स की समस्या को जड़ से मिटाने का तरीका क्या है?
उ. जब तक सेफ हाउस और ड्रग्स की पक्की मंडियां खत्म नहीं होतीं, तब तक इस समस्या का स्थायी हल नहीं निकलेगा। ड्रग्स स्मगलिंग के सेफ हाउस और पक्के अड्डों का सिस्टम लंबे समय से चल रहा है। हमारी सुरक्षा एजेंसियां इन्हें समाप्त करने में अभी तक नाकाम रही हैं। इनका खात्मा बहुत जरूरी है।
प्र. सेफ हाउस क्या हैं?
उ. सेफ हाउस वह ठिकाने हैं, जहां ड्रग्स को पाकिस्तान से पंजाब की सीमा में प्रवेश करने के बाद आगे भेजने से पहले स्टोर किया जाता है। यह किसी ट्यूबवेल के साथ बना कमरा भी हो सकता है या फिर किसी गांव में एक कोने में बना कोई वीरान मकान।
मेन सप्लायर से ड्रग्स प्राप्त करने के बाद कुरियर अलग-अलग पड़ाव में ऐसे ही सेफ हाउसेज का इस्तेमाल इनके स्टोरेज के लिए करते हैं। कई सेफ हाउसेज से गुजरने के बाद हेरोइन, स्मैक आदि पंजाब के अलग-अलग हिस्सों में नौजवानों को बर्बाद करने के साथ ही दिल्ली, मुंबई के रास्ते अंतरराष्ट्रीय मार्केट में पहुंच जाती है।
यहां है नशे की मंडियां
प्र. आपने पक्के अड्डों की बात की है। यह कौन-कौन से हैं?
उ. पंजाब में अमृतसर, लुधियाना, जालंधर और गोराया में नशे की मंडियां थीं। आज भी हैं। इन पर नकेल कसने की जरूरत है।
प्र. और दिल्ली में?
उ. दिल्ली में पहले पहाड़गंज नशों की पक्की मंडी थी। अब यह केवल डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर रह गया है। ड्रग्स के कारोबारी साउथ दिल्ली, छतरपुर, करोल बाग आदि इलाकों में अपने पैर पसार चुकेहैं। यहीं से मुंबई तक सप्लाई चेन चलती है।
प्र. मुख्यत: कौन से लोग इस धंधे में शामिल हैं?
उ. पंजाब के पुराने गोल्ड तस्करों की बात मैं पहले ही कर चुका हूं। रशियन, चाइनीज, इस्राइली और नाइजीरियन अब बड़ी तादाद में इस कारोबार का हिस्सा बन चुके हैं। पिछले दिनों इस धंधे में संलिप्त कुछ नाइजीरियनों के दिल्ली से पकड़े जाने से यह बात साबित भी हो चुकी है।
नशे को मिटाने को दिल से हो काम
उ. देर से मगर अच्छी शुरुआत है। इस टेंपो को बरकरार रखने की जरूरत है। पुलिस सहित सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह जरूरी है कि देश हित में इस बीमारी को जड़ से मिटाने के लिए दिल से काम करें। इसके साथ ही राजनीतिक द्वेष और निजी हितों को एक तरफ रखा जाए। उम्मीद की जानी चाहिए कि आने वाले दिन पहले से अच्छे होंगे।