स्कूलों की दहलीज तक नशा, चौंका देंगे 8 खुलासे
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नशे के सौदागरों ने अपना जाल ट्राइसिटी में फैला दिया है। जनवरी से अब तक एक के बाद एक ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें स्कूली बच्चों को नशा बेचे जाने का खुलासा हुआ है। दो पेडलर्स तो स्कूलों के पास पकड़े गए हैं।
पुलिस सूत्रों की मानें तो ड्रग तस्करों के टार्गेट पर अब स्कूल और कालेज के बच्चे हैं। इन यंगस्टर्स से वे अपना टारगेट ग्रुप तैयार कर रहे हैं।
इसके लिए पहले स्कूल और कालेज के छात्रों को पहले मुफ्त में नशा करवाया जाता है और लत लगने पर तस्कर उन्हें पेडलर और अन्य तरीके से इस्तेमाल करते हैं।
डिस्कोथेक्स, स्कूल और कालेज के बाहर बच्चों से संपर्क किया जाता था। नशा तस्कर ट्राइसिटी में अपना जाल फैलाने के लिए पंचकूला को गलियारे की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। यहां न सड़कों और चौराहों पर सीसीटीवी हैं और पुलिस की मजबूत नाकाबंदी। इसका फायदा तस्कर उठा रहे हैं।
हिमाचल प्रदेश और दिल्ली से आती है नशे की खेप
हिमाचल प्रदेश और दिल्ली से बड़ी खेप लाकर यहां से पेडलर्स के जरिए चंडीगढ़ और पूरे ट्राइसिटी में स्कूल और कालेजों के बच्चों तथा युवाओं को सप्लाई की जा रही है। ढाई महीने पहले तक यह काम बेरोकटोक चल रहा था। जनवरी में एक नाइजीरियन और उसकी महिला मित्र होटल के बाहर किराये को लेकर ऑटो चालक से भिड़ गए थे।
ऑटो चालक ने पुलिस बुला ली और एक बड़े ड्रग्स रैकेट से पर्दा उठ गया। तब से पंचकूला पुलिस इस गिरोह से जुड़े एक दर्जन से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें आठ नाइजीरियन हैं और पांच ट्राइसिटी के रहने वाले। इनकी गिरफ्तारी में यह सामने आया कि नशा स्कूली बच्चों और कालेज छात्रों को भी सप्लाई किया जाता था।
पिछले साल केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी की सूचना पर चंडीगढ़ पुलिस ने दस करोड़ रुपये कीमत का कोबरा का जहर बरामद किया था। मेनका गांधी ने पंजाब के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जानकारी दी थी कि रैव पार्टियों के जरिए यंगस्टर्स को नशे की गिरफ्त में डाला जा रहा है।
स्कूलों में नशा, 5 बड़ी गिरफ्तारियां
पंचकूला पुलिस ने ढाई महीने में सेसई मलिक सहित अमनदीप कौर, प्रवीन कुमार उर्फ डिंका, प्रवीन कुमार सैनी, रिंकू मलिक, विजय, प्रेमलता, अमित सहित अन्य लोगों को भी गिरफ्तार कर चुकी है।
काम करने का तरीका
ड्रग्स के बड़े तस्कर अक्सर बस स्टैंड के आसपास के होटल या ढाबे से डील करते थे। वहां से माल पेडलर्स को सप्लाई कर इसे स्कूल और कॉलेज के बच्चों तक पहुंचाया जाता है।
CASE 1
पंचकूला पुलिस ने जनवरी में नाइजीरियन गैंग को गिरफ्तार कर इससे करोड़ों रुपये की ड्रग्स बरामद की। गैंग के एक दर्जन से ज्यादा सदस्य पुलिस की गिरफ्त में है। पंचकूला पुलिस ने इसे इंटरनेशनल ड्रग रैकेट बताया था। यह गैंग दिल्ली और हिमाचल प्रदेश से ड्रग्स लाकर ट्राइसिटी में सप्लाई करता था। इनके निशाने पर स्कूल और कालेज के बच्चे तथा युवा थे।
CASE 2
इसी हफ्ते पंचकूला पुलिस ने इलेक्ट्रानिक्स की दुकान चलाने वाले विजय को स्कूली बच्चों को चरस बेचते पकड़ा था। उससे 400 ग्राम चरस बरामद हुई। उसकी निशानदेही पर मोहाली निवासी एक बैंक अधिकारी की पत्नी प्रेमलता को 800 ग्राम चरस सहित गिरफ्तार किया था। यह चरस हिमाचल प्रदेश से लाई जाती थी और ट्राइसिटी में स्कूली बच्चों को बेची जाती थी।
CASE 3
पुलिस ने दिसंबर-2014 महीने की सात तारीख को सेक्टर-25 में एक युवक को गिरफ्तार किया। उसके पास तलाशी के दौरान 10 दस ग्राम हेरोइन बरामद हुई थी। पुलिस जांच में सामने आया कि युवक पेडलर था और गेड़ी रूट और अन्य इलाकों में स्टूडेंट्स को भी नशा पहुंचाता था।
CASE 4
नवंबर-2014 में सेक्टर-22 स्थित अरोमा चौक पर युवक से 15 ग्राम हेरोइन बरामद की थी। पुलिस ने आरोपी को रिमांड में भी लेकर पूछताछ की, लेकिन जांच आगे नहीं बढ़ सकी। जांच में सामने आया था कि युवक पंजाब से नशा लाकर यहां डिस्कोथेक्स में बेचता था। कई छात्र-छात्राएं उसके संपर्क में थे।
CASE 5
नवंबर-2014 में पुलिस ने सेक्टर-43 बस स्टैंड पर छापेमारी की। इस दौरान पुलिस ने एक आरोपी को छह ग्राम हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया। आरोपी युवक की पहचान मोहाली निवासी के रूप में हुई थी, लेकिन, पुलिस ने आरोपी के माध्यम से उसके एक किसी अन्य साथी को पकड़ने में नाकाम रही थी।
स्कूलों तक नशा, अब तक 3 की मौत
सेक्टर-22 में नशा
ड्रग्स की ओवर डोज से दिसंबर-2012 सेक्टर-22 के एक होटल में छात्रा की तबीयत खराब हुई थी और उसने अस्पताल में दम तोड़ दिया था। युवती राधिका अंबाला की रहने वाली थी और सेक्टर 11 स्थित गर्ल्स कॉलेज में बीए-II की छात्रा थी।
पीजी में खिलाड़ी की मौत
सेक्टर-22 में पीजी रहने वाले एक रणजी खिलाड़ी साहिल की बंद कमरे में मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह ड्रग्स की ओवर डोज सामने आई थी। साहिल पंजाब का रहने वाला था और कि्रकेट अकादमी में सलेक्शन के बाद चंडीगढ़ आया था।
मनीषा की मौत
सेक्टर-22 स्थित नुक्कड़ ढाबा के मालिक की बेटी मनीषा का शव 18 अक्टूबर-2014 को शंभू बार्डर के पास नाले में मिला था। जहां पोस्टमार्टम के बाद सामने आया कि मनीषा की मौत हेरोइन की ओवरडोज की वजह से हुई थी। राधिका आर्किटेक्ट की पढ़ाई कर रही थी।
शर्मनाक है नशा तस्करी की स्थिति
पिछले एक महीने में नशे के सौदागरों ने चंडीगढ़ पुलिस की जांच व सक्रियता की धज्जियां उड़ा कर रख दीं हैं। शहर के स्कूल, कालेज, बस स्टैंड, कोर्ट व जेल हर ओर से नशा बरामद हो चुका है। पिछले एक महीने क्राइम ब्रांच ने डीएवी कालेज के पास व मनीमाजरा स्थित एक स्कूल से नशे के व्यापारियों को नशे के साथ गिरफ्तार किया।
वहीं बुड़ैल जेल के अंदर से कुछ समय के अंतराल में दो अलग-अलग कैदियों से चरस बरामद किया गया। वहीं कोर्ट में पेशी के दौरान एक महीने के अंदर दो आरोपियों से नशा बरामद किया गया। वहीं पुलिस ने कुछ महीने पहले सेक्टर-43 बस स्टैंड से एक आरोपी को हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया था।
हैपेटाइटिस-सी, एड्स और नपुंसकता का खतरा
हाल ही में पंजाब में हुई एक स्टडी में सामने आया है कि नशे की लत से हैपेटाइटिस सी, एड्स और नपुंसकता के मामले भी बढ़ रहे हैं। नशेड़ियों के ग्रुप एक ही सीरिंज का इस्तेमाल करते हैं। इससे हैपेटाइटिस सी और एचआईवी संक्रमण बढ़ रहा है।
ये दोनों बीमारियां लाइलाज हैं। हैपेटाइटिस सी से लीवर सड़ जाता है। नशे में असुरिक्षत यौन संबंध बनाए जाते हैं और इससे भी एड्स का खतरा बढ़ रहा है।
नशा तस्करों को फांसी की सजा तक का है प्रावधान
नशा तस्करों के पकड़े जाने पर उनके खिलाफ दर्ज होने वाला केस उनसे बरामद मात्रा पर तय करता है। साथ ही ये इस पर भी निर्भर करता है कि नशीला पदार्थ किस तरह का है यानि अफीम, चरस, कोकीन, हेरोइन, गांजा आदि। नशीले पदार्थ बरामद होने पर उन पर स्मॉल कैटेगरी, कामर्शियल और नॉन कामर्शियल के तहत एनडीपीएस के तहत केस दर्ज किया जाता है।
इसके तहत तीन साल से लेकर उम्र कैद तक की सजा दी जा सकती है। यह अपराध गैर जमानती होता है। हालांकि स्मॉल और नॉन कामर्शियल कैटेगरी में कुछ दिनों बाद जमानत मिल जाती है, लेकिन कामर्शियल कैटेगरी में जमानत नहीं मिलती है। स्मॉल कैटेगरी में तीन साल और नॉन कामर्शियल कैटेगरी में दस साल तक की सजा का प्रावधान है।
वहीं कामर्शियल कैटेगरी के तहत कम से कम दस साल और अधिकतम 20 साल तक की सजा दी जा सकती है। वहीं दूसरी बार इसी कैटेगरी में पकड़े जाने पर फांसी की सजा तक का प्रावधान है।
नशा तस्करी को लेकर जनता के विचार
एडवोकेट बोले
छोटे ड्रग तस्कर पकड़े जाने पर सजा कम होने के कारण जल्द ही जेल से छूट जाते हैं। जबकि, बड़े तस्करों तक पुलिस पहुंच नहीं पाती है। इस समस्या की मूल जड़ ऐसे लोग ही हैं। पुलिस को ऐसे लोगों को पकड़ना चाहिए।
- हरीश भारद्वाज, सीनियर एडवोकेट
अक्सर सुनने में आता है कि स्कूलों के पास से ड्रग तस्कर पकड़े जाते हैं। यह चिंता की बात है। पुलिस को ऐसे लोगों को पकड़कर जेल भेजना चाहिए। बाहर से ड्रग यहां लाई जाती है। इस पर भी रोक लगनी चाहिए।
- टरमिंदर सिंह, सीनियर एडवोकेट
पुलिस छोटे ड्रग तस्करों तक ही सीमित है। ड्रग एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। पुलिस को इस समस्या की ओर गंभीरता से एक्शन लेना चाहिए।
-रविंद्ररा पंडित, सीनियर एडवोकेट
पुलिस का तर्क
शहर में नशा व उसके सौदागरों की इंट्री एक बड़ी समस्या है। पुलिस मामले को गंभीरता से लेकर जांच में लगी है। नशे से जुड़े लोगों को बख्शा नहीं जा रहा है। आरोपियों की जानकारी पंजाब पुलिस को भी दी जाती है। ऐसे लोगों पर लगाम कसने में पुलिस जुटी है। -डा. सुखचैन सिंह गिल, एसएसपी
क्राइम ब्रांच में साल-2013 में एक टीम का गठन किया गया था। जिसका उद्देश्य शहर नशा मुक्त बनाना है। -जगबीर सिंह, डीएसपी क्राइम ब्रांच जब भी कोई आरोपी पकड़ा जाता है, तो उसके निशानदेही पर संबंधित पुलिस को सूचना दी जाती है। ऐसे मामलों में पुलिस संयुक्त जांच करती है। व्यापार को जड़ से खत्म करने के लिए अभिभावकों को सचेत होना होगा।
-आशीष कपूर, एसपी सिटी, मोहाली
क्या कहते हैं प्रिंसीपल
ट्राइसिटी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को ड्रग्स बेचने की घटना गंभीर मुद्दा है। ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। स्कूल प्रबंधकों को इस दिशा में खास सावधानी बरतनी होगी। 11वीं और 12वीं क्लास के स्टूडेंट्स को खास काउंसिलिंग की जरुरत होती है।
-डा.राकेश सचदेवा, प्रिंसिपल डीएवी सेक्टर-15
स्कूल प्रबंधकों को सीनियर कक्षाओं के स्टूडेंट्स पर विशेष ध्यान रखना चाहिए। स्टूडेंट्स को ड्रग्स सप्लाई जैसे मामले स्कूलों से बाहर होते हैं। हम स्टूडेंट्स की इस तरह के मामलों से बचने के लिए समय-समय पर काउंसिलिंग करते हैं। अभिभावकों को भी बच्चों की गतिविधियों पर खास ध्यान रखने की जरुरत है।
-एचएस मामिक, प्रेसिडेंट इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन
ड्रग्स तस्कर अधिकतर सीनियर स्टूडेंट्स को ही अपना शिकार बनाते हैं। स्कूली स्तर पर बच्चे अधिक परिपक्व नहीं होते। स्कूलों में ऐसे मामलों को लेकर सतर्क रहने की जरुरत है। छुट्टी के समय स्कूलों के बाहर अधिक चौकसी बरतने जानी चाहिए ।
-सरोज सावंत, प्रिंसिपल मोती राम आर्य सी. से. स्कूल
नशा तस्करी में कई बड़े हाथ शामिल
बीते ढाई साल के दौरान ट्राइसिटी में नशे के नौ सौदागर दबोचे गए हैं जो स्कूली बच्चों को नशीले पदार्थ बेचते थे। इस काले धंधे में बड़े-बड़े हाथ शामिल हैं। चंडीगढ़ के एक बैंक अधिकारी की पत्नी की गिरफ्तारी के बाद ट्राइसिटी पुलिस ने सक्रियता दिखाई है। पंचकूला में कुछ और बड़े घरों के लड़के गिरफ्त में आए हैं। ड्रग तस्करी के तार बहुत दूर तक हैं।
चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली पुलिस अब इन तारों के सिरे पकड़ने में जुटी हैं। सवाल है कि आखिर नशे के कारोबारियों के हाथ हमारे मासूमों तक कैसे पहुंचे? और हमें इसकी भनक तब लगी जब कई बड़े स्कूलों के बच्चे इसकी गिरफ्त में आ गए। हालांकि चंडीगढ़ के कुछ स्कूलों ने पेरेंट्स को पत्र भेजकर आगाह किया था नशे की कैंडी बिकने की सूचनाएं आ रही हैं।
यह बात आई गई हो गई। दरअसल नौनिहालों को नशे की ओर ले जाने के लिए हम सभी जिम्मेदार हैं। बच्चों को स्कूल भेजकर पेरेंट्स निश्चिंत हो जाते हैं। घर से स्कूल और स्कूल से घर तक की बच्चे की गतिविधियों पर उनकी नजर नहीं रहती।
स्कूल प्रबंधन को भी खबर नहीं है कि गेट के बाहर उनके स्टूडेंट पर किन दरिंदों की निगाह है और पुलिस भी तभी हरकत में आती है जब पानी सिर से निकलने लगता है। अगर अब भी हम नहीं चेते तो हमारे होनहार नशे के गर्त में चले जाएंगे और हम ताकते रह जाएंगे। काश! ऐसा न हो।