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नेहा शौरी हत्याकांड: तीन डॉक्टरों ने किया ड्रग इंस्पेक्टर का पोस्टमार्टम, आरोपी के साले का बड़ा दावा
Mon, 01 Apr 2019 10:45 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खरड़(मोहाली)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खरड़(मोहाली)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 01 Apr 2019 10:45 AM IST
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नेहा शौरी हत्याकांड
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जोनल लाइसेंसिंग अथॉरिटी डॉ. नेहा शौरी और मोरिंडा निवासी आरोपी बलविंदर सिंह के शवों का पोस्टमार्टम सिविल अस्पताल खरड़ में किया गया। इस दौरान नेहा के पति वरुण मोगा, पिता व भाई के अलावा कई रिश्तेदार और आरोपी के भी परिजन मौजूद थे। नेहा के पति वरुण काफी व्याकुल नजर आए। वहीं नेहा के पिता ने पंजाब सरकार से मांग की कि इस वारदात की उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए। डॉ. धर्मिंदर, डॉ. रमन भल्ला तथा डॉ. सुमित शर्मा के पैनल ने नेहा की बॉडी में से दो गोलियां निकालीं, जो छाती के आसपास लगीं थीं। एक गोली दिल में लगी थी, जो जानलेवा सिद्ध हुई। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
पंचतत्व में विलीन हुई नेहा, पति ने दी मुखाग्नि
कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद नेहा का पार्थिव शरीर घर लाया गया। इसके बाद वहां से अंतिम संस्कार के लिए शवयात्रा मनीमाजरा श्मशान घाट के लिए साढ़े तीन बजे रवाना हुई। चिता को मुखाग्नि पति वरुण मोगा दी। अंतिम यात्रा में श्रद्धांजलि देने के लिए विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के अलावा धार्मिक, राजनीतिक, सामाजिक, स्वयंसेवी संस्थाओं के पदाधिकारी बड़ी संख्या में पहुंचे। इस मौके पर कर्नल अमर शर्मा, कर्नल मोहित शर्मा और व्यापार मंडल जिला प्रधान बॉबी सिंह मौजूद रहे।
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पंचतत्व में विलीन हुई नेहा, पति ने दी मुखाग्नि
कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद नेहा का पार्थिव शरीर घर लाया गया। इसके बाद वहां से अंतिम संस्कार के लिए शवयात्रा मनीमाजरा श्मशान घाट के लिए साढ़े तीन बजे रवाना हुई। चिता को मुखाग्नि पति वरुण मोगा दी। अंतिम यात्रा में श्रद्धांजलि देने के लिए विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के अलावा धार्मिक, राजनीतिक, सामाजिक, स्वयंसेवी संस्थाओं के पदाधिकारी बड़ी संख्या में पहुंचे। इस मौके पर कर्नल अमर शर्मा, कर्नल मोहित शर्मा और व्यापार मंडल जिला प्रधान बॉबी सिंह मौजूद रहे।
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बलविंदर के शरीर से मिलीं दो गोलियां
आरोपी बलविंदर सिंह का शव पीजीआई चंडीगढ़ से खरड़ सरकारी अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए लाया गया। बलविंदर के शव का पोस्टमार्टम कर रहे डॉ. धर्मिंदर सिंह ने बताया कि उसके शरीर से दो गोलियां बरामद हुईं हैं। पहली गोली जो माथे में लगी थी, उसकी गर्दन के पिछले हिस्से में से बरामद हुई। दूसरी गोली जो उसने सीने पर रखकर चलाई थी, वह उसकी पीठ में से बरामद हुई है। बलविंदर का शव भी उसके परिजनों को सौंप दिया गया। मोरिंडा में देर शाम उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
बलविंदर के साले का दावा, परिवार को नहीं थी कोई जानकारी
दस साल पुरानी रंजिश में डॉ. नेहा शौरी की हत्या करने वाले बलविंदर सिंह के परिजनों ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। बलविंदर सिंह के साले हरजीत सिंह ने बताया कि घर में परिवार के किसी भी सदस्य को इस बारे में भनक तक नहीं थी। बलविंदर सिंह के रिवाल्वर का लाइसेंस लेने व रिवाल्वर खरीदने के बारे में परिवार के सदस्य पूरी तरह अनजान हैं। हरजीत ने बताया कि 2009 में बलविंदर सिंह की दवाइयों की दुकान बंद होने के बाद उसने कुछ समय मोहाली में एक प्राइवेट अस्पताल में नौकरी की। उसके बाद उसने अपने घर मोरिंडा में ही एक अस्पताल खोला था जो चल नहीं सका।
अस्पताल को भी ड्रग विभाग ने बंद करवा दिया। हरजीत के मुताबिक, बलविंदर आजकल कुराली के एक प्राइवेट अस्पताल में रात की शिफ्ट की नौकरी कर रहा था। दिन में आकर वह घर में सो जाता था और घर के सदस्यों से भी ज्यादा बातचीत नहीं करता था। बता दें कि 2009 में कुछ प्रतिबंधित दवाइयां पकड़े जाने पर उसकी दवाइयों की दुकान बंद हो गई थी, उसी को लेकर उसका केस अदालत में चल रहा था, जिसे निपटाने के लिये वह ड्रग विभाग के दफ्तर के चक्कर लगा रहा था।
बलविंदर के साले का दावा, परिवार को नहीं थी कोई जानकारी
दस साल पुरानी रंजिश में डॉ. नेहा शौरी की हत्या करने वाले बलविंदर सिंह के परिजनों ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। बलविंदर सिंह के साले हरजीत सिंह ने बताया कि घर में परिवार के किसी भी सदस्य को इस बारे में भनक तक नहीं थी। बलविंदर सिंह के रिवाल्वर का लाइसेंस लेने व रिवाल्वर खरीदने के बारे में परिवार के सदस्य पूरी तरह अनजान हैं। हरजीत ने बताया कि 2009 में बलविंदर सिंह की दवाइयों की दुकान बंद होने के बाद उसने कुछ समय मोहाली में एक प्राइवेट अस्पताल में नौकरी की। उसके बाद उसने अपने घर मोरिंडा में ही एक अस्पताल खोला था जो चल नहीं सका।
अस्पताल को भी ड्रग विभाग ने बंद करवा दिया। हरजीत के मुताबिक, बलविंदर आजकल कुराली के एक प्राइवेट अस्पताल में रात की शिफ्ट की नौकरी कर रहा था। दिन में आकर वह घर में सो जाता था और घर के सदस्यों से भी ज्यादा बातचीत नहीं करता था। बता दें कि 2009 में कुछ प्रतिबंधित दवाइयां पकड़े जाने पर उसकी दवाइयों की दुकान बंद हो गई थी, उसी को लेकर उसका केस अदालत में चल रहा था, जिसे निपटाने के लिये वह ड्रग विभाग के दफ्तर के चक्कर लगा रहा था।