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फरमानः नशामुक्ति केंद्रों की निगरानी अथॉरिटी का मसौदा दें सरकारें
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 25 Mar 2016 09:08 AM IST
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नशे की लत
- फोटो : डेमो फोटो
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में नशामुक्ति केंद्रों की निगरानी के लिए राज्यस्तरीय अथॉरिटी गठित करने का निर्देश दिया है। साथ ही पूछा है कि क्या सरकार अपने स्तर पर अथॉरिटी के संचालन के लिए सक्षम है, या फिर इसे निजी हाथों में सौंपा जाए। अन्य विकल्प के तौर पर पब्लिक प्राइवेट साझेदारी पर भी विचार करने को कहा गया है।
जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने यह सुझाव दिया है कि नशामुक्ति केंद्रों की निगरान अथॉरिटी में निजी क्षेत्र की भागीदारी से निगरानी और बेहतर ढंग से हो सकेगी। मामले की अगली सुनवाई के लिए चार मई की तिथि तय की गई है। अदालत ने अगली सुनवाई पर सरकारों से अथॉरिटी का मसौदा पेश करने को कहा है। मसौदे में सरकारों को बताना होगा कि अथॉरिटी में कौन-कौन होंगे, कितना स्टाफ होगा और इसके लिए फंड कहां से आएंगे।
हरियाणा और यूटी की ओर से कोई ठोस जवाब नहीं आया, लेकिन पंजाब सरकार की ओर से पेश हुईं एडिशनल एडवोकेट जनरल रीता कोहली ने बेंच को बताया कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में पहले से बोर्ड बना हुआ है, लेकिन बेंच ने नए सिरे से अथॉरिटी गठित करने को कहा है। पंजाब की ओर से यह भी बताया गया है कि नशामुक्ति केंद्रों की निगरानी के लिए फिरोजपुर, अमृतसर, फरीदकोट और बठिंडा में जिलास्तरीय कमेटियां गठित कर ली गई हैं। जल्द ही अन्य जिलों में भी ऐसी ही कमेटियां बना ली जाएंगी।
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नशा छुड़ाने में मदद का विकल्प तलाशने को भी बने कमेटी
हाईकोर्ट ने एक ऐसी कमेटी गठित करने का भी निर्देश दिया है, जो नशे के लिए इस्तेमाल हो रहीं दवाओं के विकल्प के तौर पर ऐसी दवाएं ढूंढने का काम करे, जो नशे की लत छुड़ाने में कारगर साबित हों। ड्रग्स तस्करी पर पंजाब सरकार ने बताया है कि हाईकोर्ट के आदेश पर शुरू की गई 181 हेल्पलाइन पर आई शिकायतों के माध्यम से पिछले साल 86 और इस वर्ष अब तक 16 एफआईआर दर्ज हुई हैं। वहीं हरियाणा सरकार ने बताया कि पंचकूला में दो एफआईआर दर्ज की गईं। वहीं 17 सप्लायर्स की पहचान की गई है। छात्रों को नशे के कुप्रभाव से जागरूक करने के लिए हाईकोर्ट ने पुरानी व्यवस्था बदलकर पाठ्यक्रम में नए विषय शामिल करने को कहा है।
बीएसएफ ने गिनाईं ढांचागत खामियां :
बीएसएफ ने भी हाईकोर्ट को बताया कि अभी भी ढांचागत खामियां हैं, इस पर केंद्र सरकार के असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल चेतन मित्तल ने कहा कि बीएसएफ की रिपोर्ट पर सीमा पर काम चल रहा है और तीन महीने में बीएसएफ के सुझाए से सभी कार्यों को मुकम्मल कर लिया जाएगा।
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जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने यह सुझाव दिया है कि नशामुक्ति केंद्रों की निगरान अथॉरिटी में निजी क्षेत्र की भागीदारी से निगरानी और बेहतर ढंग से हो सकेगी। मामले की अगली सुनवाई के लिए चार मई की तिथि तय की गई है। अदालत ने अगली सुनवाई पर सरकारों से अथॉरिटी का मसौदा पेश करने को कहा है। मसौदे में सरकारों को बताना होगा कि अथॉरिटी में कौन-कौन होंगे, कितना स्टाफ होगा और इसके लिए फंड कहां से आएंगे।
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हरियाणा और यूटी की ओर से कोई ठोस जवाब नहीं आया, लेकिन पंजाब सरकार की ओर से पेश हुईं एडिशनल एडवोकेट जनरल रीता कोहली ने बेंच को बताया कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में पहले से बोर्ड बना हुआ है, लेकिन बेंच ने नए सिरे से अथॉरिटी गठित करने को कहा है। पंजाब की ओर से यह भी बताया गया है कि नशामुक्ति केंद्रों की निगरानी के लिए फिरोजपुर, अमृतसर, फरीदकोट और बठिंडा में जिलास्तरीय कमेटियां गठित कर ली गई हैं। जल्द ही अन्य जिलों में भी ऐसी ही कमेटियां बना ली जाएंगी।
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नशा छुड़ाने में मदद का विकल्प तलाशने को भी बने कमेटी
हाईकोर्ट ने एक ऐसी कमेटी गठित करने का भी निर्देश दिया है, जो नशे के लिए इस्तेमाल हो रहीं दवाओं के विकल्प के तौर पर ऐसी दवाएं ढूंढने का काम करे, जो नशे की लत छुड़ाने में कारगर साबित हों। ड्रग्स तस्करी पर पंजाब सरकार ने बताया है कि हाईकोर्ट के आदेश पर शुरू की गई 181 हेल्पलाइन पर आई शिकायतों के माध्यम से पिछले साल 86 और इस वर्ष अब तक 16 एफआईआर दर्ज हुई हैं। वहीं हरियाणा सरकार ने बताया कि पंचकूला में दो एफआईआर दर्ज की गईं। वहीं 17 सप्लायर्स की पहचान की गई है। छात्रों को नशे के कुप्रभाव से जागरूक करने के लिए हाईकोर्ट ने पुरानी व्यवस्था बदलकर पाठ्यक्रम में नए विषय शामिल करने को कहा है।
बीएसएफ ने गिनाईं ढांचागत खामियां :
बीएसएफ ने भी हाईकोर्ट को बताया कि अभी भी ढांचागत खामियां हैं, इस पर केंद्र सरकार के असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल चेतन मित्तल ने कहा कि बीएसएफ की रिपोर्ट पर सीमा पर काम चल रहा है और तीन महीने में बीएसएफ के सुझाए से सभी कार्यों को मुकम्मल कर लिया जाएगा।