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Hindi News ›   Chandigarh ›   Drougt hits 30% of peddy in Kaithal

जिले की 30 % फसल पर सूखे की मार

Sun, 14 Sep 2014 11:38 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला कैथ्ाल
ब्यूरो/अमर उजाला कैथ्ाल Updated Sun, 14 Sep 2014 11:38 PM IST
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कैथल/कलायत। केंद्र के विभिन्न विभागों की संयुक्त टीम ने रविवार को जिले में सूखे से हुए नुकसान का आंकलन किया। टीम में शामिल अधिकारियों ने खेतों में जाकर किसानों से बातचीत की तथा उनसे सूखे की कमी एवं अब बरसात से हुए नकसान पर जानकारी ली। किसानों ने बताया कि एक मोटे अनुमान के अनुसार, पूरे जिले में सूखे से 30 प्रतिशत से लेकर 40 प्रतिशत तक फसलों को नुकसान हुआ है।
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 कहीं पर यह 50 प्रतिशत से ज्यादा है तो कहीं 10 से 20 प्रतिशत है। टीम में शामिल अधिकारियाें ने कहा कि वे केंद्र सरकार को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।
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कपास, ज्वार और बाजार पर ज्यादा मार
टीम में शामिल केंद्रीय वित्त मंत्रालय से राय बहादुर कौल व प्रदेश के हरियाणा बीज निगम के एमडी बीएस दुग्गल ने पिंजुपुरा, कलायत, बात्ता, बालू, कैलरम, प्यौदा गांवों के खेतों में जाकर नुकसान का आकलन किया व किसानों से बात की। किसानों ने बताया कि इस बार 65 प्रतिशत बरसात कम होने के कारण धान, कपास, बाजरा, ज्वार की फसलें बिल्कुल बर्बाद हो गई हैं।
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गांव पिंजुपुरा के सरपंच किसान बलवंत ने बताया कि बरसात न होने से डीजल, इंजनों से नलकूपों को लगातार चलाने से डीजल के खर्च में कई गुणा बढ़ोतरी हुई है, जिससे किसान की आर्थिक हालत पर असर पड़ा है। सितंबर में अब बरसात होने से रही-सही कपास की फसल भी चौपट हो गई है।

मछली पालन पर भी असर

गांव बड़सीकरी के मछली पालक किसान कुलदीप ने कहा कि पानी की कमी के कारण जिस मछली का वजन 600 ग्राम होना था, वह केवल 100 ग्राम रह गया। किसान रामपाल का कहना था कि जून, जुलाई में धान के पौधे फुटाव लेते हैं पर उस समय बरसात न होने व नहरों में पानी न आने के कारण पौधे का विकास नहीं हुआ। जिस कारण किसानों को अपनी फसल अपने हाथों ही नष्ट करनी पड़ी। ांव पिंजुपुरा के ही किसान सुलतान सिंह ने केन्द्रीय टीम को धान की फसल के सूखे हुए पौधे मौके पर दिखाए, जिनमें दाना न आने से नुकसान हुआ है।

केंद्र को देंगे रिपोर्ट : मलिक

केन्द्रीय टीम के प्रतिनिधि डा. डीपी मलिक ने बताया कि हरियाणा सरकार ने प्रदेश को सूखाग्रस्त घोषित किया है तथा केन्द्र सरकार से मुआवजे की मांग की है। उन्होंने कहा केन्द्रीय टीम प्रदेश के उन जिलों का दौरा करके मौके पर फसलाें के नुकसान का आकलन कर रही है। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश से सूखे का आकलन करने के बाद वे केंद्र में अपनी रिपोर्ट देंगे।

कहां कितना नुकसान

उप कृषि अधिकारी डा. रोहताश ने केंद्रीय टीम को बताया कि इस बार एक लाख 56 हजार हेक्टेयर में धान तथा 13 हजार हेेक्टेयर में कपास की बिजाई की गई है। लेकिन बरसात के कमी के कारण अधिकतर फसलों को नुकसान होने से किसान आर्थिक संकट से जूझ रहा है। पिंजुपूरा गांव की 50 हेक्टेयर, कलायत की 500 हेक्टेयर तथा बात्ता गांव की 400 हेक्टेयर फसल को नुकसान पहुंचा है।

ये है बरसात की स्थिति

प्रदेश में जून में 43 प्रतिशत कम बरसात हुई थी, जो जुलाई में बढ़कर 57 प्रतिशत हो गई। लोगों व मौसम विभाग को अगस्त में बरसात की उम्मीद थी, पर इस दौरान कमी बढ़कर 66 प्रतिशत हो गई। कैथल में जून में 95 एमएम और जलुाई में 118 एमएम बारिश हुई थी। पूरा अगस्त सूखा गुजरा और केवल महीने के आखिर दिन 27 एमएम बारिश हुई थी। इस दौरान फसल को काफी नुकसान पहुंचा।


ये थे टीम में
केन्द्रीय टीम में फसल विभाग के अतिरिक्त आयुक्त डा. डीपी मलिक, कृषि योजना के वरिष्ठ अनुसंधान अधिकारी डा. रामानंद, बिजली मंत्रालय में वरिष्ठ केन्द्रीय इलेक्ट्रिकल अधिकारी एके राजपूत, वरिष्ठ सांख्यिकी अधिकारी वित्त मंत्रालय आरबी कौल, सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अवर सचिव असीत हल्दर के अतिरिक्त हरियाणा सरकार के हरियाणा बीज विकास निगम के प्रबंध निदेशक डा. बीएस दुग्गल, कृषि विभाग के अपर निदेशक डा. जगदीप बराड़ शामिल थे। प्रदेश में टीम रोहतक, महम, हांसी, तोशाम, भिवानी, नरवाना, सिवानी, हिसार, बरवाला का दौरा करने के बाद कैथल के विभिन्न क्षेत्रों में फसलों का जायजा ले रही है।
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