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उड़ान से पहले सपने ध्वस्त, नहीं जा पाए विदेश
अमर उजाला मोहाली
Updated Thu, 09 Jan 2014 01:41 AM IST
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बुधवार की सुबह बड़ी संख्या में लोग मटौर पुलिस थाने के बाहर पहुंचे। इनके साथ विदेश जाने के लिए पैक किया हुआ सामान था। थाने के बाहर बारात जैसा माहौल बना था। इन लोगों ने बताया कि सेक्टर-70 स्थित डब्ल्यू टीएस इमीग्रेशन सर्विसेज ने उनसे लाखों रुपये विदेश भेजने के नाम पर लिए थे।
उन्हें कहा गया था कि सात जनवरी को अमृतसर एयरपोर्ट से दोपहर सवा दो बजे उनकी फ्लाइट है। एयरपोर्ट पर ही उन्हें उनके वीजा और संबंधित दस्तावेज मिल जाएंगे। कंपनी के अधिकारी एयरपोर्ट पर ही मिलेंगे। वे टाइम से एयरपोर्ट पर पहुंच गए। लेकिन वहां पर न तो कोई कंपनी का अधिकारी आया न मुलाजिम। तब उन्हें महसूस हुआ कि वह ठगे गए हैं।
सेक्टर-70 में लोगों को कथित तौर पर विदेश भेजने वाली डब्ल्यू टीएस इमीग्रेशन सर्विसेज कंपनी का कार्यालय है। ठगे गए लोग बुधवार को कंपनी के कार्यालय के कार्यालय पर आए। वहां ताला लटका मिला। कंपनी संचालकों के फोन भी बंद थे, वे भूमिगत हैं।
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फिर वह थाना मटौर और बाद में एसएसपी से जाकर मिले। एसएसपी ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिया। फिर वह थाना प्रभारी से मिले देर शाम थाना मटौर में कंपनी के मालिक हरजीत सिंह बाजवा उर्फ मनजीत सिंह बाजवा उसकी पाटर्नर अमनप्रीत कौर गिल के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है।
विदेश जाने का सपना संजोए लोगों ने बताया कि कंपनी का कोई अधिकारी अमृतसर एयरपोर्ट पर नहीं मिला। कंपनी संचालकों के फोन भी बंद हो गए। इसी बीच उनकी फ्लाइट भी चली गई। फिर उन्हें संदेह हुआ कि उनके साथ धोखा हुआ है, वे ठगे गए हैं। इसके बाद वह बुधवार सुबह कंपनी के सेक्टर-70 स्थित ऑफिस पहुंचे। वहां ताला लगा मिला।
आसपास पता किया तो जानकारी हुई कि यहां किसी को कुछ पता नहीं है। ठगी के शिकार लोगों ने बताया कि यह ठगी करोड़ों रुपये की है। उनके इस ग्रुप में चालीस लोग शामिल थे। इनमें से प्रत्येक से विदेश भेजने के नाम पर लाखों रुपये लिए गए हैं। थाना मटौर के एसएचओ एनपीएस लहल ने पर्चा दर्ज करने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि ठगी कितने की हुई यह बताना अभी मुश्किल है। लेकिन ठगी लाखों में हैं।
ऐसे बनाते थे लोगों को शिकार
लोगों ने बताया कि कंपनी वालों ने बड़ी चालाकी से उनको अपना शिकार बनाया। कंपनी वालों ने जुलाई-2013 में विभिन्न अखबारों में विज्ञापन निकाला था। कई देशों में कुशल मुलाजिमों की जरूरत है। इसमें ड्राइवर से लेकर माली, वेटर, सिक्योरिटी गार्ड तक के पद शामिल हैं। इसमें कुछ देश तो ऐसे हैं, जहां पर आइलट्स या अन्य योग्यताएं भी जरूरी नहीं है। उन्हें विदेश जाना आसान लगा और वह कंपनी के झांसे में आ गए। पीड़ितों ने बताया कि कंपनी के लोग एक-एक औपचारिकता पूरी करने के बाद पैसे लेते थे। ऐसे में लोगों को उन पर कभी संदेह नहीं हुआ।
चंडीगढ़ में कराते थे मेडिकल
पटियाला निवासी तरसेम सिंह ने बताया कि यह लोग चंडीगढ़ के सेक्टर-35 में एक जगह मेडिकल कराते थे। उसके बाद मेडिकल की फीस ली जाती थी। इस दौरान लोगों को अपनी गाड़ियों में भेजते थे। साथ ही लोगों को हर तरह का सहयोग देते थे। उन्हें कभी लगा ही नहीं कि उनके साथ इतनी बड़ी गेम होने जा रही है।
वीजा की फोटोकॉपी देते चेक कराने को
होशियारपुर निवासी अरुण चौधरी ने बताया कि उसका सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी के लिए साउथ अफ्रीका का वीजा लगाया था। कंपनी वालों ने उन्हें वीजा कॉपी का प्रिंट एवं टिकट का प्रिंट दिया था। उस दौरान कहा गया था कि वे किसी माहिर से अपनी तसल्ली के लिए चेक करवा लें। उन्होंने बताया कि उन्होंने कई लोगों से चेक भी कराया। सभी ने उसे सही बताया था।
इन देशों का लगाया था वीजा
कंपनी ने अधिकतर लोगों का वीजा हॉलैंड, साउथ अफ्रीका, न्यूजीलैंड, ग्रीनलैंड एवं सिंगापुर समेत कई देशों का लगाया था। कुछ लोगों को ऑस्ट्रेलिया एवं कनाडा के नाम पर भी लूटा गया है।
कर्ज लेकर बाहर जाने का सपना पाला था
अमृतसर के सोनू शर्मा ने बताया कि उन्होंने कर्ज लेकर बाहर जाने की योजना बनाई थी। लेकिन अब न तो वह बाहर जा पाए हैं और न ही उनके पासपोर्ट एवं पैसे का पता है। यहीं हाल खन्ना के दीपक शर्मा का है। उन्होंने बताया कि उनकी उम्र 40 के करीब है। उनकी दो बेटियां हैं। सोचा था कि बाहर जाकर कुछ पैसा कमा कर ले आउंगा। लेकिन अब उनकी पूरी हिम्मत ही टूट गई है। उन्होंने बताया कि सारा परिवार डिप्रेशन में आ गया है।
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उन्हें कहा गया था कि सात जनवरी को अमृतसर एयरपोर्ट से दोपहर सवा दो बजे उनकी फ्लाइट है। एयरपोर्ट पर ही उन्हें उनके वीजा और संबंधित दस्तावेज मिल जाएंगे। कंपनी के अधिकारी एयरपोर्ट पर ही मिलेंगे। वे टाइम से एयरपोर्ट पर पहुंच गए। लेकिन वहां पर न तो कोई कंपनी का अधिकारी आया न मुलाजिम। तब उन्हें महसूस हुआ कि वह ठगे गए हैं।
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सेक्टर-70 में लोगों को कथित तौर पर विदेश भेजने वाली डब्ल्यू टीएस इमीग्रेशन सर्विसेज कंपनी का कार्यालय है। ठगे गए लोग बुधवार को कंपनी के कार्यालय के कार्यालय पर आए। वहां ताला लटका मिला। कंपनी संचालकों के फोन भी बंद थे, वे भूमिगत हैं।
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फिर वह थाना मटौर और बाद में एसएसपी से जाकर मिले। एसएसपी ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिया। फिर वह थाना प्रभारी से मिले देर शाम थाना मटौर में कंपनी के मालिक हरजीत सिंह बाजवा उर्फ मनजीत सिंह बाजवा उसकी पाटर्नर अमनप्रीत कौर गिल के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है।
विदेश जाने का सपना संजोए लोगों ने बताया कि कंपनी का कोई अधिकारी अमृतसर एयरपोर्ट पर नहीं मिला। कंपनी संचालकों के फोन भी बंद हो गए। इसी बीच उनकी फ्लाइट भी चली गई। फिर उन्हें संदेह हुआ कि उनके साथ धोखा हुआ है, वे ठगे गए हैं। इसके बाद वह बुधवार सुबह कंपनी के सेक्टर-70 स्थित ऑफिस पहुंचे। वहां ताला लगा मिला।
आसपास पता किया तो जानकारी हुई कि यहां किसी को कुछ पता नहीं है। ठगी के शिकार लोगों ने बताया कि यह ठगी करोड़ों रुपये की है। उनके इस ग्रुप में चालीस लोग शामिल थे। इनमें से प्रत्येक से विदेश भेजने के नाम पर लाखों रुपये लिए गए हैं। थाना मटौर के एसएचओ एनपीएस लहल ने पर्चा दर्ज करने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि ठगी कितने की हुई यह बताना अभी मुश्किल है। लेकिन ठगी लाखों में हैं।
ऐसे बनाते थे लोगों को शिकार
लोगों ने बताया कि कंपनी वालों ने बड़ी चालाकी से उनको अपना शिकार बनाया। कंपनी वालों ने जुलाई-2013 में विभिन्न अखबारों में विज्ञापन निकाला था। कई देशों में कुशल मुलाजिमों की जरूरत है। इसमें ड्राइवर से लेकर माली, वेटर, सिक्योरिटी गार्ड तक के पद शामिल हैं। इसमें कुछ देश तो ऐसे हैं, जहां पर आइलट्स या अन्य योग्यताएं भी जरूरी नहीं है। उन्हें विदेश जाना आसान लगा और वह कंपनी के झांसे में आ गए। पीड़ितों ने बताया कि कंपनी के लोग एक-एक औपचारिकता पूरी करने के बाद पैसे लेते थे। ऐसे में लोगों को उन पर कभी संदेह नहीं हुआ।
चंडीगढ़ में कराते थे मेडिकल
पटियाला निवासी तरसेम सिंह ने बताया कि यह लोग चंडीगढ़ के सेक्टर-35 में एक जगह मेडिकल कराते थे। उसके बाद मेडिकल की फीस ली जाती थी। इस दौरान लोगों को अपनी गाड़ियों में भेजते थे। साथ ही लोगों को हर तरह का सहयोग देते थे। उन्हें कभी लगा ही नहीं कि उनके साथ इतनी बड़ी गेम होने जा रही है।
वीजा की फोटोकॉपी देते चेक कराने को
होशियारपुर निवासी अरुण चौधरी ने बताया कि उसका सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी के लिए साउथ अफ्रीका का वीजा लगाया था। कंपनी वालों ने उन्हें वीजा कॉपी का प्रिंट एवं टिकट का प्रिंट दिया था। उस दौरान कहा गया था कि वे किसी माहिर से अपनी तसल्ली के लिए चेक करवा लें। उन्होंने बताया कि उन्होंने कई लोगों से चेक भी कराया। सभी ने उसे सही बताया था।
इन देशों का लगाया था वीजा
कंपनी ने अधिकतर लोगों का वीजा हॉलैंड, साउथ अफ्रीका, न्यूजीलैंड, ग्रीनलैंड एवं सिंगापुर समेत कई देशों का लगाया था। कुछ लोगों को ऑस्ट्रेलिया एवं कनाडा के नाम पर भी लूटा गया है।
कर्ज लेकर बाहर जाने का सपना पाला था
अमृतसर के सोनू शर्मा ने बताया कि उन्होंने कर्ज लेकर बाहर जाने की योजना बनाई थी। लेकिन अब न तो वह बाहर जा पाए हैं और न ही उनके पासपोर्ट एवं पैसे का पता है। यहीं हाल खन्ना के दीपक शर्मा का है। उन्होंने बताया कि उनकी उम्र 40 के करीब है। उनकी दो बेटियां हैं। सोचा था कि बाहर जाकर कुछ पैसा कमा कर ले आउंगा। लेकिन अब उनकी पूरी हिम्मत ही टूट गई है। उन्होंने बताया कि सारा परिवार डिप्रेशन में आ गया है।