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दर्शकों को झकझौर गई ‘मरण ही महानवमी’
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 19 Nov 2013 12:12 PM IST
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शिव देश संचार थियेटर की ओर से सोमवार को टैगोर थियेटर में ‘मरण ही महानवमी’ नाटक का मंचन किया गया।
नाटक के जरिये कलाकारों ने समाज में जाति भेदभाव को समाप्त करने का संदेश दिया। नाटक में एक महामंत्री ने समाज में फैली जातपात की बुराई की परवाह किए बगैर अपनी बेटी का विवाह एक जूते बनाने वाले के बेटे के साथ कर दिया।
इस अपराध में उसे और उसके परिवार को मृत्युदंड मिल जाता है। नाटकों में कलाकारों का अभिनय देखते ही बन रहा था। सभी कलाकारों ने अपन अभिनय से दर्शकों पर एक अमिट छाप छोड़ी।
नाटक की शुरूआत में एक नीची जाति के लड़के को जूते पहनकर चलने की बड़ी ही बेरहम सजा मिलती है। उसे डंडों से पिटवाया जाता है।
इस दृश्य ने दर्शकों को झकझोर दिया। कहानी में दिखाया है कि राज्य के महामंत्री मधुवरस की बेटी नीला को जूते बनाने वाले हरलय्या के बेटे शीलवंत के साथ प्रेम हो जाता है।
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मधुवरस ने अपनी बेटी का विवाह शील से करवा दिया। इस बात को लेकर हर ओर मधुवरस का विरोध हुआ और दरबारियों ने राजा बिज्जल को भड़का दिया।
महामंत्री मधुवरस ने अपना पद त्याग दिया और राज्य भी छोड़ दिया। नया महामंत्री मंचण्णा धर्मद्रोह के अपराध में मधुवरस और हरलय्या के परिवार को मृत्युदंड देता है।
सिद्धांत, सत्य और हक के लिए वे सभी मृत्युदंड को भी स्वीकार कर लेते हैं। केजी कृष्णामृर्ति के निर्देशन में कलाकारों ने शानदार अभिनय किया। शीलवंत का किरदार साइफुल्ला और नीला का किरदार गीता ने निभाया।
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नाटक के जरिये कलाकारों ने समाज में जाति भेदभाव को समाप्त करने का संदेश दिया। नाटक में एक महामंत्री ने समाज में फैली जातपात की बुराई की परवाह किए बगैर अपनी बेटी का विवाह एक जूते बनाने वाले के बेटे के साथ कर दिया।
इस अपराध में उसे और उसके परिवार को मृत्युदंड मिल जाता है। नाटकों में कलाकारों का अभिनय देखते ही बन रहा था। सभी कलाकारों ने अपन अभिनय से दर्शकों पर एक अमिट छाप छोड़ी।
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नाटक की शुरूआत में एक नीची जाति के लड़के को जूते पहनकर चलने की बड़ी ही बेरहम सजा मिलती है। उसे डंडों से पिटवाया जाता है।
इस दृश्य ने दर्शकों को झकझोर दिया। कहानी में दिखाया है कि राज्य के महामंत्री मधुवरस की बेटी नीला को जूते बनाने वाले हरलय्या के बेटे शीलवंत के साथ प्रेम हो जाता है।
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मधुवरस ने अपनी बेटी का विवाह शील से करवा दिया। इस बात को लेकर हर ओर मधुवरस का विरोध हुआ और दरबारियों ने राजा बिज्जल को भड़का दिया।
महामंत्री मधुवरस ने अपना पद त्याग दिया और राज्य भी छोड़ दिया। नया महामंत्री मंचण्णा धर्मद्रोह के अपराध में मधुवरस और हरलय्या के परिवार को मृत्युदंड देता है।
सिद्धांत, सत्य और हक के लिए वे सभी मृत्युदंड को भी स्वीकार कर लेते हैं। केजी कृष्णामृर्ति के निर्देशन में कलाकारों ने शानदार अभिनय किया। शीलवंत का किरदार साइफुल्ला और नीला का किरदार गीता ने निभाया।