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चंडीगढ़: डॉ. राजेंद्र सिंह गांव-गांव जगा रहे कीटनाशक स्प्रे छोड़ने की अलख, प्रदेश के 1600 युवाओं को दे चुके प्रशिक्षण

Mon, 11 Oct 2021 02:21 AM IST
Trainee Trainee न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Trainee Trainee Updated Mon, 11 Oct 2021 02:21 AM IST
सार

डॉ. राजेंद्र सिंह का कहना है कि हर साल कीटनाशकों के प्रयोग के दौरान दवा चढ़ने से कई किसानों की जान चली जाती है या दवा चढ़ने के बाद अगर कोई बच जाता है तो उसको कई अन्य बीमारियां घेर लेती हैं। इस वजह से पहला प्रयास तो यही किया जाता है कि स्प्रे न करें और करें तो कम से कम।

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Dr. Rajendra Singh telling farmers and youth the disadvantages of pesticides
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

फसलों पर लगातार बढ़ रहे कीटनाशक दवाओं के प्रयोग को कम करने और अप्रशिक्षित युवाओं की जिंदगी बचाने के लिए कृषि विभाग से सेवानिवृत्त डॉ. राजेंद्र सिंह अलख जगा रहे हैं। वे गांव-गांव जाकर किसानों और युवाओं को कीटनाशकों के नुकसान बताकर जागरूक कर रहे हैं। पांच साल में उनकी सलाह पर काफी युवा स्प्रे करना बंद कर चुके हैं। वहीं, 1600 युवाओं को स्प्रे का प्रशिक्षण भी दे चुके हैं।
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हरियाणा विज्ञान मंच से जुड़े डॉ. राजेंद्र सिंह का कहना है कि हर साल कीटनाशकों के प्रयोग के दौरान दवा चढ़ने से कई किसानों की जान चली जाती है या दवा चढ़ने के बाद अगर कोई बच जाता है तो उसको कई अन्य बीमारियां घेर लेती हैं। इस वजह से पहला प्रयास तो यही किया जाता है कि स्प्रे न करें और करें तो कम से कम। अगर जरूरत पड़े तो सुरक्षित तरीके से यह कार्य करें। इन्हीं कारण उन युवाओं को प्रशिक्षण भी दिया जाता है, जो इसे प्रोफेशनली कर रहे हैं। दस्ताने, मास्क समेत अन्य किट भी उनको मुहैया कराई जाती है। 
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स्प्रे के दौरान मौत पर नहीं मिलती आर्थिक मदद
गांवों में स्प्रे के प्रयोग के दौरान न तो कोई सावधानी बरती जाती है और न ही हादसे के दौरान ऐसे युवाओं को कोई आर्थिक मदद मिलती है। अगर स्प्रे करते समय किसी व्यक्ति की जान चली जाती है तो कोई आर्थिक मदद नहीं मिलती है। ऐसे में यह कार्य काफी खतरनाक होता है। 


अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पिछड़ रहा चावल
अधिक कीटनाशक डालने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय बासमती चावल पिछड़ रहा है। अन्य देश बिना रसायन और कीटनाशक का चावल पैदा कर रहे हैं, उसकी मांग अधिक है। अब भारतीय चावल निर्यातक भी जैविक या फिर बिना कीटनाशक चावल पर जोर दे रहे हैं। ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्र्ट्स एसोसिएशन खुद इस काम के लिए आगे आ चुकी है। एसोसिएशन के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय सेतिया किसानों को जागरूक करने के लिए वैज्ञानिकों के साथ कई सेमिनार करा चुके हैं। विजय सेतिया का कहना है कि कीटनाशक स्प्रे बंद करके हमें फिर से जैविक खेती पर आना होगी। अब इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है।
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