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इस डॉक्टर को अमेरिका में इंटरनेशनल अवार्ड
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 23 Dec 2013 02:01 PM IST
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आंख की कार्नियल पर छेद होने से कई बार लोगों की रोशनी चली जाती है। पीजीआई के पूर्व एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अशोक शर्मा ने अपने शोध के माध्यम से बताया कि कार्निया ग्लू तकनीक का प्रयोग कर आंखों की रोशनी को बचाया जा सकता है।
कार्निया में संक्रमण से होने वाला छेद यदि ग्लू से ठीक न हो तो उसे कैरोटो प्लास्टी से भरा जाता है। उसके बाद कार्निया की ग्राफ्टिंग की जाती है। इससे मरीज की आंखों की रोशनी को वापस लाया जा सकता है।
यह शोध उन्होंने 317 मरीजों पर किया था। शोध पेपर प्रस्तुत करने पर अकेडमी की ओर से उन्हें अमरेकिन अकेडमी एचीवमेंट अवार्ड 2013 से सम्मानित किया गया है।
इसके अलावा उन्हें इंटरनेशनल आर्थलमोलॉजिस्ट एजुकेशन अवार्ड से नवाजा गया। वे हाल ही में अमेरिकन अकेडमी ऑफ नेत्र साइंस यूएसए में अपना शोध पेपर पेशकर चंडीगढ़ लौटे है।
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डॉ. अशोक शर्मा फिलहाल चंडीगढ़ में अपना कार्निया सेंटर चला रहे हैं। वे आर्थिक रूप से कमजोर मरीज की भी मदद करते हैं।
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कार्निया में संक्रमण से होने वाला छेद यदि ग्लू से ठीक न हो तो उसे कैरोटो प्लास्टी से भरा जाता है। उसके बाद कार्निया की ग्राफ्टिंग की जाती है। इससे मरीज की आंखों की रोशनी को वापस लाया जा सकता है।
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यह शोध उन्होंने 317 मरीजों पर किया था। शोध पेपर प्रस्तुत करने पर अकेडमी की ओर से उन्हें अमरेकिन अकेडमी एचीवमेंट अवार्ड 2013 से सम्मानित किया गया है।
इसके अलावा उन्हें इंटरनेशनल आर्थलमोलॉजिस्ट एजुकेशन अवार्ड से नवाजा गया। वे हाल ही में अमेरिकन अकेडमी ऑफ नेत्र साइंस यूएसए में अपना शोध पेपर पेशकर चंडीगढ़ लौटे है।
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डॉ. अशोक शर्मा फिलहाल चंडीगढ़ में अपना कार्निया सेंटर चला रहे हैं। वे आर्थिक रूप से कमजोर मरीज की भी मदद करते हैं।