सियासी दलों को चंदे पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश तलब
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आयकर की धारा 13-ए के तहत राजनीतिक पार्टियां किसी से भी 20 हजार तक का दान ले सकती हैं, जिसका रिकार्ड अनिवार्य नहीं हैं। इसके खिलाफ पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल करते हुए राजनीतिक दलों को यह लाभ देने पर रोक लगाने की अपील की गई थी।
मामले पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने वीरवार को हाईकोर्ट को बताया कि मामले में सुप्रीम कोर्ट एक याचिका को पहले ही खारिज कर चुका हैं, इसलिए इस याचिका को भी खारिज किया जाए।
इस जवाब पर हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया कि वह मामले की अगली सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की कापी पेश करे। इसी के साथ ही सुनवाई 22 फरवरी तक स्थगित कर दी गई।
'केंद्र अगली सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट की जजमेंट पेश करे'
एचसी अरोड़ा ने अपनी याचिका में बताया कि आयकर की धारा 13 ए के तहत राजनीतिक पार्टियां किसी से भी 20 हजार तक का दान ले सकती है, इसमें सबसे बड़ी चीज यह है कि इस दान का उनको कोई रिकार्ड भी रखने की जरूरत नहीं है।
20 हजार तक का दान देने वालों की सूची भी राजनैतिक दलों द्वारा दिखाना अनिवार्य नहीं है। यह भी कहा कि जनप्रतिनिधित्व एक्ट के तहत आयकर की धारा 13 ए में राजनैतिक दलों को दी गई यह छूट, वास्तव में कानून के खिलाफ है।
राजनैतिक दल छूट का दुरुपयोग करती हैं और गलत तरीके से लिए गए फंड को 20 हजार से कम बताकर उसका हिसाब देने से बच जाती हैं।
एडीआर द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार दलों ने साल 2014- 2015 में अपने कुल चंदे का 51 से ज्यादा फंड 20 हजार से कम की राशि में एकत्र करने की जानकारी दी थी।