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Chandigarh News: डॉक्टरों ने टेंट में चलाई ओपीडी, 200 मरीज देखे, रक्तदान कर न्याय मांगा
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चंडीगढ़। कोलकाता घटना के विरोध में हड़ताल पर चल रहे पीजीआई के रेजिडेंट डॉक्टरों ने भार्गव सभागार के बाहर लगे टेंट में सुबह आठ से शाम पांच बजे तक ओपीडी चलाकर मरीजों को देखा। इस दौरान डॉक्टरों ने रक्तदान कर न्याय की मांग की। पहले दिन मंगलवार को 45 मरीज देखे गए थे, जबकि दूसरे दिन बुधवार को 200 मरीजों को परामर्श दिया गया।
पीजीआई रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन का कहना है कि टेंट की ओपीडी में देखे गए मरीजों को फॉलोअप में प्राथमिकता दी जाएगी क्योंकि उन्होंने प्रॉपर तरीके से उनकी जांच कर एसोसिएशन की ओर से जारी पर्ची पर पूरी हिस्ट्री लिखी है। यह फैसला इसलिए लेना पड़ा क्योंकि हड़ताल के चलते पीजीआई में इलाज के लिए आ रहे हजारों नए मरीजों को निराश लौटना पड़ रहा है। बता दें कि पीजीआई के रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल 10वें दिन जारी रही।
वार्ड होने लगे खाली
लगातार 10 दिनों से नए मरीजों का इलाज बंद होने से पीजीआई के वार्ड खाली होने लगे हैं क्योंकि ओपीडी के माध्यम से एक भी मरीज भर्ती नहीं किया जा रहे हैं। वहीं, वार्ड में भर्ती मरीज को फैकल्टी और नर्सिंग ऑफिसर की देखरेख में रखा गया है, जबकि रेजिडेंट डॉक्टर हड़ताल से पहले की तरह ट्रॉमा और इमरजेंसी में रोस्टर के अनुसार लगातार ड्यूटी दे रहे हैं।
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जीएमसीएच में आ रहे मरीजों का हाल बेहाल
जीएमसीएच-32 के रेजिडेंट डॉक्टरों की भी हड़ताल जारी है। मेडिकल कॉलेज फैकल्टी ने दूसरे दिन भी सिर्फ फॉलोअप के मरीज को ही ओपीडी में देखा। इससे बिना सूचना इलाज के लिए आए सैकड़ों मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ा। जीएमसीएच 32 अस्पताल प्रशासन ने कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों की ओपीडी के मरीजों का पीजीआई की ही तर्ज पर कीमो और इलाज से जुड़ी अन्य प्रक्रियाएं जारी रखी हैं।
बॉक्स
रक्तदान के साथ किया जागरूक भी
पीजीआई के रेजिडेंट डॉक्टरों ने बुधवार को रक्तदान शिविर भी लगाया। इसमें रेजिडेंट समेत 80 लोगों ने रक्तदान किया। वहीं, शाम को एलांते मॉल में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के साथ मिलकर फ्लैश मॉब का आयोजन किया गया। इसमें रेजिडेंट डॉक्टरों ने नुक्कड़ नाटक, कविता और अन्य जागरूकता के माध्यमों से लोगों को घटना की जानकारी देने के साथ न्याय के लिए चल रहे प्रदर्शन से जोड़ने का प्रयास किया।
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पीजीआई रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन का कहना है कि टेंट की ओपीडी में देखे गए मरीजों को फॉलोअप में प्राथमिकता दी जाएगी क्योंकि उन्होंने प्रॉपर तरीके से उनकी जांच कर एसोसिएशन की ओर से जारी पर्ची पर पूरी हिस्ट्री लिखी है। यह फैसला इसलिए लेना पड़ा क्योंकि हड़ताल के चलते पीजीआई में इलाज के लिए आ रहे हजारों नए मरीजों को निराश लौटना पड़ रहा है। बता दें कि पीजीआई के रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल 10वें दिन जारी रही।
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वार्ड होने लगे खाली
लगातार 10 दिनों से नए मरीजों का इलाज बंद होने से पीजीआई के वार्ड खाली होने लगे हैं क्योंकि ओपीडी के माध्यम से एक भी मरीज भर्ती नहीं किया जा रहे हैं। वहीं, वार्ड में भर्ती मरीज को फैकल्टी और नर्सिंग ऑफिसर की देखरेख में रखा गया है, जबकि रेजिडेंट डॉक्टर हड़ताल से पहले की तरह ट्रॉमा और इमरजेंसी में रोस्टर के अनुसार लगातार ड्यूटी दे रहे हैं।
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जीएमसीएच में आ रहे मरीजों का हाल बेहाल
जीएमसीएच-32 के रेजिडेंट डॉक्टरों की भी हड़ताल जारी है। मेडिकल कॉलेज फैकल्टी ने दूसरे दिन भी सिर्फ फॉलोअप के मरीज को ही ओपीडी में देखा। इससे बिना सूचना इलाज के लिए आए सैकड़ों मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ा। जीएमसीएच 32 अस्पताल प्रशासन ने कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों की ओपीडी के मरीजों का पीजीआई की ही तर्ज पर कीमो और इलाज से जुड़ी अन्य प्रक्रियाएं जारी रखी हैं।
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रक्तदान के साथ किया जागरूक भी
पीजीआई के रेजिडेंट डॉक्टरों ने बुधवार को रक्तदान शिविर भी लगाया। इसमें रेजिडेंट समेत 80 लोगों ने रक्तदान किया। वहीं, शाम को एलांते मॉल में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के साथ मिलकर फ्लैश मॉब का आयोजन किया गया। इसमें रेजिडेंट डॉक्टरों ने नुक्कड़ नाटक, कविता और अन्य जागरूकता के माध्यमों से लोगों को घटना की जानकारी देने के साथ न्याय के लिए चल रहे प्रदर्शन से जोड़ने का प्रयास किया।