एनपीए में कटौती का विरोध: पठानकोट और लुधियाना में डॉक्टरों की हड़ताल, बिना इलाज लौटे मरीज, ओपीडी सेवाएं ठप
बठिंडा में छठे वेतन आयोग के विरोध में डॉक्टरों ने वित्त मंत्री मनप्रीत बादल के कार्यालय तक रोष मार्च निकाला। इस दौरान कार्यालय में मौजूद कांग्रेस के जिला अध्यक्ष अरुण बधावन को मांग पत्र सौंपा गया।
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ज्वाइंट गवर्नमेंट डॉक्टर्स कोऑर्डिनेशन कमेटी के आह्वान पर सोमवार को लुधियाना के सरकारी अस्पतालों व डिस्पेंसरियों में दिन भर ओपीडी सेवाएं ठप रहीं। इस दौरान इमरजेंसी सेवाएं ही बहाल रखी गई। पठानकोट में 50 से अधिक सरकारी डॉक्टर सोमवार सुबह आठ बजे ही हड़ताल पर बैठ गए।
इस दौरान सिविल अस्पताल में सिर्फ आपातकालीन सेवाएं, कोविड सैंपलिंग व कोरोना टीकाकरण जारी रहा। इसके अलावा बाकी कामकाज पूरी तरह ठप रहा। ओपीडी बंद होने के कारण दूर-दराज से आने वाले लोगों को परेशान होना पड़ा।
बता दें कि मांगें पूरी न होने तक यूआइडीएआई और आयुष्मान भारत योजना का काम भी बंद करने की घोषणा की गई है। जिला प्रधान डॉ. सुनील चांद, फाइनेंस सेक्रेटरी डॉ. पुनीत गिल और प्रेस सचिव डॉ. साक्षी ने कहा कि 26 जून को हड़ताल के बावजूद सरकार ने डॉक्टरों को अनसुना कर दिया।
इस मसले पर किसी मंत्री या अधिकारी ने प्रतिक्रिया नहीं दी। हड़ताल में डीआइओ दरबार, सुनील चंद, जिला एपिडिमोलॉजिस्ट डॉ. साक्षी, डॉ. माधवी, डॉ. मदनमट्टू, डॉ. मनिंदरजीत, डॉ. शैरिन, डॉ. अभय गर्ग और डॉ. विश्व बंधू मौजूद रहे।
ये हैं डॉक्टरों की मांगें
- एनपीए 33 प्रतिशत किया जाए
- एनपीए को बेसिक तनख्वाह का हिस्सा माना जाए
- पेंशन की राशि फिक्स की जाए
- कोरोना काल में काम करने वाले डॉक्टरों को विशेष भत्ता दिया जाए
रोज होती हैं 400 ओपीडी
डॉक्टरों की हड़ताल के कारण सोमवार को ओपीडी शून्य रही है। बता दें कि रोज अस्पताल में 400 के करीब ओपीडी होती हैं। सोमवार को स्टाफ ने पर्चियां काटनी बंद कर दीं और काउंटर पर ताला जड़ दिया।
मरीज बोले- हमारी क्या गलती
गांधी नगर निवासी 78 वर्षीय उमा रानी का कहना है कि डॉक्टर धरने पर बैठ गए हैं। इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि वह ऑर्थो सर्जन से जांच करवाने आई थीं लेकिन उन्हें बिना इलाज लौटना पड़ा।
जालंधर में भी प्रदर्शन
जालंधर ईएसआई अस्पताल में डॉक्टरों ने प्रदर्शन किया। डॉ. वीरेंद्र रियाड़ और डॉ. मुकेश वर्मा ने कहा कि डॉक्टरों की एनपीए में कटौती की वापस करने की जायज मांग है। कोरोना काल में सरकार को वेतन बढ़ाना चाहिए था लेकिन एनपीए में ही पांच फीसदी कटौती कर दी गई है।