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डॉक्टर डे स्पेशल: पंजाब में क्या हैं MBBS डॉक्टरों के हाल, एक रिपोर्ट
अखिल तलवार/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 01 Jul 2016 01:37 AM IST
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रिपोर्ट
- फोटो : getty images
एमबीबीएस जैसा प्रतिष्ठित कोर्स करने के बाद भी पंजाब में सरकारी नौकरी करने वाले डॉक्टरों की हालत दयनीय है। उनका वेतन सिर्फ 15,600 रुपये है। उसमें से भी ईपीएफ कटने के बाद उनके हाथ में हर महीने सिर्फ 13,920 रुपये ही आते हैं।
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पंजाब सरकार ने 2015 में नियुक्तियों से पहले नियमों में बदलाव किया था। इसके तहत अब नई नियुक्तियों वाले लोगों को दो साल तक सिर्फ बेसिक-पे पर ही काम करना पड़ता है। एमबीबीएस पास करने वाले डॉक्टरों की बेसिक-पे सिर्फ 15,600 रुपये है और वे इसी पर काम करने को मजबूर हैं। सरकार ने साल 2015 में 404 और 2016 में तीन सौ डॉक्टर भरती किए थे, लेकिन कम वेतन केचलते करीब सौ डॉक्टर अब तक नौकरी छोड़ चुके हैं। डॉक्टर लंबे समय से आंदोलन भी कर रहे हैं। हाल ही में 13-18 जून तक उन्होंने हड़ताल कर दी थी, पर सरकार ने भी अड़ियल रवैया अख्तियार कर लिया।
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सेहतमंत्री सुरजीत ज्याणी ने डॉक्टरों को चेतावनी दे दी कि अगर वे काम पर नहीं लौटेंगे तो उनकी सेवाएं समाप्त कर दी जाएंगी। इसके बाद मजबूरी में डॉक्टरों को काम पर लौटना पड़ा। 2015 में नियुक्त डॉ. विश्वदीप राना कहते हैं कि एमबीबीएस की पढ़ाई में दूसरे कोर्सेज से ज्यादा सात साल लगते हैं। पूरी पढ़ाई पर उनके करीब 25 लाख रुपये खर्च हो गए। उन्हें इतने कम वेतन में काम करना पड़ रहा है।
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इतना ही नहीं, इसी वेतन में डॉक्टरों को कोर्ट ड्यूटी आदि भी करनी पड़ती है। सातवें पे-कमीशन ने किसी के लिए भी 18 हजार न्यूनतम वेतन की सिफारिश की है। डॉ. राना ने कहा कि बहुत से ऐसे डॉक्टर हैं जिन्हें तीन, चार और छह महीने से वेतन नहीं मिला है। संगरूर के डॉक्टरों ने हड़ताल इसलिए शुरू की थी कि उन्हें कई महीने से वेतन नहीं मिला था। इतने कम वेतन में अकेले व्यक्ति का गुजारा मुश्किल है, विवाहित लोगों का तो बहुत बुरा हाल है।
लुधियाना में बनाएंगे ह्यूमन-चेन
पीसीएमएस एसोसिएशन के महासचिव डॉ. गगनदीप शेरगिल ने कहा कि एमबीबीएस डॉक्टरों के वेतन को लेकर लगातार संघर्ष चल रहा है। मोगा में मेगा कांफ्रेंस की गई, जालंधर में मार्च निकाला गया। अब 10 या 11 जुलाई को लुधियाना में ह्यूमन-चेन बनाने की योजना है। इस मुद्दे पर क्लर्क, टीचर और अन्य वर्गों को भी साथ लिया जा रहा है, क्योंकि बेसिक-पे पर काम करने की शर्त सभी के लिए है।