स्वस्थ महसूस कर रहे हैं तब भी 40 की उम्र में जरूर करवाएं हृदय की जांच
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क्रिकेटर कपिल देव, कोरियोग्राफर रेमो डिसूजा और बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली के बीच दो बातें सामान्य हैं। तीनों ही ऐसी फील्ड से जुड़े हैं, जो फिटनेस के लिए जानी जाती है। दूसरा, हाल के दिनों में तीनों को हार्ट अटैक आया है। सवाल है कि तीनों फिट थे तो उन्हें हार्टअटैक क्यों आया।
विशेषज्ञ बताते हैं कि यह ट्रेंड बहुत चिंताजनक है। इसका मतलब है कि ये लोग शारीरिक तौर पर तो फिट हैं, लेकिन अंदरूनी तौर पर बीमार रहे होंगे। हृदय संबंधी लक्षणों की अनदेखी की होगी। सौरव गांगुली के बारे में कहा जा रहा है कि उनकी फैमिली हिस्ट्री रही है। उनके परिवार में पहले भी कम उम्र में हार्टअटैक आते रहे हैं। यदि ऐसा था तो प्रोटोकॉल कहता है कि उनको हर साल हृदय संबंधी जांच समय-समय पर करवानी चाहिए थी।
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चंडीगढ़ के जाने-माने हृदय विशेषज्ञ डा. एचके बाली ने कहा कि पश्चिम देशों के मुकाबले सार्क देशों (भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश व अन्य देश) में हृदय संबंधी बीमारियां दस से 15 साल पहले देखी जाती हैं। हार्टअटैक के 50 फीसदी मामले 50 वर्ष से कम उम्र के होते हैं। दूसरा हृदय रोगों के लिए लोग फिक्रमंद नहीं होते। लक्षण आते हैं, लेकिन उनकी अनदेखी कर दी जाती है। तनाव होने के बावजूद वे तनाव को नहीं मानते। सबसे अहम बात यह है कि 70 फीसदी तक धमनियां जब ब्लॉक होती हैं तब भी उसके लक्षण नहीं आते। इसके लिए यही सलाह बार-बार दी जाती रही है कि जिन लोगों में खतरा ज्यादा रहता है तो उन्हें एक बार जांच जरूर करवा देनी चाहिए।
हार्ट स्पेशलिस्ट डॉ. तरनदीप सिंह ने भी कहा कि कई सारी स्टडीज इस बात को बता चुकी हैं कि पश्चिमी देशों के मुकाबले भारतीयों में हृदय की बीमारियां जल्दी होती हैं। दूसरा पिछले दस से 15 सालों में लोगों के बीच अपने काम के प्रति प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है। देर रात तक लोग जागते हैं। खाने पीने में परहेज नहीं रखते। इससे हृदय की बीमारियां बढ़ी हैं। दूसरा हृदय से जुड़ी बीमारियों का पता न लगाने की समस्या बहुत गंभीर मुद्दा है। लोग हार्ट संबंधी रिस्क फैक्टर जैसे कि डायबिटीज, बीपी होने के बावजूद डॉक्टर से परामर्श करने में कतराते हैं।
हार्टअटैक न हो, इसके लिए रखें इन बातों का ध्यान
- यदि डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, तनाव है या हार्ट अटैक की फैमिली हिस्ट्री है तो नियमित हार्ट की जांच करवाएं
- यदि कोई लक्षण नहीं है, तब भी 40 साल की उम्र के बाद साल में एक बार जांच जरूरी है
- रात में कम से कम आठ घंटे की नींद लेनी जरूरी है। नींद का टूटना खतरा बढ़ाता है
- 45 या उससे अधिक उम्र में यदि कोई एक्सरसाइज कर रहे हैं तो किसी ट्रेनर की देखरेख में करें
- सीने में दर्द हो इसकी अनदेखी नहीं करनी चाहिए। कार्डियोलाजिस्ट को जरूर दिखाएं
- डाइट अच्छी होनी चाहिए। बाहर के खाने पर निर्भरता कम रखें
- शारीरिक एक्सरसाइज के साथ योग व मेडिटेशन भी करें
यह बहुत ही चिंताजनक ट्रेंड है। भारत के लोग हृदय रोग को गंभीरता से नहीं लेते हैं। यदि किसी की फैमिली हिस्ट्री है तो उसे 35 साल की उम्र में हर साल जांच करवानी चाहिए। - डॉ. एचके बाली, चेयरमैन कार्डियक साइंसेज पारस हॉस्पिटल पंचकूला
हृदय की बीमारियों के प्रति लोगों में जागरूकता की काफी कमी है। फिट रहने के साथ तनाव रहित माहौल में काम करना जरूरी है। हर भारतीय को 40 साल की उम्र के बाद साल में एक बार हार्ट की जांच जरूर करवानी चाहिए। - डॉ. तरनदीप सिंह, कार्डियोलाजिस्ट, एडल्ट एंड चाइल्ड हार्ट स्पेशलिस्ट हीलिंग हॉस्पिटल चंडीगढ़