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डॉक्टरों की सलाह, खतरा टला नहीं... समय न गवाएं, जल्द से जल्द टीका लगवाएं
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चंडीगढ़। देश के अन्य जगहों की ही तरह शहर में भी कोरोना का संक्रमण दर बढ़ने लगा है। इसके बावजूद लोग अब भी संक्रमण से बचाव को लेकर अनदेखी कर रहे हैं। कोरोना टीकाकरण अभियान की सफलता के लिए किये जा रहे जागरुकता के प्रयास काफी हद तक सफल साबित हो रहे हैं। जागरुकता का ही असर है जो चंद दिनों में टीकाकरण का स्तर 25 से बढ़कर 65 प्रतिशत पर आ पहुंचा है। विशेषज्ञों का कहना है कि बचे हुए लक्ष्य को भी बिना देरी पूरा कर लेना चाहिए। क्योंकि महामारी का चक्र कभी तेज हो जाए किसी को पता नहीं। ऐसे में जरूरी है कि अपने पूरे परिवार को टीके के सुरक्षा घेरे में ला दिया जाए।
टीके को लेकर गलत विचार न लाएं, जल्द से लगवाएं
पीजीआई ने महामारी के इस दौर में हजारों गंभीर मरीजों की जान बचाई है। संक्रमण की गंभीरता को हमने बेहद करीब से देखा है। यहां मरीजों का इलाज तो हुआ ही साथ ही बचाव के लिए तैयार किए गए टीके का सफल ट्रायल भी किया गया। इसलिए मैं तो बस यही कहूंगा कि टीके को लेकर कोई मन में गलत विचार न लाएं। जितनी जल्दी हो सभी को टीके की सुरक्षा कवच में लाने का प्रयास करें, तभी कोरोना जैसे महामारी पर काबू मिल पाएगा। जिनके मन में टीके को लेकर किसी भी तरह का सवाल है उन्हें एक बात समझनी होगी कि विज्ञान के इस दौर में कही-सुनी बातों की बजाय सत्यापित तथ्यों पर विश्वास करना चाहिए।
-प्रो. विपिन कौशल, चिकित्सा अधीक्षक पीजीआई
टीका लगवाएं, परिवार की जान जोखिम में न डालें
महामारी से बचाव के लिए व्यक्तिगत प्रयासों के साथ ही टीकाकरण बेहद जरूरी है। टीके की प्रतिरक्षा प्रणाली संक्रमण की गंभीरता को काबू करने में कारगर है। टीके कारण ही संक्रमित होने के बावजूद अब स्थिति ज्यादा गंभीर नहीं हो रही। तीसरी लहर इसका उदाहरण है, क्योंकि उसमें संक्रमण दर बहुत तेज था लेकिन 90 प्रतिशत से ज्यादा मरीज एसिम्टोमैटिक थे। अगर इसके बावजूद लोग अब भी टीके को लेकर गंभीर नहीं हैं तो वे जानबूझकर अपनी और अपने परिवार की जान जोखिम में डालने का काम कर रहे हैं।
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-प्रो. वीके नागपाल, चिकित्सा अधीक्षक, जीएमएसएच-16
खतरा टला नहीं, 12-14 साल के बच्चों का टीकाकरण करवाएं
अन्य अस्पतालों की ही तरह जीएमसीएच-32 में भी बच्चों के लिए टीकाकरण केंद्र का संचालन किया जा रहा है। 12-14 साल के बच्चों का टीकाकरण अभी लक्ष्य से दूर है। मेरी अपील है कि इस लक्ष्य को जल्द से जल्द पूरा करने में शहर के प्रत्येक अभिभावक प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का सहयोग करें जिससे लक्ष्य को पूरा करने में ज्यादा मशक्कत न करनी पड़े। एक बात ठीक से समझनी होगी कि कोरोना टीकाकरण अभियान संक्रमण के खतरे को देखते हुए विश्वभर में चलाया जा रहा है। इसे लेकर मन में कोई भ्रम पालने की गलती न करें।
-डॉ. सुधीर गर्ग, चिकित्सा अधीक्षक जीएमसीएच-32
अभिभावक और बच्चों से आग्रह है टीके के महत्व को समझें
बच्चों के टीकाकरण की सफलता के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ शिक्षा विभाग की टीम भी जुटी हुई है। जब तक निर्धारित लक्ष्य में शामिल एक-एक बच्चा टीके की सुरक्षा कवच नहीं प्राप्त कर लेता तब तक हमारा प्रयास अधूरा है। इसलिए अभिभावकों और बच्चों से आग्रह है कि वे डर और भ्रम को दरकिनार कर के टीके के महत्व को समझे। महामारी का खतरा अब भी बरकरार है। सुरक्षा को लेकर की गई अनदेखी कभी भी गंभीर हालात का कारण बन सकती है। इसलिए प्रयास कीजिए कि समझदारी से एकजुट होकर इस महामारी पर जीत दर्ज करने का प्रयास किया जाए।
-डॉ. मंजीत सिंह, राज्य टीकाकरण अधिकारी
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टीके को लेकर गलत विचार न लाएं, जल्द से लगवाएं
पीजीआई ने महामारी के इस दौर में हजारों गंभीर मरीजों की जान बचाई है। संक्रमण की गंभीरता को हमने बेहद करीब से देखा है। यहां मरीजों का इलाज तो हुआ ही साथ ही बचाव के लिए तैयार किए गए टीके का सफल ट्रायल भी किया गया। इसलिए मैं तो बस यही कहूंगा कि टीके को लेकर कोई मन में गलत विचार न लाएं। जितनी जल्दी हो सभी को टीके की सुरक्षा कवच में लाने का प्रयास करें, तभी कोरोना जैसे महामारी पर काबू मिल पाएगा। जिनके मन में टीके को लेकर किसी भी तरह का सवाल है उन्हें एक बात समझनी होगी कि विज्ञान के इस दौर में कही-सुनी बातों की बजाय सत्यापित तथ्यों पर विश्वास करना चाहिए।
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-प्रो. विपिन कौशल, चिकित्सा अधीक्षक पीजीआई
टीका लगवाएं, परिवार की जान जोखिम में न डालें
महामारी से बचाव के लिए व्यक्तिगत प्रयासों के साथ ही टीकाकरण बेहद जरूरी है। टीके की प्रतिरक्षा प्रणाली संक्रमण की गंभीरता को काबू करने में कारगर है। टीके कारण ही संक्रमित होने के बावजूद अब स्थिति ज्यादा गंभीर नहीं हो रही। तीसरी लहर इसका उदाहरण है, क्योंकि उसमें संक्रमण दर बहुत तेज था लेकिन 90 प्रतिशत से ज्यादा मरीज एसिम्टोमैटिक थे। अगर इसके बावजूद लोग अब भी टीके को लेकर गंभीर नहीं हैं तो वे जानबूझकर अपनी और अपने परिवार की जान जोखिम में डालने का काम कर रहे हैं।
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-प्रो. वीके नागपाल, चिकित्सा अधीक्षक, जीएमएसएच-16
खतरा टला नहीं, 12-14 साल के बच्चों का टीकाकरण करवाएं
अन्य अस्पतालों की ही तरह जीएमसीएच-32 में भी बच्चों के लिए टीकाकरण केंद्र का संचालन किया जा रहा है। 12-14 साल के बच्चों का टीकाकरण अभी लक्ष्य से दूर है। मेरी अपील है कि इस लक्ष्य को जल्द से जल्द पूरा करने में शहर के प्रत्येक अभिभावक प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का सहयोग करें जिससे लक्ष्य को पूरा करने में ज्यादा मशक्कत न करनी पड़े। एक बात ठीक से समझनी होगी कि कोरोना टीकाकरण अभियान संक्रमण के खतरे को देखते हुए विश्वभर में चलाया जा रहा है। इसे लेकर मन में कोई भ्रम पालने की गलती न करें।
-डॉ. सुधीर गर्ग, चिकित्सा अधीक्षक जीएमसीएच-32
अभिभावक और बच्चों से आग्रह है टीके के महत्व को समझें
बच्चों के टीकाकरण की सफलता के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ शिक्षा विभाग की टीम भी जुटी हुई है। जब तक निर्धारित लक्ष्य में शामिल एक-एक बच्चा टीके की सुरक्षा कवच नहीं प्राप्त कर लेता तब तक हमारा प्रयास अधूरा है। इसलिए अभिभावकों और बच्चों से आग्रह है कि वे डर और भ्रम को दरकिनार कर के टीके के महत्व को समझे। महामारी का खतरा अब भी बरकरार है। सुरक्षा को लेकर की गई अनदेखी कभी भी गंभीर हालात का कारण बन सकती है। इसलिए प्रयास कीजिए कि समझदारी से एकजुट होकर इस महामारी पर जीत दर्ज करने का प्रयास किया जाए।
-डॉ. मंजीत सिंह, राज्य टीकाकरण अधिकारी