बड़े उद्योगपति नहीं चाहते, यहां से मिले बिजली
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हरियाणा के 200 से ज्यादा बड़े औद्योगिक घरानों को प्रदेश की बिजली नहीं चाहिए। वे दूसरे राज्यों की बिजली खरीद रहे हैं। इससे हरियाणा की बिजली कंपनियों को नुकसान हो रहा है।
नतीजतन हरियाणा सरकार ने इन औद्योगिक घरानों के बाहर से बिजली खरीदने पर रोक लगा दी है। हरियाणा ने सर्दी के मौसम में जो बिजली मध्य प्रदेश को उधार दी थी ताकि उसे गर्मियों में वापस लिया जा सके। वह भी इसलिए वापस नहीं मिल रही है क्योंकि बिजली की लाइनों पर ज्यादा लोड है।
हरियाणा के इन औद्योगिक घरानों का आरोप है कि हरियाणा की बिजली उन्हें पीक लोड के समय 11 रुपये प्रति यूनिट पड़ती है जबकि बाहर से उन्हें 4 रुपये प्रति यूनिट बिजली मिल रही है।
सरकार ने इस पर रोक लगाकर उनका काफी नुकसान कर दिया है। हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम के अनुसार, एक मेगावाट लोड से ज्यादा वाले औद्योगिक घराने पिछले एक साल से लगातार बाहर से बिजली खरीद रहे हैं। पिछले छह महीने से उनकी बाहरी बिजली की खपत बढ़ती जा रही है। हर रोज करीब 400 मेगावाट बिजली बाहर से खरीदी जा रही है। इससे हरियाणा में बिजली की डिमांड कम हो रही है और हरियाणा के अपने बिजली प्लांटों के यूनिट बंद करने पड़ रहे हैं।
काम निगमों का, आदेश सरकार ने पारित कर दिया
बिजली देने या न देने का काम हरियाणा की बिजली कंपनियों का है। लेकिन बाहरी राज्यों से बिजली खरीदने पर रोक हरियाणा सरकार ने लगाई है इसलिए मामला पेचीदा हो गया है।
जिन कंपनियों पर बाहर से बिजली खरीदने पर रोक लगाई है उनमें से एक ने हरियाणा बिजली नियामक आयोग के पास याचिका दायर कर दी है। आयोग ने इस पर अंतरिम सुनवाई की और फाइनल सुनवाई 27 मई को करने का फैसला किया है। आयोग ने आदेश पारित कर दिया कि 27 मई तक हरियाणा सरकार के उस आदेश पर रोक रहेगी, जिसमें बाहरी बिजली खरीदने पर रोक लगाई गई है।
बाहर से बिजली खरीदने पर रोक
कोट
प्रदेश सरकार ने बाहर से बिजली खरीदने पर रोक लगा दी है। सरकार को यह आदेश पारित करने का अधिकार इलेक्ट्रिसिटी एक्ट में मिला हुआ है। हरियाणा की बिजली उद्योगपतियों को औसतन 8 रुपये प्रति यूनिट पड़ती है जबकि बाहर की बिजली करीब चार रुपये पड़ती है। लेकिन उद्योगपति बाहरी बिजली उस समय खरीदते हैं जब उन्हें जरूरत होती है।
यह शार्ट टर्म खरीद है। अगर उन्हें बाहर से बिजली खरीदनी भी है तो लंबी अवधि के लिए खरीदें। उनके बाहर से बिजली खरीदने के कारण हमारे अपने प्लांटों की यूनिटें बंद करनी पड़ रही हैं। करीब दो सौ औद्योगिक घराने 400 मेगावाट बिजली खरीदते हैं। चूंकि वे बाहर से बिजली खरीद रहे हैं इसलिए ट्रांसमिशन लाइनों पर ज्यादा लोड है। इस चक्कर में हम अपनी उधार में दी गई बिजली मध्य प्रदेश से वापस नहीं ले पा रहे हैं जबकि हमें इस समय जरूरत है।
अनुराग अग्रवाल, प्रबंध निदेशक, हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम