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आशुतोष महाराज के अंतिम संस्कार पर रोक जारी, सरकार ने ये दलीलें दी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 17 Sep 2016 04:29 PM IST
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दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के आशुतोष महाराज
- फोटो : फाइल फोटो
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नूरमहल स्थित दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के प्रमुख आशुतोष महाराज के अंतिम संस्कार पर रोक जारी है। शुक्रवार को हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट से समय दिए जाने की मांग की।
वहीं, जस्टिस महेश ग्रोवर और जस्टिस शेखर धवन की खंडपीठ ने सुनवाई 9 नवंबर तय कर दी। पंजाब सरकार और दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के प्रतिनिधियों के बीच आठ बार हुई बैठकों के बाद भी आशुतोष महाराज की समाधि को लेकर विवाद बरकरार है।
अभी भी संस्थान के सदस्यों की दलील है कि महाराज मृत नहीं बल्कि समाधि में है। अगर कोई भी कदम उठाया गया तो इससे उनके अनुयायियों की भावनाएं आहत होंगी। शुक्रवार को हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान पहले हुई आठ बैठकों का ब्यौरा भी सौंप दिया गया। हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई नौ नवंबर के लिए स्थगित कर दी है।
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वहीं, जस्टिस महेश ग्रोवर और जस्टिस शेखर धवन की खंडपीठ ने सुनवाई 9 नवंबर तय कर दी। पंजाब सरकार और दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के प्रतिनिधियों के बीच आठ बार हुई बैठकों के बाद भी आशुतोष महाराज की समाधि को लेकर विवाद बरकरार है।
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अभी भी संस्थान के सदस्यों की दलील है कि महाराज मृत नहीं बल्कि समाधि में है। अगर कोई भी कदम उठाया गया तो इससे उनके अनुयायियों की भावनाएं आहत होंगी। शुक्रवार को हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान पहले हुई आठ बैठकों का ब्यौरा भी सौंप दिया गया। हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई नौ नवंबर के लिए स्थगित कर दी है।
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पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट से मांगा थोड़ा समय
आशुतोष महाराज
- फोटो : file photo
पंजाब सरकार ने शुक्रवार को पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट को ये जानकारियां देने सहित पहले हुई आठ बैठकों से संबंधित रिपोर्ट भी सौंप दी है। पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट को सुनवाई के दौरान बताया कि पहले इस संबंध में हुई बैठकों के बाद यह मामला मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च डिपार्टमेंट को भेज दिया गया था।
विभाग से यह भी जानकारी मांगी गई कि शरीर को क्लीनिकली डेड घोषित किए जाने के बाद भी क्या शरीर को कृत्रिम तौर पर रेफ्रिजरेशन के जरिये संरक्षित रखा जा सकता है। इसके लिए उचित प्रक्रिया क्या है, क्या संरक्षण की इस प्रक्रिया का जन स्वास्थ्य या पर्यावरण को कोई संकट पैदा हो सकता है या नहीं।
सरकार ने बताया कि विभाग ने इन सवालों के जवाब हालिया रिपोर्ट में 12 सितंबर को ही सौंप दी है, जिसका अध्ययन किया जा रहा है। सरकार ने इस मामले के अध्ययन के लिए हाईकोर्ट से थोड़ा और वक्त मांगा है।
विभाग से यह भी जानकारी मांगी गई कि शरीर को क्लीनिकली डेड घोषित किए जाने के बाद भी क्या शरीर को कृत्रिम तौर पर रेफ्रिजरेशन के जरिये संरक्षित रखा जा सकता है। इसके लिए उचित प्रक्रिया क्या है, क्या संरक्षण की इस प्रक्रिया का जन स्वास्थ्य या पर्यावरण को कोई संकट पैदा हो सकता है या नहीं।
सरकार ने बताया कि विभाग ने इन सवालों के जवाब हालिया रिपोर्ट में 12 सितंबर को ही सौंप दी है, जिसका अध्ययन किया जा रहा है। सरकार ने इस मामले के अध्ययन के लिए हाईकोर्ट से थोड़ा और वक्त मांगा है।