आशुतोष महाराज जीवित या मृत, सवाल कायम
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दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के प्रमुख आशुतोष महाराज का पोस्टमार्टम होगा या नहीं? यह अब एक सवाल बन गया है। इसके साथ ही आशुतोष महाराज की मौत के मामले में एक नया मोड़ आ गया है।
संस्थान नूरमहल के प्रमुख महेश कुमार झा उर्फ आशुतोष महाराज के शव का पोस्टर्माटम होगा या नहीं, इसका फैसला कोर्ट ने सुरक्षित कर लिया है। इस मामले में कई महीने से सुनवाई चल रही है। बुधवार को सभी पक्षों की लंबी बहस हुई।
आशुतोष महाराज के ड्राइवर होने का दावा करने वाले पूर्ण सिंह के वकील सीनियर एडवोकेट आरएस बैंस ने पैरवी के दौरान कहा कि किसी व्यक्ति की मौत पर यदि कोई भी व्यक्ति आशंका जताते हुए आपराधिक याचिका दायर करता है, तो उसकी मौत की जांच जरूरी है।
दूसरी ओर राज्य सरकार और दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के वकीलों ने पूरा जोर इस बात पर दिया कि पूर्ण सिंह के पास याचिका दायर करने का अधिकार ही नहीं है।
याचिका में जहर देने की आशंका
सीनियर एडवोकेट आरएस बैंस ने बेंच को बताया कि आशुतोष महाराज की मौत के बाद परिस्थितियों को संदिग्ध बना दिया गया। किसी भी व्यक्ति को शव के पास नहीं जाने दिया जा रहा। इतना ही नहीं, जिन डॉक्टरों ने उन्हें क्लीनिकली डेड घोषित किया था, वे हार्ट स्पेशलिस्ट नहीं थे। डॉक्टरों को संस्थान में दिल के रोग की वजह से बुलाया गया था।
बैंस ने दलील दी कि सरकार ने अपनी जांच के आधार पर यही कहा है कि किसी ने भी विपरीत ब्यान नहीं दिया। जबकि, आशंका जाहिर करने पर डॉक्टरी जांच यानी पोस्टमार्टम करवाना चाहिए था। याचिका में आशुतोष महाराज को कोई विषैला पदार्थ देने की आशंका जाहिर की गई थी।
दिलीप की याचिका पर भी हुई बहस
कोर्ट में दलीप झा के शव मांगने पर भी बहस हुई। दलीप को आशुतोष महाराज का बेटा साबित करने के लिए एडवोकेट एसपी सोही ने एक पत्र पेश किया।
दावा किया गया कि यह पत्र आशुतोष महाराज ने वर्ष 1999 में दलीप को भेजा था। इसमें बताया गया था कि वह अब महेश कुमार झा की बजाय आशुतोष महाराज कहलाने लगे हैं।
इस पत्र पर बेंच ने संदेह प्रकट किया। इससे पहले रंजना देवी और दलीप के मामा शीतल झा के शपथ पत्रों पर भी संस्थान के वकीलों ने आपत्ति जताई। कहा कि शपथ पत्रों के मुताबिक इन दोनों की उम्र संदेह के घेरे में है।
सोही ने फिलहाल इतना कहा कि दलीप बेटा होने के नाते अपने पिता का शव हासिल करना चाहता है, ताकि वह अंतिम संस्कार अपने रीति के अनुसार कर सके। सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट के जस्टिस एमएमएस बेदी की एकल बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।
डॉक्टरों के मुताबिक आशुतोष महाराज मृत
याचिकाकर्ता पूर्ण सिंह ने हाईकोर्ट से कहा था कि शव अधिक देर तक नहीं रखा जा सकता। इसके विपरीत डेरे के पैरोकार मानते हैं कि आशुतोष महाराज समाधि में हैं।
इस मामले में पंजाब सरकार मान चुकी है कि डॉक्टरों की राय में आशुतोष महाराज मृत हैं। पूर्ण सिंह ने याचिका में आशंका जताई थी कि डेरे की संपत्ति हड़पने के लिए कुछ अनुयायी आशुतोष महाराज की हत्या कर सकते हैं।
उसने पोस्टमार्टम से मौत के कारणों का पता लगाने की मांग भी की थी। उल्लेखनीय है कि आशुतोष महाराज का शरीर 28 जनवरी रात पौने दो बजे से डेरे में रखा हुआ है। अनुयायियों का मानना है कि महाराज समाधि में हैं और कभी भी समाधि से बाहर आ सकते हैं।