फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   distance becomes wider between army officers and soldiers

सेना के अफसरों व जवानों के बीच खाई बढ़ी

Mon, 28 Oct 2013 01:44 PM IST
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 28 Oct 2013 01:44 PM IST
विज्ञापन
distance becomes wider between army officers and soldiers
पिछले दिनों सेना के अफसरों और जवानों के बीच जन्मे विवाद एकाएक नहीं, बल्कि बहुत दिनों से दोनों के बीच पल-पल बढ़ रहे तनाव का खामियाजा है।
विज्ञापन


सेना के अफसर तनाव को भांप नहीं पाए और छोटी-छोटी बाते विवाद को जन्म दे गईं।

जांच के नाम पर रिपोर्ट तो आ जाती है, लेकिन झगड़े रोकने के तरीकों पर बात नहीं होती। इससे सेना की साख तो गिरी है, साथ ही जवानों पर भी इसका विपरीत प्रभाव पड़ता है।

चंडीगढ़ निवासी एवं रिटायर्ड कर्नल सीजेएस खैरा का जवानों के साथ काफी लंबा अनुभव रहा है। वे सीमा पर तैनात यूनिट पर भी तैनात रहे हैं। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने बताया कि ये सभी विवाद मैनेजमेंट की कमी के कारण हो रहे हैं।
विज्ञापन


कई ऐसे फैक्टर हैं, जिन्हें जल्द से जल्द बदलने की जरूरत है। यदि इन फैक्टर पर जल्द ही काम नहीं किया गया तो आगे भी ऐसे विवाद होतेे रहेंगे।

1. अफसरों की कमी होना: सेना में करीब 12 हजार अफसरों की कमी है। इनमें लेफ्टिनेट, कैप्टन और मेजर के पद शामिल है। जिस बटालियन व रेजिमेंट में 25-30 अफसर होने चाहिए थे वहां पर इस समय 10-12 ही अफसर हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


इनमें से भी आधे ट्रेनिंग पर रहते हैं या फिर विभिन्न कोर्स पर। ऐसे में अफसरों पर काम का दबाव ज्यादा है।


2. जेसीओ का रोल: अफसर व सेना के बीच जूनियर कमीशन अफसर (जेसीओ) अहम रोल निभाते थे। अफसर जेसीओ के माध्यम से जवानों से बात करते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है।


जेसीओ की भूमिका खत्म होती जा रही है। अब वे अपनी जिम्मेदारी से बच रहे हैं। उन्हें एक्टिवेट करने की जरूरत है।

3. स्टेट पुलिस नहीं भी सुनती:
हर दूसरे जवान के घर में कोई न कोई दिक्कत रहती है। यदि मामला पुलिस से जुड़ा होता तो एक चिट्टी पर ही काम हो जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होता।

पुलिस व भूमि से जुड़े मामलों में उन्हें बार-बार चक्कर काटना पड़ रहा है। इससे वे तनाव में आ गए हैं।

4. जवानों की बैरक में नहीं रहते अफसर: पहले जब भी कोई नया अफसर आता था तो उसे दो महीने तक जवानों की बैरक में रहना पड़ता था। इससे वे जवानों की भावनाओं को अच्छी तरह से समझते थे, लेकिन अब शायद किसी यूनिट में कोई अफसर जवानों की बैरक में रुकता होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed