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खेमका के खिलाफ दायर अर्जी खारिज
अमर उजाला ब्यूरो, पंचकूला
Updated Wed, 19 Feb 2014 01:10 AM IST
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नारायणगढ़ निवासी एक व्यक्ति द्वारा आईएएस अशोक खेमका के खिलाफ दायर अर्जी को पंचकूला के सिविल जज (जूनियर डिविजन) ने खारिज कर दिया।
इसमें उसने अपने पिता को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। खेमका पर लगे आरोपों के पक्ष में अभियोजन पक्ष कोई सबूत नहीं पेश नहीं कर सका।
अर्जी में नारायणगढ़ निवासी जसवंत पोसवाल के बेटे नितिन ने अशोक खेमका के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की थी।
साथ ही जसवंत की पत्नी ने भी अशोक खेमका पर उसके पति को बगैर कारण नोटिस देकर नौकरी से निकालने और जसवंत को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया था।
पांच वर्ष पहले जब खेमका हरियाणा हाउसिंग बोर्ड के मुख्य प्रशासक के तौर पर तैनात थे, तभी उन्होंने जसवंत सिंह को बगैर कारण बताओ नोटिस जारी किए नौकरी से निकाल दिया था।
नितिन ने आरोप लगाया था कि इसके बाद से जसवंत घर छोड़कर कहीं चले गए। उसके पिता अक्सर मानसिक दबाव के कारणों का जिक्र करते हुए कहते थे कि अब वह जिंदा नहीं बचेंगे।
नितिन के मुताबिक, 16 फरवरी 2007 को उसके पिता अचानक कहीं चले गए। परिजनों ने आरोप लगाया था कि खेमका की वजह से हाउसिंग बोर्ड दफ्तर में बतौर लिपिक तैनात जसवंत ने आत्महत्या कर ली।
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जसवंत यूनियन के नेता थे, जिस वजह से अक्सर कर्मियों की शिकायतें लेकर जाते थे। इसी रंजिश में उन्हें नौकरी से निकालने का आरोप लगाया गया था।
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इसमें उसने अपने पिता को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। खेमका पर लगे आरोपों के पक्ष में अभियोजन पक्ष कोई सबूत नहीं पेश नहीं कर सका।
अर्जी में नारायणगढ़ निवासी जसवंत पोसवाल के बेटे नितिन ने अशोक खेमका के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की थी।
साथ ही जसवंत की पत्नी ने भी अशोक खेमका पर उसके पति को बगैर कारण नोटिस देकर नौकरी से निकालने और जसवंत को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया था।
पांच वर्ष पहले जब खेमका हरियाणा हाउसिंग बोर्ड के मुख्य प्रशासक के तौर पर तैनात थे, तभी उन्होंने जसवंत सिंह को बगैर कारण बताओ नोटिस जारी किए नौकरी से निकाल दिया था।
नितिन ने आरोप लगाया था कि इसके बाद से जसवंत घर छोड़कर कहीं चले गए। उसके पिता अक्सर मानसिक दबाव के कारणों का जिक्र करते हुए कहते थे कि अब वह जिंदा नहीं बचेंगे।
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नितिन के मुताबिक, 16 फरवरी 2007 को उसके पिता अचानक कहीं चले गए। परिजनों ने आरोप लगाया था कि खेमका की वजह से हाउसिंग बोर्ड दफ्तर में बतौर लिपिक तैनात जसवंत ने आत्महत्या कर ली।
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जसवंत यूनियन के नेता थे, जिस वजह से अक्सर कर्मियों की शिकायतें लेकर जाते थे। इसी रंजिश में उन्हें नौकरी से निकालने का आरोप लगाया गया था।