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चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव: मनोनीत पार्षदों के लिए शुरू हुई जोड़तोड़, पार्टी पदाधिकारियों के पास लगा रहे जुगत 

Mon, 27 Dec 2021 10:24 AM IST
निवेदिता वर्मा नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 27 Dec 2021 10:24 AM IST
सार

मनोनीत पार्षद चुने जाने के लिए लोगों को प्रशासन के पास आवेदन करना होता है। इसके बाद यूटी के प्रशासक इन आवेदनों में से मनोनीत पार्षदों का चुनाव करते हैं। मनोनीत पार्षदों के चुनाव के लिए सबसे ज्यादा सत्ताधीन पार्टी का हस्तक्षेप रहता है।

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Discussion on Names of Nominated Councilors began in Chandigarh Municipal Corporation 
चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंडीगढ़ निगम चुनाव के लिए सोमवार को मतगणना के बाद जो पार्टी सत्ता में आएगी, मनोनीत पार्षदों को चुनने में उसकी भूमिका अहम होगी। शहर के व्यापारी, समाजसेवी से लेकर निगम के सदन में प्रवेश करने वाले लोगों ने प्रशासन में आवेदन करने के साथ ही राजनीतिक पार्टियों के नेताओं के पास जुगत लगाना शुरू कर दिया है। वहीं दूसरी ओर राजनीतिक पार्टियां चुनाव में बेहतर काम करने वाले लोगों और रुठों को खुश करने के लिए उनके नाम पर विचार करने में जुट गईं हैं।

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मनोनीत पार्षद चुने जाने के लिए लोगों को प्रशासन के पास आवेदन करना होता है। इसके बाद यूटी के प्रशासक इन आवेदनों में से मनोनीत पार्षदों का चुनाव करते हैं। मनोनीत पार्षदों के चुनाव के लिए सबसे ज्यादा सत्ताधीन पार्टी का हस्तक्षेप रहता है। चुनाव में टिकट वितरण के बाद कई कार्यकर्ताओं में नाराजगी होती है, वहीं कुछ नए लोगों को जोड़ने के बाद उन्हें भी सदन में प्रवेश दिलाने का आश्वासन दिया जाता है। नाराज लोगों को साधने के लिए मनोनीत पार्षद पार्टी के पदाधिकारियों के पास बड़ा हथियार होता है। ऐसे में बिना चुनाव लड़े सदन में अंदर घुसने के लिए लोग विभिन्न पार्टियों के पास जुगत लगाने में जुट गए हैं।

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भाजपा में नाम पर मंथन शुरू, आप-कांग्रेस ने दिया प्रशासक को पत्र

मनोनीत पार्षदों को लेकर भाजपा में मंथन शुरू हो गया है। भाजपा की ओर चंडीगढ़ के प्रभारी विनोद तावड़े, प्रदेश अध्यक्ष अरुण सूद, वरिष्ठ पदाधिकारी संजय टंडन और सत्यपाल जैन अलग-अलग क्षेत्रों से नामों पर विचार करने में जुट गए हैं। वहीं आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने प्रशासक को पत्र देकर कहा है कि उनकी पार्टी के लोगों को भी मनोनीत पार्षदों की सूची में रखा जाए। आम आदमी पार्टी मंगलवार को प्रशासक को एक बार फिर से पत्र देकर अपने तीन से चार लोगों के नाम की सूची सौंपेगी। वहीं कांग्रेस फिलहाल चुनाव परिणाम आने का इंतजार कर रही है, उसके बाद आगे विचार करेगी। 

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नौ मनोनीत पार्षद, अलग-अलग क्षेत्र से होता है चुनाव

शहर में शुरू से ही मनोनीत पार्षदों की संख्या 9 रखी गई है। कानून विशेषज्ञों का मानना है कि पहले वार्डों की संख्या 20 थी, इसके बाद बढ़कर 26 वार्ड हो गए और अब वार्डों की संख्या बढ़कर 35 हो गई है, लेकिन मनोनीत पार्षदों की संख्या उतनी ही रही। हालांकि एक तिहाई सीट महिलाओं के लिए आरक्षित होती है। इसमें स्वास्थ्य, शिक्षा, सेवानिवृत्त सेना के अधिकारी, पूर्व आईएएस, आर्केटेक्ट, कानून विध, समाजसेवी, व्यापारी, अल्पसंख्यक सहित अलग-अलग क्षेत्रों से लोगों का चुनाव होता है। प्रशासक इन नामों पर अंतिम मुहर लगाते हैं। सदन की कार्यवाही को सही दिशा में ले जाने, अपने अनुभवों से सही निर्णय लेने और वहां होने वाले विवादों का निपटारा करने में मनोनीत पार्षदों की भूमिका रहती है। पिछली बार सूची में कोई रिटायर्ड आईएएस और आर्किटेक्ट नहीं था।

मनोनीत पार्षदों का वर्ष 2016 में वोटिंग का अधिकार 

राजनीतिक पार्टियों को सत्ता में लाने के लिए मनोनीत पार्षदों का काफी महत्वपूर्ण योगदान रहता था। क्योंकि मनोनीत पार्षदों को वोट डालने का अधिकार था। 9 वोट किसी भी पार्टी की सत्ता बनाने और गिराने में अहम योगदान देते थे। वर्ष 2016 में मनोनीत पार्षदों से वोटिंग का अधिकार वापस ले लिया गया। फिलहाल मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। अब यह पद नाराज लोगों को साधने के लिए भी उपयोग होने लगा है। वर्ष 2011 में भाजपा चुनाव में कम सीटें जीती थी, लेकिन उसके बावजूद मनोनीत पार्षदों के बल पर उसने निगम में सत्ता हासिल कर ली थी। 

नहीं बन सकते हैं मेयर, वार्ड डेवलपमेंट फंड भी नहीं मिलता

मनोनीत पार्षदों के अधिकारों और चयनित पार्षदों के अधिकारों में कोई खास अंतर नहीं होता है, लेकिन मनोनीत पार्षद मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर या डिप्टी मेयर नहीं बन सकते हैं। हालांकि उन्हें कमेटियों का सदस्य, चेयरमैन बनाया जा सकता है। उनका मानदेय निर्वाचित पार्षदों की तरह ही होता है, लेकिन इन्हें वार्ड डेवलपमेंट फंड नहीं मिलता है। पार्षद केवल अपने वार्ड का काम ही सदन में रख सकते हैं, जबकि मनोनीत पार्षद शहर के किसी भी क्षेत्र के विकास कार्य का प्रस्ताव सदन में रख सकते हैं।

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