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लेटनाइट डिस्को जाने के शौकीन युवाओं के लिए बुरी खबर
ब्यूरो/अमर उजाला/चंडीगढ़
Updated Sat, 02 Apr 2016 08:03 PM IST
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- फोटो : फाइल फोटो
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पिछले साल जून महीने में सेक्टर-8 केडिस्कोथेक के बाहर गोली चलने के बाद पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की सख्ती पर अमल करते हुए यूटी प्रशासन ने डिस्को व क्लबों के लिए नए नियम बना दिए हैं। डिस्कोथेक और क्लब अब रात 12 बजे तक ही खुल सकेंगे। नए नियमों का सख्ती से पालन कराने के लिए नियमित जांच भी होगी।
गोली चलने की घटना पर चले मामले में यूटी प्रशासन ने हाईकोर्ट के जस्टिस राजन गुप्ता की बेंच को अवगत कराया है कि शहर में डिस्कोथेक, पूल गेम्स, वर्चुअल रिएलिटी गेम्स, मशीन पार्लर अब 12 बजे के बाद नहीं खुलेंगे। यही नहीं, क्लबों व डिस्कोथेक में 25 साल से कम उम्र के किसी भी व्यक्ति को शराब पीने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
प्रशासन ने हाईकोर्ट को बताया है कि कंट्रोलिंग ऑफ प्लेसेज ऑफ पब्लिक एम्यूजमेंट-2016 नीति अधिसूचित की गई है। यह नीति एक अप्रैल से लागू कर दी गई है। नीति के तहत शहर के सभी डिस्कोथेक, क्लब, पब्स, बार और होटलों की रेगुलर चेकिंग की जाएगी और एक नोडल कमेटी हर महीने बैठक कर नीति के पालन की समीक्षा करेगी।
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एक सप्ताह में मांगी है स्थिति रिपोर्ट
हाईकोर्ट ने नई नीति को सख्ती से लागू करने का निर्देश देते हुए एक हफ्ते में स्थिति रिपोर्ट मांगी है कि नीति बनने के बाद हालातों में क्या सुधार हुआ। अगली सुनवाई आठ अप्रैल को होगी। पिछले साल जून महीने में देर रात एक डिस्कोथेक और बार के बाहर गोली चलने की घटना के बाद हाईकोर्ट ने शहर में रात के समय सुरक्षा सुनिश्चित बनाने के लिए यूटी प्रशासन को ऐसी नीति बनाने का निर्देश दिया था, जिससे लोगों की नाइट लाइफ पर बुरा प्रभाव न पड़े और वह सुरक्षित महसूस कर सकें।
इस दौरान यह पता चला था कि डिस्कोथेक चलाने के लिए प्रशासन के पास कोई नीति है ही नहीं। यह भी सामने आया था कि डिस्कोथेक चलाने के लिए प्रशासन से किसी प्रकार का लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं है। न ही यह तय था कि डिस्कोथेक व क्लब रात को कितने बजे तक खुले रह सकते हैं और ऐसी जगहों पर शराब परोसने का क्या प्रावधान है।
शराब पिलाने की अनुमति लेनी जरूरी
अब यूटी प्रशासन ने जो नीति बनाई है, उसके तहत डीसी की अध्यक्षता में गठित कमेटी से डिस्कोथेक चलाने और यहां शराब परोसने के लिए अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया है। नीति के तहत उपरोक्त के अलावा उन सभी जगहों को भी शामिल किया गया है, जहां म्यूजिक, डांस और गायन होता है। खानपान की सुविधा, शराब परोसने वाली जगहों को भी नीति के दायरे में लाया गया है। कमेटी से अनिवार्य इजाजत लेनी होगी और यह इजाजत एक साल के लिए होगी व। एक साल बाद एक्सटेंशन की जाएगी। जस्टिस राजन गुप्ता की बेंच ने अब यूटी प्रशासन से नीति का सख्ती से अनुपालन करने को कहा है। यह नीति बनने से क्लबों और डिस्कोथेक के भीतर और बाहर माहौल बेहतर बनने की उम्मीद जगी है।
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गोली चलने की घटना पर चले मामले में यूटी प्रशासन ने हाईकोर्ट के जस्टिस राजन गुप्ता की बेंच को अवगत कराया है कि शहर में डिस्कोथेक, पूल गेम्स, वर्चुअल रिएलिटी गेम्स, मशीन पार्लर अब 12 बजे के बाद नहीं खुलेंगे। यही नहीं, क्लबों व डिस्कोथेक में 25 साल से कम उम्र के किसी भी व्यक्ति को शराब पीने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
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प्रशासन ने हाईकोर्ट को बताया है कि कंट्रोलिंग ऑफ प्लेसेज ऑफ पब्लिक एम्यूजमेंट-2016 नीति अधिसूचित की गई है। यह नीति एक अप्रैल से लागू कर दी गई है। नीति के तहत शहर के सभी डिस्कोथेक, क्लब, पब्स, बार और होटलों की रेगुलर चेकिंग की जाएगी और एक नोडल कमेटी हर महीने बैठक कर नीति के पालन की समीक्षा करेगी।
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एक सप्ताह में मांगी है स्थिति रिपोर्ट
हाईकोर्ट ने नई नीति को सख्ती से लागू करने का निर्देश देते हुए एक हफ्ते में स्थिति रिपोर्ट मांगी है कि नीति बनने के बाद हालातों में क्या सुधार हुआ। अगली सुनवाई आठ अप्रैल को होगी। पिछले साल जून महीने में देर रात एक डिस्कोथेक और बार के बाहर गोली चलने की घटना के बाद हाईकोर्ट ने शहर में रात के समय सुरक्षा सुनिश्चित बनाने के लिए यूटी प्रशासन को ऐसी नीति बनाने का निर्देश दिया था, जिससे लोगों की नाइट लाइफ पर बुरा प्रभाव न पड़े और वह सुरक्षित महसूस कर सकें।
इस दौरान यह पता चला था कि डिस्कोथेक चलाने के लिए प्रशासन के पास कोई नीति है ही नहीं। यह भी सामने आया था कि डिस्कोथेक चलाने के लिए प्रशासन से किसी प्रकार का लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं है। न ही यह तय था कि डिस्कोथेक व क्लब रात को कितने बजे तक खुले रह सकते हैं और ऐसी जगहों पर शराब परोसने का क्या प्रावधान है।
शराब पिलाने की अनुमति लेनी जरूरी
अब यूटी प्रशासन ने जो नीति बनाई है, उसके तहत डीसी की अध्यक्षता में गठित कमेटी से डिस्कोथेक चलाने और यहां शराब परोसने के लिए अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया है। नीति के तहत उपरोक्त के अलावा उन सभी जगहों को भी शामिल किया गया है, जहां म्यूजिक, डांस और गायन होता है। खानपान की सुविधा, शराब परोसने वाली जगहों को भी नीति के दायरे में लाया गया है। कमेटी से अनिवार्य इजाजत लेनी होगी और यह इजाजत एक साल के लिए होगी व। एक साल बाद एक्सटेंशन की जाएगी। जस्टिस राजन गुप्ता की बेंच ने अब यूटी प्रशासन से नीति का सख्ती से अनुपालन करने को कहा है। यह नीति बनने से क्लबों और डिस्कोथेक के भीतर और बाहर माहौल बेहतर बनने की उम्मीद जगी है।