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विशेष बच्चों को घर बैठे मिलेगा सर्टिफिकेट
आशीष वर्मा/ अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 17 Nov 2013 05:37 PM IST
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जीएमसीएच-32 के मनोचिकित्सक विभाग विशेष बच्चों को उनके घर पर ही विकलांगता प्रमाण पत्र, पेंशन आदि उपलब्ध कराएगा।
विभाग ने चंडीगढ़ में होमबेस पैकेज नाम का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। इसके तहत विशेष बच्चों के परिवार सदस्यों को कुल दस घंटे की विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी।
हर हफ्ते दो घंटे का प्रशिक्षण होगा। पहले कुछ घंटे की ट्रेनिंग में विकलांगता का सर्टिफिकेट भरना, पेंशन का फार्म भरना और उसे जमा कराने की प्रक्रिया होगी।
उसके बाद बाकी बचे घंटों में उसे आत्मनिर्भर बनाने की ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि वे अपने ज्यादातर काम खुद कर सकें।
जीमएसीएच-32 के मनोचिकित्सक विभाग के हेड ऑफ डिपार्टमेंट प्रो. वीएस चवन ने बताया कि चंडीगढ़ में सबसे पहले यह प्रोजेक्ट रामदरबार में शुरू किया गया है।
यहां पर 12-15 बच्चों का चयन किया गया है जो तीन से 12 साल के हैं। विशेष बच्चे सबसे ज्यादा अपने माता-पिता पर निर्भर रहते हैं।
विशेष ट्रेनिंग नहीं मिलने के कारण माता-पिता भी उनकी केयर नहीं कर पाते। इसी को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है।
यह होगा दस घंटे का पैकेज
1. पहला घंटा : बच्चे को सोशल स्पोर्ट दिया जाएगा, पेंशन और विकलांगता सर्टिफिकेट नहीं बने है तो फार्म भराया जाएगा
2. दूसरा घंटा : बच्चे का आईक्यू टेस्ट किया जाएगा ताकि उसके मुताबिक ट्रेनिंग दी जा सके।
3. तीसरा घंटा : सर्टिफिकेट बनवाकर बच्चे को दिया जाएगा और उसे उसका महत्व समझाया जाएगा
4. चौथे से छठे घंटे तक : ड्रेसिंग, ब्रशिंग, उठना, बैठना और कम्युनिकेशन की ट्रेनिंग दी जाएगी। इस दौरान फैमिली के सदस्य भी मौजूद रहेंगे।
5.आखिरी के चार घंटे : परिवार सदस्य ली ट्रेनिंग को विशेषज्ञों के सामने बच्चों को सिखाएंगे।
रोजेक्ट सफल रहा तो सरकार को भेजेंगे
अगर पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा तो इसे भारत सरकार के सामने पेश किया जाएगा। विशेषज्ञों के मुताबिक रामगढ़ में होम बेस पैकेज कंपलीट करने के बाद इसे रिव्यू किया जाएगा।
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इसमें देखा जाएगा कि यह प्रोजेक्ट कितना सफल रहा। परिवारों में कितना चेंज आया। विशेष बच्चों में क्या फर्क और उनका जीवन स्तर कितना सुधरा। उसके बाद चंडीगढ़ के दूसरे इलाकों में होम बेस पैकेज शुरू किया जाएगा।
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विभाग ने चंडीगढ़ में होमबेस पैकेज नाम का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। इसके तहत विशेष बच्चों के परिवार सदस्यों को कुल दस घंटे की विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी।
हर हफ्ते दो घंटे का प्रशिक्षण होगा। पहले कुछ घंटे की ट्रेनिंग में विकलांगता का सर्टिफिकेट भरना, पेंशन का फार्म भरना और उसे जमा कराने की प्रक्रिया होगी।
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उसके बाद बाकी बचे घंटों में उसे आत्मनिर्भर बनाने की ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि वे अपने ज्यादातर काम खुद कर सकें।
जीमएसीएच-32 के मनोचिकित्सक विभाग के हेड ऑफ डिपार्टमेंट प्रो. वीएस चवन ने बताया कि चंडीगढ़ में सबसे पहले यह प्रोजेक्ट रामदरबार में शुरू किया गया है।
यहां पर 12-15 बच्चों का चयन किया गया है जो तीन से 12 साल के हैं। विशेष बच्चे सबसे ज्यादा अपने माता-पिता पर निर्भर रहते हैं।
विशेष ट्रेनिंग नहीं मिलने के कारण माता-पिता भी उनकी केयर नहीं कर पाते। इसी को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है।
यह होगा दस घंटे का पैकेज
1. पहला घंटा : बच्चे को सोशल स्पोर्ट दिया जाएगा, पेंशन और विकलांगता सर्टिफिकेट नहीं बने है तो फार्म भराया जाएगा
2. दूसरा घंटा : बच्चे का आईक्यू टेस्ट किया जाएगा ताकि उसके मुताबिक ट्रेनिंग दी जा सके।
3. तीसरा घंटा : सर्टिफिकेट बनवाकर बच्चे को दिया जाएगा और उसे उसका महत्व समझाया जाएगा
4. चौथे से छठे घंटे तक : ड्रेसिंग, ब्रशिंग, उठना, बैठना और कम्युनिकेशन की ट्रेनिंग दी जाएगी। इस दौरान फैमिली के सदस्य भी मौजूद रहेंगे।
5.आखिरी के चार घंटे : परिवार सदस्य ली ट्रेनिंग को विशेषज्ञों के सामने बच्चों को सिखाएंगे।
रोजेक्ट सफल रहा तो सरकार को भेजेंगे
अगर पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा तो इसे भारत सरकार के सामने पेश किया जाएगा। विशेषज्ञों के मुताबिक रामगढ़ में होम बेस पैकेज कंपलीट करने के बाद इसे रिव्यू किया जाएगा।
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इसमें देखा जाएगा कि यह प्रोजेक्ट कितना सफल रहा। परिवारों में कितना चेंज आया। विशेष बच्चों में क्या फर्क और उनका जीवन स्तर कितना सुधरा। उसके बाद चंडीगढ़ के दूसरे इलाकों में होम बेस पैकेज शुरू किया जाएगा।