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सुखना को बचाने के लिए दिए सुझाव
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 12 Nov 2013 03:27 PM IST
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सुखना संरक्षण को लेकर अध्ययन में जुटे नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाईड्रोलॉजी (एनआईएच), रुड़की ने अपनी ड्राफ्ट रिपोर्ट पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में पेश कर दी है।
एनआईएच ने अपनी रिपोर्ट में 22 सुझाव दिए हैं, जिससे भविष्य में सुखना झील का संरक्षण किया जा सकता है।
सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस संजय किशन कौल एवं जस्टिस एजी मसीह पर आधारित खंडपीठ ने रिपोर्ट को रिकार्ड में लेकर चंडीगढ़ प्रशासन से इस संबंध में सुझाव आमंत्रित किए हैं।
वहीं, हाईकोर्ट ने 8 जुलाई के आदेशों पर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के लिए भी चंडीगढ़ प्रशासन को निर्देश जारी किए हैं। कैचमेंट एरिया में निर्माण पर लगी रोक जारी रहेगी।
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हाईकोर्ट ने मामले की आगामी सुनवाई 10 जनवरी को निर्धारित की है।
रुड़की के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाईड्रोलॉजी ने अपनी सिफारिशों में सुखना के कैचमेंट एरिया में ज्यादा फोकस किया है।
सुझावों में कांसल, कैंपवाला गांव से सुखना के लिए हो रही गंदे पानी और घरों के वेस्ट पानी की आपूर्ति पर पूरी तरह रोक लगाने का सुझाव दिया है। वहीं, झील को सिल्ट से बचाने के लिए झील के आसपास जंगल बढ़ाने की भी जोरदार सिफारिश ड्राफ्ट रिपोर्ट में की गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि झील की गहराई को 1156 फीट से अधिक करने का सुझाव भी दिया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे बोटिंग क्षेत्र में पानी साफ सुथरा होगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा स्थिति बनाए रखने के लिए हर साल गाद को बाहर निकालना जरूरी है।
झील के नार्थ स्तर पर एकत्रित हुई सिल्ट पर स्थायी हो चुकी है और इसमें जंगल लगाया जा सकता है, ताकि आने वाले सिल्ट के बहाव को वहीं रोका जा सके।
चैक डैम की स्टोरेज क्षमता को बढ़ाने की जरूरत है, ताकि झील के सूखने की स्थिति में उस पानी का इस्तेमाल किया जा सके। रिपोर्ट में कहा गया है कि झील को रासायनिक प्रक्रियाओं से पूरी तरह दूर रखा जाए।
इसके साथ ही कैचमेंट एरिया में आर्गेनिक कृषि पर जोर देने की सिफारिश भी की गई है। ड्राफ्ट रिपोर्ट में कहा गया है कि सुखना के संरक्षण के लिए हर साल जागरूकता अभियान चलाया जाना जरूरी है।
झील के संरक्षण के लिए विभिन्न कमेटियां गठित की जाएं और कमेटियों में एनजीओ, प्रशासनिक अधिकारी, विभिन्न फील्ड के विशेषज्ञों को शामिल किया जा सकता है।
मॉडल लेक की तरह विकसित किया जाए
एनआईएच ने अपनी रिपोर्ट में इस झील को मॉडल लेक की तरह विकसित करने का सुझाव दिया है। संस्थान ने कहा कि इस झील का प्रयोग रिसर्च के मकसद से किया जा सकता है।
अगर झील प्रयोगशाला के रूप में इस्तेमाल में लाई जाती है तो इसके संरक्षण को खुद ब खुद बल मिलेगा।
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एनआईएच ने अपनी रिपोर्ट में 22 सुझाव दिए हैं, जिससे भविष्य में सुखना झील का संरक्षण किया जा सकता है।
सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस संजय किशन कौल एवं जस्टिस एजी मसीह पर आधारित खंडपीठ ने रिपोर्ट को रिकार्ड में लेकर चंडीगढ़ प्रशासन से इस संबंध में सुझाव आमंत्रित किए हैं।
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वहीं, हाईकोर्ट ने 8 जुलाई के आदेशों पर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के लिए भी चंडीगढ़ प्रशासन को निर्देश जारी किए हैं। कैचमेंट एरिया में निर्माण पर लगी रोक जारी रहेगी।
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हाईकोर्ट ने मामले की आगामी सुनवाई 10 जनवरी को निर्धारित की है।
रुड़की के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाईड्रोलॉजी ने अपनी सिफारिशों में सुखना के कैचमेंट एरिया में ज्यादा फोकस किया है।
सुझावों में कांसल, कैंपवाला गांव से सुखना के लिए हो रही गंदे पानी और घरों के वेस्ट पानी की आपूर्ति पर पूरी तरह रोक लगाने का सुझाव दिया है। वहीं, झील को सिल्ट से बचाने के लिए झील के आसपास जंगल बढ़ाने की भी जोरदार सिफारिश ड्राफ्ट रिपोर्ट में की गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि झील की गहराई को 1156 फीट से अधिक करने का सुझाव भी दिया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे बोटिंग क्षेत्र में पानी साफ सुथरा होगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा स्थिति बनाए रखने के लिए हर साल गाद को बाहर निकालना जरूरी है।
झील के नार्थ स्तर पर एकत्रित हुई सिल्ट पर स्थायी हो चुकी है और इसमें जंगल लगाया जा सकता है, ताकि आने वाले सिल्ट के बहाव को वहीं रोका जा सके।
चैक डैम की स्टोरेज क्षमता को बढ़ाने की जरूरत है, ताकि झील के सूखने की स्थिति में उस पानी का इस्तेमाल किया जा सके। रिपोर्ट में कहा गया है कि झील को रासायनिक प्रक्रियाओं से पूरी तरह दूर रखा जाए।
इसके साथ ही कैचमेंट एरिया में आर्गेनिक कृषि पर जोर देने की सिफारिश भी की गई है। ड्राफ्ट रिपोर्ट में कहा गया है कि सुखना के संरक्षण के लिए हर साल जागरूकता अभियान चलाया जाना जरूरी है।
झील के संरक्षण के लिए विभिन्न कमेटियां गठित की जाएं और कमेटियों में एनजीओ, प्रशासनिक अधिकारी, विभिन्न फील्ड के विशेषज्ञों को शामिल किया जा सकता है।
मॉडल लेक की तरह विकसित किया जाए
एनआईएच ने अपनी रिपोर्ट में इस झील को मॉडल लेक की तरह विकसित करने का सुझाव दिया है। संस्थान ने कहा कि इस झील का प्रयोग रिसर्च के मकसद से किया जा सकता है।
अगर झील प्रयोगशाला के रूप में इस्तेमाल में लाई जाती है तो इसके संरक्षण को खुद ब खुद बल मिलेगा।