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ट्रेजडी किंग का निधन: चंडीगढ़ की हरियाली, सुंदर चौराहों और चौड़ी सड़कों पर फिदा थे दिलीप कुमार

Wed, 07 Jul 2021 09:07 PM IST
ajay kumar संजीव पंगोत्रा, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
संजीव पंगोत्रा, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Wed, 07 Jul 2021 09:07 PM IST
सार

नेहरू के सपनों का शहर चंडीगढ़ दिलीप कुमार को बेहद पसंद था। वह यहां की हरियाली, बड़े-बड़े चौराहों और खूबसूरती के मुरीद थे। यही वजह है कि वह जब भी हिमाचल प्रदेश शूटिंग को जाते तो चंडीगढ़ में जरूर रुकते थे। चंडीगढ़ का दही चिकन, अमृतसरी मछली का स्वाद उन्हें काफी भाया।  

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Dilip Kumar was deeply attached to Chandigarh
दिलीप कुमार। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

करोड़ों दिलों पर राज करने वाले ट्रेजडी किंग दिलीप कुमार का चंडीगढ़ से गहरा लगाव रहा। दिलीप साहब जब भी हिमाचल प्रदेश शूटिंग के लिए आते तो चंडीगढ़ के सेक्टर 10 स्थित होटल माउंटव्यू में जरूर ठहरते। इस शहर की खूबसूरती, यहां की हरियाली, सुंदर चौराहे उन्हें भाते थे।

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वर्ष 1988 में दिलीप कुमार मनाली से शूटिंग के बाद चंडीगढ़ के इसी होटल में ठहरे थे। उस समय होटल स्टोरेंट के कैप्टन रहे आरपी सिंह ने बताया कि शाम के 6.45 बजे थे। मैं अपने स्टाफ को कुछ हिदायतें दे रहा था। इतने में काला कोट पैंट और सफेद कमीज पहने एक व्यक्ति अंदर आया। मैंने सोचा कोई वकील है। मैंने अपने एक कर्मचारी को उनके पास भेज दिया। बाद में जब मुझे पता चला कि वह दिलीप कुमार हैं तो तुरंत उनके पास पहुंचा। उनका स्वभाव बेहद सरल था। 
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किसी किस्म का कोई घमंड नहीं। उनका रसोइया भी उनके साथ था। उन्होंने चिकन ऑर्डर किया। हमने उन्हें दहीवाला चिकन खिलाया, जिसका स्वाद उन्हें बेहद पसंद आया। दो दिन के प्रवास के दौरान उन्हें अमृतसरी फिश और पटियाला चिकन भी खिलाया। उन्होंने अपने रसोइए से कहा-मुंबई जाकर ऐसा ही चिकन बनाना। 
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चमक इतनी थी कि चेहरे पर नजरें नहीं ठहरती थीं
शहर की वरिष्ठ रंगकर्मी बलबीर कौर ने बताया कि मेरी उम्र 78 वर्ष की है। 20 वर्ष की उम्र में मैं गवर्नमेंट कॉलेज सेक्टर 11 में पढ़ती थी। वर्ष 1960 की बात है, जब दिलीप कुमार माउंटव्यू होटल में ठहरे थे। मैं उनकी बड़ी फैन थी। मुझे पता चला तो उन्हें देखने पहुंच गई। उनके चेहरे पर इतनी चमक थी कि मेरी नजरें अधिक देर तक ठहर नहीं पाईं। उन्हें देखने के बाद मैंने सोच लिया था कि किसी और से शादी नहीं करूंगी। दिलीप कुमार ने मिलने आए प्रशंसकों की तरफ मुस्कराकर देखा और हाथ हिलाते हुए रवाना हो गए। 


200 बार देखी देवदास 
ऑल इंडिया रेडियो के अनाउंसर रहे विनोद धीर ने बतया कि वह दिलीप कुमार के बहुत बड़े प्रशंसक रहे हैं। उनके बारे में जितनी भी खबरें आती थीं, वह उन्हें संभाल कर रखते थे। आज भी उनके पास याद के तौर पर रखी हैं। दिलीप कुमार की देवदास फिल्म कम से कम 200 बार देखी थी। 1976 में जब पंजाब में एक राजनीतिक पार्टी का सम्मेलन चल रहा था तो वह किसी के साथ वहां पहुंचे हुए थे। मैंने उन्हें दूर से देखा। मुझे मलाल है कि मैं उनसे मिल नहीं पाया। 

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