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यह है धनतेरस का शुभ मुहूर्त

Tue, 10 Nov 2020 10:02 PM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Tue, 10 Nov 2020 10:02 PM IST
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Dhanteras on 13th, 21 minutes auspicious for shopping
चंडीगढ़। धनतेरस से भैयादूज तक चार दिनों का विशेष महत्व है। धनतेरस पर खरीदारी के साथ तीन दिन पूजा के लिए खास हैं। प्रदोष काल में पूजा का विशेष फल प्राप्त होता है। सूर्यास्त के ठीक बाद का समय प्रदोष काल माना जाता है। प्रदोष काल में पूजा व अनुष्ठान करना शुभ माना गया है। इस बार धनतेरस और नरक चौदस एक ही दिन है। शुभ मुहूर्त में पूजा करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होंगी।
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कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी धनतेरस कहलाती है। धनतेरस में खरीदारी का शुभ मुहूर्त मात्र 21 मिनट का है। इस साल त्रयोदशी 12 नवंबर को रात 9.30 से शुरू होकर 13 नवंबर को शाम 5.59 बजे तक रहेगी। यह बात सेक्टर-30 के भृगु ज्योतिष केंद्र के अध्यक्ष पंडित बीरेंद्र नारायण मिश्र ने कही। उन्होंने बताया कि धनतेरस अपराह्नकालीन त्योहार है। त्रयोदशी 13 नवंबर को अपराह्न व्यापिनी होने के कारण धनतेरस 13 नवंबर को ही मनाई जाएगी। 13 नवंबर को 10 बजकर 47 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर सात मिनट तक राहुकाल है। राहुकाल में बर्तन खरीदना या शुभ कार्य निषेध है।
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12 बजकर सात मिनट से लेकर 12 बजकर 28 मिनट तक लाभ की चौघड़िया है, इसलिए 13 नवंबर को खरीदारी के लिए यह मुहूर्त सर्वोत्तम एवं सुख समृद्धि व शांति देने वाला है। सुबह आठ बजकर सात मिनट से 9 बजकर 27 मिनट तक लाभ की चौघड़िया है और शाम चार बजकर छह मिनट से लेकर पांच बजकर 26 मिनट तक चर की चौघड़िया में मध्यम मुहूर्त रहेगा। इसमें खरीदारी शुभ रहेगी।
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दवा खरीदने का भी शुभ दिन है धनतेरस को
देवालय पूजक परिषद चंडीगढ़ के कोषाध्यक्ष और सेक्टर-18 के श्रीराधा कृष्ण मंदिर के पुजारी डॉ. लाल बहादुर दुबे ने बताया कि भगवान धनवंतरि संसार के समस्त रोगों की औषधियों को कलश में लेकर प्रकट हुए थे। उस दिन त्रयोदशी थी। इस दिन बीमारों के लिए दवा खरीदना और उसका सेवन करना फायदेमंद होगा।
नरक चौदस भी 13 को
बीरेंद्र नारायण मिश्र ने बताया कि दीपावली के एक दिन पहले नरक चतुर्दशी का पर्व मनाया जाता है। इस बार धनतेरस के दिन ही हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी, यम चतुर्दशी या फिर रूप चतुर्दशी कहते हैं। उन्होंने कहा कि इस दिन यमराज की पूजा करने और उनके लिए व्रत करने का विधान है। रात को घर के बाहर दीये जलाकर रखने से यमराज प्रसन्न होते हैं और अकाल मृत्यु की संभावना टल जाती है।
दीपावली 14 नवंबर को
शाम पांच बजकर 26 मिनट से रात आठ बजकर आठ बजे पूजा करें। सेक्टर-32 के प्राचीन हनुमान मंदिर के पुजारी आचार्य राज कुमार मिश्र ने बताया कि घर में प्रदोष काल के दौरान पूजन का विशेष महत्व है। प्रदोष काल 14 नवंबर को शाम पांच बजकर 26 मिनट से लेकर आठ बजकर आठ मिनट तक रहेगा। रात आठ बजकर 48 मिनट से लेकर रात 10 बजकर 30 मिनट तक शुभ की चौघड़िया है। रात साढ़े दस बजे से लेकर रात 12 बजकर 12 मिनट तक अमृत की चौघड़िया है। खाता बही की पूजा का मुहूर्त रात आठ बजकर 48 बजे से रात 12 बजकर 12 मिनट तक रहेगा।
अन्नकूट पर्व 15 नवंबर को
श्री देवालय पूजक परिषद चंडीगढ़ के कोषाध्यक्ष और सेक्टर 18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी डॉ. लाल बहादुर दुबे ने बताया कि अन्नकूट या गोवर्धन पूजा 15 नवंबर को है। घर के आंगन में गाय के गोबर से गोवर्धन नाथ जी की अल्पना बनाकर पूजन करते हैं। उसके बाद गिरिराज (पर्वत) को प्रसन्न करने के लिए उन्हें अन्नकूट का भोग लगाया जाता है।

भैयादूज पर्व 16 को
सेक्टर-32 के प्राचीन हनुमान मंदिर के पुजारी आचार्य राज कुमार मिश्र ने बताया कि भैयादूज 16 नवंबर को है। इसे यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने बताया कि सुबह सात बजकर सात मिनट से लेकर दोपहर बाद दो बजकर 37 मिनट तक बहने अपने भाई को तिलक लगाएं। राहु काल में तिलक न लगाएं। इस दिन राहु काल सुबह साढ़े सात बजे से लेकर 9 बजे तक है।
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