{"_id":"46da0a85dec10026dfbdfb9b39ff66b2","slug":"dhanas-colony-may-be-election-issue-in-chandigarh","type":"story","status":"publish","title_hn":"ये कॉलोनी होगी इस बार का चुनावी मुद्दा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ये कॉलोनी होगी इस बार का चुनावी मुद्दा
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 21 Feb 2014 10:54 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कालोनी नंबर-5 से उठाए गए लोगों को धनास में बसा कर प्रशासन भूल गया है। चार महीने बीतने पर भी यहां लोगों की समस्याएं खत्म नहीं हुई हैं।
लोकसभा चुनाव नजदीक होते देख इस बार इन्हीं लोगों की समस्याएं बड़ा चुनावी मुद्दा हो सकती हैं। तभी तो आए दिन यहां राजनीतिक पार्टियों की गतिविधियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस, भाजपा व बसपा के नेता यहां लोगों से कई बार मुलाकात कर चुके हैं।
यहां अभी तक करीब 7500 मकानों में लोग शिफ्ट हो चुके हैं। करीब 30 हजार लोग यहां रह रहे हैं, लेकिन उनके लिए कोई सुविधा नहीं दी गई। सबसे ज्यादा दिक्कत आ रही है स्कूली बच्चों को, जिनके स्कूल जाने के लिए केवल 2 ही बसों का इंतजाम किया गया है।
पार्कों की बदहाली बनी मुसीबत
यहां के लोगों के लिए पार्कों की बदहाली सबसे बड़ी समस्या हैं। यहां खुले एरिया में बड़े-बड़े पार्क तो बना दिए गए हैं, लेकिन उन्हें मेंटेन नहीं किया गया। पार्कों में बड़े-बड़े गड्ढे हो चुके हैं जहां हर समय पानी भरा रहता है। तकरीबन सभी पार्कों की यही दशा है।
विज्ञापन
सुरक्षा व्यवस्था बनी चिंता
इलाके के लोगों के लिए सुरक्षा व्यवस्था एक बड़ी चिंता बनी हुई हैं। सबसे ज्यादा दिक्कतें नीचे के मकानों में हो रही हैं। यहां गैलरी बहुत छोटी है, जहां से कोई भी दीवार फांदकर अंदर घुस सकता है।
स्थानीय लोग गैलरी की दीवार को ऊंचा करने या फिर वहां जाली लगाने के लिए कई बार हाउसिंग बोर्ड से फरियाद कर चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई हल नहीं हो सका। यहां आए दिन चोरी की घटनाएं हो रही हैं।
कोट्स
हमें सबसे ज्यादा पार्कों की बदहाली की शिकायत है। कई बार हाउसिंग बोर्ड और प्रशासन के अधिकारियों से बात कर चुके हैं, लेकिन कोई कुछ नहीं कर रहा।
- प्रेमपाल चौहान
स्कूली बच्चों को बहुत दिक्कतें आ रही हैं। बसों की सुविधा भी नहीं है। केवल दो ही बसे यहां लगाई गई हैं जबकि हजारों बच्चे स्कूल पढ़ने जाते हैं।
चंद्रीका प्रसाद
कोई छोटा-मोटा सामान भी खरीदना हो तो काफी दूर जाना पड़ता है। कोई दुकान भी यहां आसपास नहीं है।
बद्री प्रसाद
यहां आसपास कोई अस्पताल या डिस्पेंसरी भी नहीं है। कालोनी में जो डिस्पेंसरी है वो भी शाम को 5 बजे बंद हो जाती है और वहां दवाओं की भी कमी रहती है।
मधु शर्मा
घरों के आगे पार्कों में हमेशा पानी भरा रहता है, जिससे बहुत दिक्कतें हो रही हैं। गंदगी से लोग बीमार भी हो रहे हैं।
सुशीला देवी
घरों की गैलरी की दीवारें बहुत छोटी है, जिससे हमें डर रहता है कि कोई घर में न आए। आए दिन चोरियां भी हो रही हैं।
गीता देवी
विज्ञापन
लोकसभा चुनाव नजदीक होते देख इस बार इन्हीं लोगों की समस्याएं बड़ा चुनावी मुद्दा हो सकती हैं। तभी तो आए दिन यहां राजनीतिक पार्टियों की गतिविधियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस, भाजपा व बसपा के नेता यहां लोगों से कई बार मुलाकात कर चुके हैं।
यहां अभी तक करीब 7500 मकानों में लोग शिफ्ट हो चुके हैं। करीब 30 हजार लोग यहां रह रहे हैं, लेकिन उनके लिए कोई सुविधा नहीं दी गई। सबसे ज्यादा दिक्कत आ रही है स्कूली बच्चों को, जिनके स्कूल जाने के लिए केवल 2 ही बसों का इंतजाम किया गया है।
विज्ञापन
पार्कों की बदहाली बनी मुसीबत
यहां के लोगों के लिए पार्कों की बदहाली सबसे बड़ी समस्या हैं। यहां खुले एरिया में बड़े-बड़े पार्क तो बना दिए गए हैं, लेकिन उन्हें मेंटेन नहीं किया गया। पार्कों में बड़े-बड़े गड्ढे हो चुके हैं जहां हर समय पानी भरा रहता है। तकरीबन सभी पार्कों की यही दशा है।
विज्ञापन
सुरक्षा व्यवस्था बनी चिंता
इलाके के लोगों के लिए सुरक्षा व्यवस्था एक बड़ी चिंता बनी हुई हैं। सबसे ज्यादा दिक्कतें नीचे के मकानों में हो रही हैं। यहां गैलरी बहुत छोटी है, जहां से कोई भी दीवार फांदकर अंदर घुस सकता है।
स्थानीय लोग गैलरी की दीवार को ऊंचा करने या फिर वहां जाली लगाने के लिए कई बार हाउसिंग बोर्ड से फरियाद कर चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई हल नहीं हो सका। यहां आए दिन चोरी की घटनाएं हो रही हैं।
कोट्स
हमें सबसे ज्यादा पार्कों की बदहाली की शिकायत है। कई बार हाउसिंग बोर्ड और प्रशासन के अधिकारियों से बात कर चुके हैं, लेकिन कोई कुछ नहीं कर रहा।
- प्रेमपाल चौहान
स्कूली बच्चों को बहुत दिक्कतें आ रही हैं। बसों की सुविधा भी नहीं है। केवल दो ही बसे यहां लगाई गई हैं जबकि हजारों बच्चे स्कूल पढ़ने जाते हैं।
चंद्रीका प्रसाद
कोई छोटा-मोटा सामान भी खरीदना हो तो काफी दूर जाना पड़ता है। कोई दुकान भी यहां आसपास नहीं है।
बद्री प्रसाद
यहां आसपास कोई अस्पताल या डिस्पेंसरी भी नहीं है। कालोनी में जो डिस्पेंसरी है वो भी शाम को 5 बजे बंद हो जाती है और वहां दवाओं की भी कमी रहती है।
मधु शर्मा
घरों के आगे पार्कों में हमेशा पानी भरा रहता है, जिससे बहुत दिक्कतें हो रही हैं। गंदगी से लोग बीमार भी हो रहे हैं।
सुशीला देवी
घरों की गैलरी की दीवारें बहुत छोटी है, जिससे हमें डर रहता है कि कोई घर में न आए। आए दिन चोरियां भी हो रही हैं।
गीता देवी