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अमृतसरः श्री गुरु अर्जन देव के शहीदी दिवस पर हरमंदिर साहिब में मत्था टेकने पहुंचे श्रद्धालु

Tue, 26 May 2020 02:09 PM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, अमृतसर
अमर उजाला, अमृतसर Published by: खुशबू गोयल Updated Tue, 26 May 2020 02:09 PM IST
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Devotees gathered at Golden Temple in Amritsar on the martyrdom day of Guru Arjan Dev
हरमंदिर साहिब में मत्था टेकने पहुंचे श्रद्धालु - फोटो : एएनआई
लॉकडाउन व कर्फ्यू के दौरान शहर के अलग-अलग चौराहों पर लगाए गए नाकों में दी गई ढील के बीच सैकड़ों श्रद्धालु सचखंड श्री हरमंदिर साहिब पहुंचे। संगत ने पांचवें गुरु श्री गुरु अर्जन देव जी के शहीदी पर्व पर मुख्य भवन में सुशोभित श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के आगे नतमस्तक होकर सरबत के भले की अरदास की और पवित्र सरोवर में डुबकी लगाई।
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एसजीपीसी ने श्री हरमंदिर साहिब परिसर में स्थित सभी छबीलों पर ठंडे-मीठे पानी का प्रबंध किया हुआ था। वहीं शहीदी पर्व पर संगत की आमद अधिक होने के कारण बीते दो महीने से श्री अकाल तख्त साहिब के सचिवालय की तरफ जाने वाले रास्ते का जोड़ा घर खोल दिया गया। सचखंड पहुंची संगत को सामाजिक दूरी का पालन करवाया गया।
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श्री हरमंदिर साहिब के मुख्य भवन की परिक्रमा में बैठ कर गुरुबाणी श्रवण कर रहे श्रद्धालु भी सामाजिक दूरी बना कर बैठे हुए थे। एसजीपीसी ने गुरु श्री अर्जन देव जी का शहीदी पर्व ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री रामसर साहिब में श्रद्धा व उल्लास के साथ मनाया। श्री अखंड साहिब पाठ के भोग के बाद सचखंड श्री हरमंदिर साहिब के हजूरी रागी निर्मल सिंह के जत्थे ने गुरुबाणी का गायन कर संगत को गुरुघर के साथ जोड़ा।
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अरदास भाई बलविंदर सिंह कालेके ने की। कोरोना के कारण शहीदी पर्व पर संगत की भीड़ इकट्ठी नहीं की गई। एसजीपीसी के अध्यक्ष गोबिंद सिंह लौंगोवाल और श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने संगत से अपील की थी कि वह घर में बैठ कर पाठ करें। इस कारण गुरुद्वारा श्री रामसर साहिब में समागम सांकेतिक रूप में ही किया गया। 

ये है इतिहास

26 मई को सिखों के पांचवें गुरु अर्जुन देव जी का बलिदान दिवस मनाया जाता है। गुरु अर्जुन देव जी का जन्म 15 अप्रैल, साल 1563 में हुआ था। उनके पिता गुरु रामदास सिखों के चौथे गुरू थे और उनकी माता का नाम बीबी भानी था। पिता रामदास ने केवल 18 साल की उम्र में ही उन्हें गुरुगद्दी सौंप दी थी। गुरु अर्जुन देव जी का विवाह साल 1579 में माता गंगा के साथ हुआ था। दोनों के पुत्र का नाम हरगोविंद सिंह था, जो बाद में सिखों के छठे गुरु बने।

अर्जुन देव ने ही अमृतसर में हरमंदिर साहिब गुरुद्वारे की नींव रखवाई थी, जिसे आज स्वर्ण मंदिर के नाम से जाना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस गुरुद्वारे का नक्शा खुद अर्जुन देव जी ने बनाया था। गुरु अर्जुन देव जी ने भाई गुरदास के सहयोग से गुरु ग्रंथ साहिब का संपादन किया था। उन्होंने गुरु वाणियों का वर्गीकरण भी रागों के आधार पर किया। गुरु अर्जुन देव जी ने धर्म के लिए अपने प्राणों तक की आहुति दे दी।
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