क्या तीनों 'लालों' के वारिस बचा पाएंगे विरासत?
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हरियाणा के तीन लाल..बंसी, देवी, भजन लाल। सूबे में सियासी समर छिड़ा हो और इन लालों की बात न आए ऐसा संभव नहीं है। यहां राजनीति की ए, बी, सी, डी इन्हीं लालों के इर्द गिर्द घूमती है।
इस विधानसभा चुनाव में इन लालों के वारिसों पर उनकी विरासत बचाने की कड़ी चुनौती है। क्योंकि लोकसभा चुनाव में भिवानी में जहां भाजपा प्रत्याशी धरमवीर सिंह ने बंसीलाल के गढ़ में सेंध लगाई तो हिसार में कुलदीप बिश्नोई भजन लाल का गढ़ बचाने में नाकाम रहे।
हालांकि देवीलाल के पड़पोते दुष्यंत चौटाला अपनी विरासत को बचाने में कामयाब रहे और उन्होंने न सिर्फ हिसार सीट जीती बल्कि सिरसा में भी अपने प्रत्याशी को जीत दिलवाई। लेकिन इस सियासी संग्राम में हालात थोड़े उलट हैँ। यहां लालों के लाल आपस में तो भिड़ेंगे ही साथ ही इन्हें मोदी की लहर और कांग्रेस के विकास के दावों से भी जूझना होगा।
ऐसे में प्रश्न यह उठते हैं कि क्या इनेलो दस वर्ष बाद सत्ता में वापसी कर पाएगी? क्या कांग्रेस अपनी हैट्रिक बना पाएगी? क्या कुलदीप बिश्नोई अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस ला पाएंगे? और क्या भाजपा सूबे में पूर्ण बहुमत से सरकार बना पाने का सूखा समाप्त कर पाएगी?
इनेलो: दस साल बाद सत्ता में वापसी का सपना
दस सालों के बाद इनेलो के आंखों में एक बार फिर सत्ता हासिल करने का सपना चमक रहा है। इसके लिए पार्टी को जहां अपने कैडर वोट पर भरोसा है वहीं टिकट वितरण में जातीय समीकरणों का भी ख्याल रखा है। पिछले विधानसभा चुनाव में 25 सीटें जीतकर विपक्ष में रहने वाली इनलो की बागडोर इस बार भले ही अभय चौटाला के हाथों में है लेकिन पार्टी में सबसे ताकतवर चेहरा बनकर दुष्यंत चौटाला ही उभरे हैं।
वह पार्टी के युवा चेहरा बनकर युवाओं को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं। ताऊ की विरासत को बचाने के लिए चौटाला परिवार के चार सदस्य चुनावी मैदान में हैं। दुष्यंत जहां अपने दादा ओम प्रकाश चौटाला की सीट बचाने के लिए उचाना से मैदान में उतरे हैं वहीं उनकी मां नैना चौटाला अपने पति अजय चौटाला की सीट सुरक्षित करने के लिए डबवाली से चुनाव लड़ेंगी।
चौटाला परिवार में यह पहली बार है जब कोई महिला राजनीतिक मैदान में उतरी हो। इसके साथ ही अभय चौटाला ऐलनाबाद से फिर मैदान में हैँ। यह सभी दिग्गज अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र में पूरी ताकत झोंक रहे हैं लेकिन इन सबका प्रयास है कि किसी तरह चुनाव प्रचार में ओम प्रकाश चौटाला को लाया जाए।
हजकां: हर हाल में चाहिए जीत
लोकसभा चुनाव में हार और भाजपा से गठबंधन खत्म होने के बाद हजकां ने गैर जाट मतदाताओं को को जोड़ने का प्रयास शुरू किया।
इसके लिए उन्होंने हजपा के विनोद शार्मा से गठबंधन भी किया। लेकिन भजन लाल के किले को दरकता देख कुलदीप बिश्नोई ने पूरे परिवार को हिसार में ही उतारा है और वह भजन लाल की विरासत बचाने के नाम पर ही लोगों से वोट मांग रहे हैं।
खुद कुलदीप बिश्नोई अपनी पारंपरिक सीट आदमपुर से और पत्नी रेणुका बिश्नोई हांसी से चुनावी मैदान में उतर गए हैं। चंद्रमोहन भी करनाल छोड़कर नलवा से मैदान में हैं। कुलदीप बिश्नोई की कोशिश यही है कि वह किसी भी तरह कुछ सीटें हासिल कर सत्ता की चाबी अपने हाथ में ले लें।
बंसीलाल के वारिस चिंतित
बंसीलाल का परिवार तो कांग्रेस के विकास के नारे के साथ ही आगे बढ़ रहा है। पुत्रवधू किरण चौधरी बंसीलाल की पारंपरिक सीट तोशाम से फिर चुनाव लड़ रही हैं जबकि उनके बेटे रणवीर महिंद्रा बढ़डा से ताल ठोंक रहे हैं।
उनके दामाद सोमवीर सिंह लोहारू से कांग्रेस उम्मीदवार बनकर मैदान में उतरे हैं। बंसीलाल के परिवार की सबसे बड़ी चिंता यहां पुराने प्रतिद्वंद्वी भाजपा सांसद धरमवीर सिंह से ही है। वह भिवानी के ज्यादातर विधानसभा क्षेत्रों में हस्तक्षेप कर रहे हैं।
भले ही वह तोशाम से अपने भाई को टिकट नहीं दिलवा पाए हैं लेकिन उनके भाई राजवीर उर्फ लाला निर्दलीय मैदान में उतर गए हैं।
ऐसा माना जा रहा है कि धरमवीर अपने को जिताने के लिए पूरी कोशिश करेंगे। ऐसे में बंसीलाल की इस परंपरागत सीट पर मुकाबला काफी कड़ा हो गया है।
कांग्रेस को हैट्रिक की चिंता
दस वर्षों से सत्ता संभाल रही कांग्रेस तीसरी बार भी सरकार बनाने का दंभ भर रही है। इसके लिए वह अपने विकास के नारे के साथ चुनावी मैदान में है। हालांकि हुड्डा जाटलैंड में अपने प्रदर्शन को लेकर काफी आश्वस्त हैं और उन्हें कांग्रेस के परंपरागत वोटों का भी सहारा है। लेकिन इस बार उन्हें मोदी की लहर से जूझना पड़ रहा है।
भाजपा: सत्ता का सूखा मिटाने की कोशिश
दस वर्ष पहले इनेलो के साथ गठबंधन कर भाजपा ने यहां सत्ता का स्वाद चखा था। इस बार वह मोदी की लहर पर सवार होकर पूर्ण बहुमत से सरकार बनाने की कोशिश कर रही है। इसके लिए दर्जनों आयातित प्रत्याशियों को टिकट दिया है। हालांकि उसे मुख्यमंत्री का प्रत्याशी घोषित न करने का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
हिसार, सिरसा और जींद सबसे हॉट
हरियाणा के चुनाव संग्राम में हिसार, सिरसा और जींद सबसे हॉट जिले हैं। क्योंकि इस बाद भजन लाल और देवी लाल परिवारों की जोरदार भिड़ंत यही हो रही है। हिसार में आदमपुर, हांसी और नलवा से जहां भजन लाल का पूरा परिवार मैदान में है वहीं सिरसा की डबवाली और ऐलनाबाद से चौटाला परिवार मैदान में है। जबकि जींद की उचाना सीट पर दुष्यंत चौटाला स्वयं मोर्चा संभालने पहुंचे और उनका सामना हाल ही में कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए दिग्गज बीरेंद्र सिंह की पत्नी प्रेमलता से है।