यह कैसी व्यवस्था: चंडीगढ़ पीजीआई में लिया जा रहा ऑपरेशन शुल्क, फिर भी बाहर से मंगवाया जा रहा सामान
पीजीआई कर्मचारी संघ गैर संकाय के महासचिव अश्वनी कुमार मुंजाल का कहना है कि जब जनता के टैक्स से डॉक्टरों को वेतन दिया जा रहा है तो फिर ओटी फीस के नाम पर पैसे क्यों लिए जा रहे हैं।
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चंडीगढ़ पीजीआई में सर्जरी के मरीजों से कॉटन, ग्लव्स, आईवी सेट, माइक्रोटेप जैसी कई चीजें बाहर से खरीदकर मंगाई जा रही हैं जबकि इनके लिए ही मरीजों से ओटी फीस के नाम पर पांच से 75 हजार रुपये तक जमा करवाया जा रहा है। वहीं इससे अनजान परिजन अपने मरीज के बेहतर इलाज के लिए बिना कुछ पूछे हर मांग को पूरी करने में जुटे हैं। उन्हें तो यह पता ही नहीं है कि जिन सामानों के लिए उनसे पहले ही पैसे जमा करवा लिए गए हैं वे ही फिर से खरीदकर मंगवाए जा रहे हैं।
इसी व्यवस्था के चलते बाहर की बेहोशी की दवा के इस्तेमाल से संस्थान में मरीज की जान जाने की घटना सामने आ चुकी है जबकि वह दवा भी पीजीआई को ही उपलब्ध करानी चाहिए। इसके बावजूद पीजीआई प्रशासन चेत नहीं रहा है। अब भी सर्जरी वाले मरीजों को हस्ताक्षरित पैड पर बाहर से मंगाए जाने वाले सामानों की लिस्ट धड़ल्ले से थमाई जा रही है।
पीजीआई कर्मचारी संघ गैर संकाय के महासचिव अश्वनी कुमार मुंजाल का कहना है कि जब जनता के टैक्स से डॉक्टरों को वेतन दिया जा रहा है तो फिर ओटी फीस के नाम पर पैसे क्यों लिए जा रहे हैं। अगर ओटी के नाम पर पैसे लिए जा रहे हैं तो फिर सर्जरी में इस्तेमाल आने वाली सामग्री बाहर से क्यों मंगाई जा रही है। सिर्फ ओटी ही नहीं जनरल और प्राइवेट वार्ड, ट्रॉमा सेंटर, इमरजेंसी और ओपीडी में भी परिजनों से ये सामान मंगाए जा रहे हैं।
प्रिंट भी कराई गई है सूची, लिखकर भी दिया जा रहा
स्थिति यह है कि सर्जरी का जो सामान मरीजों को पीजीआई में निशुल्क मिलना चाहिए, उसके लिए शुल्क तो वसूला ही जा रहा है। इसके बावजूद उन सामानों की खरीद भी कराई जा रही है। इसके लिए अस्पताल में दो तरह की व्यवस्था पर काम किया जा रहा है। एक तो मरीज को स्लिप पर सामग्री की सूची लिखकर दी जा रही है, वहीं इसे और आसान बनाने के लिए पूरी सूची तैयार कराई गई है। इसका प्रिंट विभागवार उपलब्ध है। इन दोनों ही तरीकों से मरीजों से बाहर से सामग्री मंगाई जा रही है।
मानक दरकिनार, हो रही मनमानी
पीजीआई के पूर्व डॉक्टरों के अनुसार लगभग 18 साल पहले संस्थान में सर्जरी के मरीजों को सभी सामान ओटी के अंदर ही उपलब्ध कराया जाता था। संस्थान उसके लिए मरीजों से कोई शुल्क नहीं लेता था। धीरे-धीरे व्यवस्था में बदलाव होता गया। अब मरीजों से पांच से 75 हजार रुपये तक ओटी चार्ज के नाम पर लिया जा रहा है लेकिन इसके बावजूद उन्हें सर्जरी से पहले कई सामानों की लंबी-चौड़ी लिस्ट थमाई जा रही है। मानकों से अनजान मरीजों के परिजन बिना सवाल किए सामान खरीदकर ओटी में पहुंचाने को मजबूर हैं।
मरीजों के साथ हर जगह हो रही नाइंसाफी
पीजीआई में मरीज यह सोचकर आता है कि सस्ते दर पर बेहतर इलाज होगा लेकिन मरीजों के साथ धोखा ही किया जा रहा है। सरकार को इस पर गंभीरता से सोचने की जरूरत है। -बाला, मौलीजागरां
जनता के साथ हर जगह ऐसा ही हो रहा है। बेकसूर मरीज को क्या पता कि उसे देने वाला इंजेक्शन सही है या गलत। ऐसी घटनाओं पर रोक के लिए संस्थान की अपनी फार्मेसी होनी चाहिए अन्यथा यह क्रम ऐसे ही चलता रहेगा। -पारस, सेक्टर 32
इस संबंध में संबंधित शाखा से जानकारी मांगी गई है। फिलहाल वह इस बारे में कुछ नहीं कह सकते। -कुमार गौरव, डीडीए व प्रवक्ता पीजीआई