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यूआईईटी की शाखाओं को स्वतंत्र विभागों बदलने की उठी मांग
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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी के यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टैक्नोलॉजी (यूआईईटी) के शिक्षकों ने बुधवार को वीसी प्रो. राजकुमार से मुलाकात की और ज्ञापन सौंपा। शिक्षकों ने मांग की कि यूआईईटी की शाखाओं को पूर्ण स्वतंत्र विभागों में तब्दील किया जाए। यूआईईटी में पीयू के सभी से अधिक छात्र, शैक्षणिक और गैर शैक्षणिक कर्मचारी हैं ऐसे में प्रशासनिक कार्यों और छात्रों के मुद्दे हल करने में समस्या आती है।
यूआईईटी में इंजीनियरिंग की छह शाखाएं हैं। इनमें मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर साइंस, आईटी, बायोटैक्नोलॉजी और इलेक्ट्रॉनिक्स शामिल हैं। ये सब यूआईईटी निदेशक के प्रशासनिक नियंत्रण में है। अभी हर शाखा के कोऑर्डिनेटर बनाए हुए हैं जो यूआईईटी निदेशक के साथ विभिन्न मामलों को लेकर समन्वय करते हैं। शाखा कोऑर्डिनेटर के पास कोई वित्तीय/प्रशासनिक शक्ति नहीं है और यूआईईटी के निदेशक के माध्यम से पीयू के उच्च अधिकारियों के साथ संवाद करना पड़ता है। पीयू में केमिकल इंजीनियरिंग में यूजी के साथ पीजी पाठ्यक्रम का विभाग स्वतंत्र रूप से चलाया जाता है। यूआईईटी से सीनेट सदस्य डॉ. परवीन गोयल और प्रो. मनु शर्मा ने कहा कि पीयू में एक विभाग के बजाय इंजीनियरिंग की एक शाखा का अस्तित्व यूआईईटी के छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए नुकसानदेह है। यूआईईटी की प्रत्येक शाखा को स्वतंत्र विभागों में बदला जाना चाहिए। विभागों के कोऑर्डिनेटर का पदनाम भी अध्यक्ष में तब्दील किया जाए जिससे यूआईईटी की प्रत्येक शाखा का स्वतंत्र बजट होगा और अध्यक्षों के पास पीयू कैलेंडर में निर्दिष्ट वित्तीय और साथ ही प्रशासनिक शक्तियां होंगी। यूआईईटी की शाखाओं को स्वतंत्र विभाग में अपग्रेड करने से शाखाओं को कुछ वित्तीय, प्रशासनिक और शैक्षणिक स्वायत्तता देकर उन्हें सशक्त बना सकते हैं। डॉ. नरेश मेहंदिया ने कहा कि इतने बड़े विभाग का प्रबंधन करना व्यावहारिक रूप से कठिन है। वीसी ने प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत की और आश्वासन दिया कि वह जल्द से जल्द पूरे मामले को देखेंगे।
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यूआईईटी में इंजीनियरिंग की छह शाखाएं हैं। इनमें मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर साइंस, आईटी, बायोटैक्नोलॉजी और इलेक्ट्रॉनिक्स शामिल हैं। ये सब यूआईईटी निदेशक के प्रशासनिक नियंत्रण में है। अभी हर शाखा के कोऑर्डिनेटर बनाए हुए हैं जो यूआईईटी निदेशक के साथ विभिन्न मामलों को लेकर समन्वय करते हैं। शाखा कोऑर्डिनेटर के पास कोई वित्तीय/प्रशासनिक शक्ति नहीं है और यूआईईटी के निदेशक के माध्यम से पीयू के उच्च अधिकारियों के साथ संवाद करना पड़ता है। पीयू में केमिकल इंजीनियरिंग में यूजी के साथ पीजी पाठ्यक्रम का विभाग स्वतंत्र रूप से चलाया जाता है। यूआईईटी से सीनेट सदस्य डॉ. परवीन गोयल और प्रो. मनु शर्मा ने कहा कि पीयू में एक विभाग के बजाय इंजीनियरिंग की एक शाखा का अस्तित्व यूआईईटी के छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए नुकसानदेह है। यूआईईटी की प्रत्येक शाखा को स्वतंत्र विभागों में बदला जाना चाहिए। विभागों के कोऑर्डिनेटर का पदनाम भी अध्यक्ष में तब्दील किया जाए जिससे यूआईईटी की प्रत्येक शाखा का स्वतंत्र बजट होगा और अध्यक्षों के पास पीयू कैलेंडर में निर्दिष्ट वित्तीय और साथ ही प्रशासनिक शक्तियां होंगी। यूआईईटी की शाखाओं को स्वतंत्र विभाग में अपग्रेड करने से शाखाओं को कुछ वित्तीय, प्रशासनिक और शैक्षणिक स्वायत्तता देकर उन्हें सशक्त बना सकते हैं। डॉ. नरेश मेहंदिया ने कहा कि इतने बड़े विभाग का प्रबंधन करना व्यावहारिक रूप से कठिन है। वीसी ने प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत की और आश्वासन दिया कि वह जल्द से जल्द पूरे मामले को देखेंगे।
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