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एंबुलेंस में डिलीवरी पर बच न पाया मासूम, डाक्टरों ने बचाई एक जिंदगी

Fri, 02 Sep 2016 09:27 AM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, सुनाम (संगरूर)
ब्यूरो/अमरउजाला, सुनाम (संगरूर) Updated Fri, 02 Sep 2016 09:27 AM IST
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delivery in ambulance but doctor did not save chilld, the doctors saved a life
एंबुलेंस में डिलीवरी - फोटो : अमर उजाला
रात का वक्त, एंबुलेंस में हाई रिस्क डिलीवरी केस पर मासूम को नहीं बचा पाए डॉक्टर। मामला संगरूर के सुनाम का है। अस्पताल जा रहे हाई रिस्क (बेहद जोखिम) डिलीवरी केस को इमरजेंसी की स्थिति में सुनाम के सरकारी अस्पताल लाया गया और डाक्टरों की टीम एंबुलेंस में ही डिलीवरी करके मां को बचाने में सफल रही। डाक्टरों के पास इतना भी वक्त नहीं था कि मरीज को एंबुलेंस से ऑपरेशन थिएटर तक ले जा सकें। हालांकि गर्भ में पल रहे करीब साढे़ छह माह के बच्चे को बचाया नहीं जा सका। लेकिन जिस प्रकार से गर्भवती एंबुलेंस में तड़प रही थी उससे परिजनों के मन में इतना खौफ पैदा हो गया कि दोनों नहीं बच सकेंगे। 
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मामला बुधवार रात साढ़े 11 बजे का है। सुनाम के सरकारी अस्पताल की इमरजेंसी में एंबुलेंस पहुंची और उसमें सवार बुजुर्ग महिला जसवीर कौर ने स्टाफ से उसकी पुत्रवधू की जान बचाने की गुहार लगाई। ड्यूटी पर तैनात डाक्टर राजीव जिंदल और फार्मासिस्ट राजेश कुमार व सिस्टर ममता रानी तुरंत एंबुलेंस की तरफ पहुंचे और गर्भवती सुखप्रीत कौर (24) की अति नाजुक हालत को देखकर एंबुलेंस में डिलीवरी करने में जुट गए। वहीं डिलीवरी करके डाक्टर व स्टाफ ने ही मरीज को स्ट्रेचर पर डाला और ऑपरेशन थिएटर में ट्रीटमेंट किया।  
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एक मिनट का वक्त भी नहीं था : डॉक्टर

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अस्पताल में मरीज सुखप्रीत के साथ डॉक्टर जिंदल व स्टाफ - फोटो : अमर उजाला
डॉ. राजीव जिंदल ने कहा कि मरीज की हालत इतनी नाजुक थी कि एक मिनट भी उसकी जिंदगी पर भारी पड़ जाता। ऐसे में उनकी प्राथमिकता सुखप्रीत को बचाने की थी। स्टाफ की मदद से एंबुलेंस में डिलीवरी करने में सफल रहे। लेकिन बच्चा पहले की डेंजर जोन में था। जिसे बचाना मुश्किल था।  

डाक्टर ने दी नई जिंदगी : जसवीर कौर
सुखप्रीत की सास जसवीर कौर ने कहा कि रात साढे़ दस बजे उन्हें मानसा के जिला अस्पताल से पटियाला के लिए रेफर कर दिया गया। उन्होंने बार-बार स्टाफ की मिन्नतें की कि सुखप्रीत की हालत बेहद नाजुक है और ऐसी स्थिति में लेकर जाना बड़ा जोखिम होगा, लेकिन स्टाफ ने उनकी एक नहीं सुनीं। सुनाम के पास पहुंचते सुखप्रीत की हालत ज्यादा खराब हो गई और मजबूरीवश यहां के सरकारी अस्पताल की इमरजेंसी में ले गए। जसवीर कौर ने कहा कि बच्चे का बचना मुश्किल था क्योंकि पहले अल्ट्रासाउंड की रिपोर्टें भी ऐसा ही बता रही थीं। लेकिन उनकी पुत्रवधू को यहां के डाक्टर ने जोखिम से निकालकर नई जिंदगी दी है।
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