हरियाणाः डीएलएड का रिजल्ट घोषित, प्रथम वर्ष में फेल हुए 61 फीसदी परीक्षार्थी
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हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की डीएलएड प्रथम वर्ष परीक्षा में 61 फीसदी परीक्षार्थी फेल हुए। बोर्ड ने शुक्रवार को परिणाम घोषित किया। 17,968 छात्र अध्यापक परीक्षार्थियों में से महज 6,997 उत्तीर्ण रहे। डीएलएड प्रथम वर्ष (रि-अपीयर) में 3,021 छात्र अध्यापक प्रविष्ठ हुए जिनमें से 944 उत्तीर्ण रहे। यानी करीब 31.25 फीसदी।
डीएलएड नियमित द्वितीय वर्ष के परिणाम भी महज 38.28 फीसदी ही रहा। इस परीक्षा में 15,062 में से 5,766 परीक्षार्थी ही उत्तीर्ण हुए। बोर्ड अध्यक्ष डॉ. जगबीर सिंह और सचिव आरके सिंह ने बताया कि डीएलएड प्रथम वर्ष (नियमित) में 38.94 फीसदी पास हुए। इस परीक्षा में 11,475 छात्राओं में से 5,205 छात्राएं उत्तीर्ण हुई हैं, जिनकी पास प्रतिशतता 45.36 रही है। 6,493 छात्रों में से 1792 छात्र उत्तीर्ण हुए हैं, जिनकी पास प्रतिशतता 27.60 रही है। इसके अतिरिक्त डीएलएड प्रथम वर्ष (रि-अपीयर) में 3,021 छात्र अध्यापक प्रविष्ट हुए जिनमें से 944 उत्तीर्ण रहे, जिनकी पास प्रतिशतता 31.25 रही है।
इस परीक्षा में 1909 छात्राओं में से 600 छात्राएं उत्तीर्ण हुई है, जिनकी पास प्रतिशतता 31.43 रही है और 1,112 छात्रों में से 344 छात्र उत्तीर्ण हुए हैं, जिनकी पास प्रतिशतता 30.94 रही है। बोर्ड अध्यक्ष डॉ. जगबीर सिंह ने बताया कि वार्षिक प्रणाली के तहत डीएलएड द्वितीय वर्ष (नियमित) में 15,062 छात्र अध्यापक प्रविष्ट हुए जिनमें से 5,766 उत्तीर्ण रहे, जिनकी पास प्रतिशतता 38.28 रही है।
इस परीक्षा में 10,919 छात्राओं में से 4,644 छात्राएं उत्तीर्ण हुई है, जिनकी पास प्रतिशतता 42.53 रही है और 4143 छात्रों में से 1122 छात्र उत्तीर्ण हुए हैं, जिनकी पास प्रतिशतता 27.08 रही है। बोर्ड सचिव आरके सिंह ने बताया कि डीएड तृतीय सेमेस्टर (रि-अपीयर) की पास प्रतिशतता 37.04 रही। जिनमें छात्राओं की 40 प्रतिशत और छात्रों की 33.33 पास प्रतिशतता रही। इसी प्रकार डीएड चतुर्थ सेमेस्टर (रि-अपीयर) की पास प्रतिशतता 53.13 रही जिनमें छात्राओं की 54.69 एवं छात्रों की 49.64 पास प्रतिशतता रही।
70 फीसदी परीक्षार्थियों को नहीं पता कौन से स्कूल में हुई एसईपी और एसआईपी
डीएलएड परीक्षा में इस बार हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने एक नया प्रयोग किया। परीक्षार्थियों को 10 मिनट अतिरिक्त देते हुए 10 अन्य सवाल किए जिनमें दो सवाल अहम शामिल किए। इसमें विद्यार्थियों के लिए प्रथम वर्ष में होने वाली स्कूल एजूकेशन प्रोग्राम (एसईपी) और द्वितीय वर्ष में होने वाले स्कूल इंटर्नशिप प्रोग्राम (एसआईपी) किस स्कूल में हुई।
70 फीसदी परीक्षार्थियों को स्कूल का नाम याद नहीं था। गलत जवाब होने पर बोर्ड प्रशासन ने उन्हें फेल कर दिया और अब उन्हें अतिरिक्त एसईपी और एसआईपी करनी होगी। बोर्ड चेयरमैन ने बताया कि इन्हें सजा के तौर पर 15-15 दिन की अतिरिक्त ट्रेनिंग करनी होगी।
बायोमैट्रिक हाजिरी से नॉन अटेंडिंग सिस्टम रोकने की तैयारी
कम होते परिणाम पर बोर्ड चेयरमैन डॉ. जगबीर सिंह ने बताया कि अधिकतर जगह नॉन अटेंडिंग सिस्टम चल रहा है। प्रिंसिपल से बातचीत करके हाजिरी लगवा लेते हैं। इसे रोकने के लिए बायोमैट्रिक हाजिरी सिस्टम शुरू किया जा रहा है। बोर्ड सचिव ने बताया कि इससे ना केवल परीक्षार्थी की हाजिरी लगेगी बल्कि लोकेशन का भी पता लगेगा।