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योगी की राह पर नहीं चल सकेंगे खट्टर, कर्ज माफी पर फैसला मुश्किल

Fri, 07 Apr 2017 09:26 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 07 Apr 2017 09:26 AM IST
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Decision on debt waiver difficult for haryana government
मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर - फोटो : file photo
बूचड़खानों पर पाबंदी, गो तस्करी पर सख्ती और अवैध खनन पर शिकंजा। हरियाणा की खट्टर सरकार ने उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के सत्ता संभालने के बाद उठाए गए हर अहम कदम को उठाया है, लेकिन किसानों की कर्ज माफी के मामले में सीएम मनोहर लाल उत्तर प्रदेश की राह पर चाहकर भी अपने बूते नहीं चल सकेंगे। प्रदेश में लगभग 15 लाख किसान हैं और इनमें से करीब 90 फीसदी पर 56 हजार करोड़ का कर्ज है।
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ये कर्ज सिर्फ सरकारी या सहकारी बैंकों का है। इसमें साहूकारों का कर्ज शामिल नहीं है। प्रदेश का वर्ष 2017-18 का बजट एक लाख दो हजार तीन सौ 20 करोड़ है, कर्ज की राशि इसके आधे से कुछ अधिक है। यदि सरकार कर्ज का जोखिम अपने दम पर लेना चाहे तो उसका पूरा वित्तीय ढांचा ही गड़बड़ा जाएगा। हरियाणा सरकार कर्ज माफी की दिशा में केंद्र की मोदी सरकार के सहारे ही आगे बढ़ सकती है। चूंकि एकमुश्त किसानों का पूरा कर्जा माफ करना आसान नहीं है।
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इसे देखते हुए ही स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज और खाद्य आपूर्ति राज्य मंत्री कर्ण देव कांबोज कह रहे हैं कि हरियाणा के हालात उत्तर प्रदेश से भिन्न हैं। उनका तर्क भी ठीक है, जिस पर भारतीय किसान यूनियन के नेता गुरनाम सिंह चढूनी और प्रेस प्रवक्ता राकेश कुमार भी मुहर लगाते हैं। उनका कहना है कि अगर उत्तर प्रदेश में खेती पर 100 रुपये प्रति हेक्टेयर खर्च है तो यहां एक हजार रुपये। फसल घाटे का सौदा हो चुकी है, लेबर महंगी है। बोरवेल सूख गया तो तीन लाख तक की चपत।
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बीते नौ साल में कर्ज में कई गुणा बढ़ोतरी हुई, चूंकि छह हजार रुपये प्रति क्विंटल वाली बासमती दो हजार रुपये क्विंटल बिकी। आलू-प्याज का दस रुपये के बजाय एक व दो रुपये मूल्य मिला। उन्होंने सरकार को सुझाव दिया कि जब तक न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम पर फसल खरीद को अपराध नहीं माना जाएगा, किसान की हालत नहीं सुधरेगी और कर्ज बढ़ेगा। 
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