हरियाणा का बजट: प्रति व्यक्ति आय के साथ बढ़ता जा रहा कर्ज का मर्ज, 2.23 लाख करोड़ रुपये हुआ बोझ
मुख्यमंत्री मनोहर लाल व वित्त सचिव टीवीएसएन प्रसाद ने कहा कि 2022-23 में राजस्व घाटा 0.98 लाने का लक्ष्य है। 2021-22 में यह 1.40 फीसदी रहा। इसमें लगातार कटौती कर रहे हैं। खर्च घटाए हैं, फिजूलखर्ची को रोका गया।
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हरियाणा के कर्ज का मर्ज बढ़ता जा रहा है। राज्य सकल घरेलू उत्पाद में उतार-चढ़ाव के साथ प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि हुई है लेकिन कर्जा भी उतरने के बजाय तेजी से चढ़ा है। वित्त वर्ष 2021-22 में प्रदेश पर कर्ज का बोझ बढ़कर 2.23 लाख करोड़ हो गया। 2022-23 में सरकार को कर्ज के 2.43 लाख करोड़ होने का अनुमान है। हालांकि, मुख्यमंत्री मनोहर लाल इसे निरंतर प्रक्रिया मानते हैं।
मुख्यमंत्री ने यहां बजट पेश करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि राज्य सकल घरेलू उत्पाद बढ़ने के साथ कर्ज बढ़ेगा। कर्ज लिए बिना सरकार नहीं चल सकती। पुराना कर्ज चुका रहे हैं और नया ले रहे। इसमें कोई डेथ ट्रेप नहीं। प्रति व्यक्ति आय निरंतर बढ़ रही है। 2021-22 में प्रति व्यक्ति आय 2.74 लाख रुपये अनुमानित है।
बीते वित्त वर्ष में यह 2.35 लाख रही। 2014-15 में 1.47 लाख रुपये थी। 2015-16 में प्रदेश का कर्ज एक लाख करोड़ पार होने की वजह बिजली निगमों का 29 हजार करोड़ का घाटा अपने ऊपर लेना भी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2020-21 में राज्य सकल घरेलू उत्पाद -5.03 प्रतिशत रहा। इसका सबसे बड़ा कारण कोरोना महामारी रही। बावजूद इसके अर्थव्यवस्था को पटरी पर ला रहे हैं।
राजस्व घाटा एक फीसदी से नीचे लाने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री मनोहर लाल व वित्त सचिव टीवीएसएन प्रसाद ने कहा कि 2022-23 में राजस्व घाटा 0.98 लाने का लक्ष्य है। 2021-22 में यह 1.40 फीसदी रहा। इसमें लगातार कटौती कर रहे हैं। खर्च घटाए हैं, फिजूलखर्ची को रोका गया। विभागों के खर्चों पर शिकंजा कसा। निगरानी बढ़ाई है। निकायों में खर्च होने वाली सारी राशि को राजस्व खर्च में ही डाल देते थे, उसमें से विकास पर खर्च पैसे को अब पूंजीगत व्यय में डाला है।
उससे भी राजस्व घाटा कम हुआ। उन्होने कहा कि कर्ज के 40 हजार करोड़ रुपये ले सकते थे लेकिन 30 हजार करोड़ ही लिए गए। विभागीय आवंटनों को नई तर्कसंगत बजट मांग से जोड़ा है। स्वायत्त संस्थानों ने संपत्ति पर खर्च के लिए लेखांकन प्रणाली में सुधार किया। हरियाणा वित्त सर्विसेज लिमिटेड की स्थापना की। कमजोर वर्गों को लाभ के लिए बीमा न्यास स्थापित किया।
ऐसे बढ़ा प्रदेश पर कर्ज
- वर्ष कर्ज की राशि
- 2014-15 70 हजार करोड़
- 2015-16 1.01 लाख करोड़
- 2016-17 1.24 लाख करोड़
- 2017-18 1.39 लाख करोड़
- 2018-19 1.56 लाख करोड़
- 2019-20 1.95 लाख करोड़
- 2020-21 2.05 लाख करोड़
- 2021-22 2.23 लाख करोड़
- 2022-23 2.43 लाख करोड़
एसजीडीपी में ऐसे आया उतार-चढ़ाव
- वर्ष प्रतिशत
- 2015-16 11.6
- 2016-17 10.5
- 2017-18 6.8
- 2018-19 8.7
- 2019-20 8.0
- 2020-21 -5.3
- 2021-22 9.8
पहली बार विधानसभा समितियों के जरिये पारित होगा बजट
हरियाणा का आम बजट पहली बार विधानसभा समितियों के जरिये पारित होगा। स्पीकर ज्ञान चंद गुप्ता ने बजट पेश होने के तुरंत बाद सदन की सहमति से आठ समितियां गठित कर दीं। हरियाणा गठन के बाद यह पहली बार हो रहा है, जब लोकसभा की तर्ज पर बजट पारित कराया जाएगा। विधानसभा उपाध्यक्ष रणबीर सिंह गंगवा समिति-1 के अध्यक्ष होंगे।
विधायक असीम गोयल समिति-2, विधायक गीता भुक्कल समिति-3, विधायक ईश्वर सिंह समिति-4, विधायक सीमा त्रिखा समिति-5, विधायक किरण चौधरी समिति-6, विधायक घनश्याम दास आरोड़ा समिति-7 व विधायक डॉ. अभय सिंह यादव समिति-8 के अध्यक्ष होंगे। बजट सत्र के लिए जारी समय सारिणी अनुसार 9 से 11 फरवरी (तीन दिन) तक विधानसभा की कोई बैठक नहीं होगी।
ये तीन सरकारी कार्य दिवस हैं और विधानसभा की ये समितियां बजट के विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श कर 14 मार्च को अपनी रिपोर्ट सदन में प्रस्तुत करेंगी। समितियां शनिवार, अवकाश के दिन भी कार्य करेंगी। इसे विधानसभा की अधिकृत कार्यवाही में शामिल किया जाएगा। इससे पहले बजट पेश होने के बाद अवकाश नहीं होता था। वित्त मंत्री के बजट अभिभाषण पर चर्चा कराकर उसे पास कराते थे। चर्चा के अंत में मुख्यमंत्री का जवाब आता है। इस बार बजट का आंकलन ये आठ समितियां करेंगी और उनकी रिपोर्ट के आधार पर बजट को पारित किया जाएगा।